संभल में विलुप्त हो चुके पौराणिक ‘ब्रह्मवर्त तीर्थ’ को प्रशासन ने अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की कार्रवाई शुरू की है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में तालाबों, झीलों और प्राचीन जल स्रोतों पर हुए कब्जों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत चिन्हांकन, कब्जामुक्ति और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। यह कार्रवाई बुधवार को तहसील संभल के थाना हयातनगर क्षेत्र के गांव मुजाहिदपुर सराय में की गई। प्रशासनिक टीम राजस्व एवं विकास विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची। एसडीएम निधि पटेल, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह और नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल के नेतृत्व में तालाब की पैमाइश कर पौराणिक ब्रह्मवर्त तीर्थ को कब्जामुक्त कराया गया। यह संभल के 68 पौराणिक तीर्थों में शामिल माना जाता है। इसी अभियान के तहत सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम कमलपुर सराय स्थित प्राचीन ‘वागभरती तीर्थ’ को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। प्रशासन के अनुसार, इस तीर्थ की भूमि पर अवैध रूप से खेती की जा रही थी। एसडीएम निधि पटेल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से पूरे जनपद में तालाबों, झीलों और नदियों का चिन्हांकन कर उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराने और सौंदर्यीकरण का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक तीन तालाबों और झीलों को कब्जामुक्त कराया जा चुका है, जहां विकास विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुजाहिदपुर सराय स्थित ब्रह्मवर्त तीर्थ करीब ढाई हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां अस्थायी अतिक्रमण किया गया था, जिसे हटाकर भूमि को मुक्त करा लिया गया है। विकास विभाग द्वारा गुरुवार से यहां सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा। एसडीएम निधि पटेल ने बताया कि इस तीर्थ की धार्मिक मान्यता काफी अधिक है। मान्यता है कि यहां लोग अपने पूर्वजों के स्मरण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।


