विश्व प्रसिद्ध राजगीर मलमास मेले में आज पहला शाही स्नान है। इसको लेकर सांधु-संतों के अलावा श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। मेले में संभावित भीड़ को देखते हुए जिला और मेला प्रशासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद तैयारियां की है। हर अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई है। मलमास मेले में शाही स्नान की शुरुआत सुबह 6 बजे से होगी, जो दोपहर एक बजे तक चलेगी। अनुमान के मुताबिक, शाही स्नान में अलग-अलग अखाड़ों, श्रद्धालुओं समेत करीब 1 लाख लोगों के आने की संभावना है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, शाही स्नान की विधिवत शुरुआत उदासीन अखाड़ा से होगी। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के साधु-संतों का जत्था स्नान के लिए निकलेगा। इस भव्य शाही स्नान में मुख्य रूप से खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा और सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा सहित विभिन्न अखाड़ों के महंत और साधु-संत शामिल होंगे। गुरुनानक कुंड से लेकर मुख्य ब्रह्मकुंड तक लगेगी डुबकी शाही स्नान का पवित्र अनुष्ठान सुबह 6 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) से शुरू हो जाएगा, जो दोपहर एक बजे तक अनवरत चलेगा। साधु-संतों का प्रथम शाही स्नान गुरुनानक कुंड में होगा। यहां स्नान करने के बाद संतों का जत्था सरस्वती नदी, फिर सप्तधारा और अंत में मुख्य ब्रह्मकुंड में स्नान कर अनुष्ठान को पूरा करेंगे। संतों के लिए विशेष प्रवेश, गैप में आम श्रद्धालु भी लगा सकेंगे डुबकी प्रशासन ने साधु-संतों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। आम श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि संतों को स्नान के लिए कतार में नहीं लगना होगा। उनके लिए मुख्य प्रवेश द्वार से कुंड तक जाने की विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं, मेला प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि शाही स्नान के दौरान जब दो अखाड़ों के बीच समय मिलेगा तो उस खाली समय में आम श्रद्धालुओं को भी कुंड में स्नान करने का मौका दिया जाएगा, ताकि कोई भी श्रद्धालु स्नान से वंचित न रहे। 17 मई को सीएम सम्राट चौधरी ने किया था उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 10 दिन पहले यानी 17 मई को राजगीर के मलमास मेले का उद्घाटन किया था। एक महीने यानी 15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के पवित्र गर्म पानी के 22 कुंड, 52 धाराओं में तीन शाही स्नान का महायोग है। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालुओं समेत नेपाल और श्रीलंका के साधु-संत, ऋषि मुनि शामिल हैं। मान्यताओं के अनुसार, इन कुंड में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप और कष्ट धुल जाते हैं। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। मलमास मेले को लेकर क्या हैं पौराणिक कथाएं मलमास मास को लेकर हिंदू धर्म में कई बेहद रोचक और ज्ञानवर्धक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब काल गणना के अनुसार 13वें महीने का निर्माण हुआ, तो इसके अवगुणों और मलिनता के कारण कोई भी देवता इसका उत्तराधिकारी या स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ। इस संकट की घड़ी में भगवान विष्णु ने आगे बढ़कर इसे सहर्ष स्वीकार किया और इसे अपना सबसे प्रिय नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिया। भगवान विष्णु के साथ-साथ स्वर्ग के सभी 33 कोटि देवता एक महीने के लिए राजगीर आकर रहने लगे। यही कारण है कि इस एक महीने के दौरान देश के अन्य सभी हिस्सों में मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर की धरती पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और स्नान करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। विश्व प्रसिद्ध राजगीर मलमास मेले में आज पहला शाही स्नान है। इसको लेकर सांधु-संतों के अलावा श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी है। मेले में संभावित भीड़ को देखते हुए जिला और मेला प्रशासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद तैयारियां की है। हर अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई है। मलमास मेले में शाही स्नान की शुरुआत सुबह 6 बजे से होगी, जो दोपहर एक बजे तक चलेगी। अनुमान के मुताबिक, शाही स्नान में अलग-अलग अखाड़ों, श्रद्धालुओं समेत करीब 1 लाख लोगों के आने की संभावना है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, शाही स्नान की विधिवत शुरुआत उदासीन अखाड़ा से होगी। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के साधु-संतों का जत्था स्नान के लिए निकलेगा। इस भव्य शाही स्नान में मुख्य रूप से खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा और सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा सहित विभिन्न अखाड़ों के महंत और साधु-संत शामिल होंगे। गुरुनानक कुंड से लेकर मुख्य ब्रह्मकुंड तक लगेगी डुबकी शाही स्नान का पवित्र अनुष्ठान सुबह 6 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) से शुरू हो जाएगा, जो दोपहर एक बजे तक अनवरत चलेगा। साधु-संतों का प्रथम शाही स्नान गुरुनानक कुंड में होगा। यहां स्नान करने के बाद संतों का जत्था सरस्वती नदी, फिर सप्तधारा और अंत में मुख्य ब्रह्मकुंड में स्नान कर अनुष्ठान को पूरा करेंगे। संतों के लिए विशेष प्रवेश, गैप में आम श्रद्धालु भी लगा सकेंगे डुबकी प्रशासन ने साधु-संतों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। आम श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि संतों को स्नान के लिए कतार में नहीं लगना होगा। उनके लिए मुख्य प्रवेश द्वार से कुंड तक जाने की विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं, मेला प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि शाही स्नान के दौरान जब दो अखाड़ों के बीच समय मिलेगा तो उस खाली समय में आम श्रद्धालुओं को भी कुंड में स्नान करने का मौका दिया जाएगा, ताकि कोई भी श्रद्धालु स्नान से वंचित न रहे। 17 मई को सीएम सम्राट चौधरी ने किया था उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 10 दिन पहले यानी 17 मई को राजगीर के मलमास मेले का उद्घाटन किया था। एक महीने यानी 15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के पवित्र गर्म पानी के 22 कुंड, 52 धाराओं में तीन शाही स्नान का महायोग है। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालुओं समेत नेपाल और श्रीलंका के साधु-संत, ऋषि मुनि शामिल हैं। मान्यताओं के अनुसार, इन कुंड में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप और कष्ट धुल जाते हैं। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। मलमास मेले को लेकर क्या हैं पौराणिक कथाएं मलमास मास को लेकर हिंदू धर्म में कई बेहद रोचक और ज्ञानवर्धक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब काल गणना के अनुसार 13वें महीने का निर्माण हुआ, तो इसके अवगुणों और मलिनता के कारण कोई भी देवता इसका उत्तराधिकारी या स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ। इस संकट की घड़ी में भगवान विष्णु ने आगे बढ़कर इसे सहर्ष स्वीकार किया और इसे अपना सबसे प्रिय नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिया। भगवान विष्णु के साथ-साथ स्वर्ग के सभी 33 कोटि देवता एक महीने के लिए राजगीर आकर रहने लगे। यही कारण है कि इस एक महीने के दौरान देश के अन्य सभी हिस्सों में मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर की धरती पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और स्नान करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है।


