मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को IMA के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अभिषेक रंजन को ज्ञापन सौंपकर उन पर घूसखोरी, मनमानी और चिकित्सकों के शोषण का आरोप लगाया। संगठन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। रिश्वत न देने वालों के क्लीनिकों पर ताला IMA द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि सिविल सर्जन कई गैरकानूनी कार्य कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि रिश्वत न देने वाले निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का पंजीकरण रद्द करने की धमकी दी जाती है। IMA के डॉक्टरों ने यह भी बताया कि 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, फिर भी चिकित्सकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। विभागीय कार्यों से संबंधित फाइलें लंबित संगठन ने आरोप लगाया कि विभागीय कार्यों से संबंधित फाइलें जानबूझकर लंबित रखी जाती हैं। बाद में दबाव बनाकर पैसे की मांग की जाती है। IMA पदाधिकारियों के अनुसार, इस तरह की कार्यशैली से जिले के चिकित्सकों में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त है। भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग ज्ञापन में मांग की गई है कि कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी की नियमित मासिक बैठकें आयोजित करने और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा बैठक में रखने की भी मांग की गई है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को तेज करेंगे IMA डॉक्टरों ने कहा कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भ्रष्टाचार और मनमानी के इन आरोपों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रतिनिधिमंडल में IMA अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार सिंह, सचिव डॉ. अमित आनंद, डॉ. पीके मधुकर, डॉ. आलोक निरंजन, राजकिशोर सिंह और डॉ. प्रणव प्रकाश सहित अन्य सदस्य शामिल थे। मधेपुरा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को IMA के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी अभिषेक रंजन को ज्ञापन सौंपकर उन पर घूसखोरी, मनमानी और चिकित्सकों के शोषण का आरोप लगाया। संगठन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। रिश्वत न देने वालों के क्लीनिकों पर ताला IMA द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि सिविल सर्जन कई गैरकानूनी कार्य कर रहे हैं। संगठन का आरोप है कि रिश्वत न देने वाले निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का पंजीकरण रद्द करने की धमकी दी जाती है। IMA के डॉक्टरों ने यह भी बताया कि 40 बेड से कम क्षमता वाले अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, फिर भी चिकित्सकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। विभागीय कार्यों से संबंधित फाइलें लंबित संगठन ने आरोप लगाया कि विभागीय कार्यों से संबंधित फाइलें जानबूझकर लंबित रखी जाती हैं। बाद में दबाव बनाकर पैसे की मांग की जाती है। IMA पदाधिकारियों के अनुसार, इस तरह की कार्यशैली से जिले के चिकित्सकों में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त है। भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग ज्ञापन में मांग की गई है कि कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सिविल सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी की नियमित मासिक बैठकें आयोजित करने और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा बैठक में रखने की भी मांग की गई है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को तेज करेंगे IMA डॉक्टरों ने कहा कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भ्रष्टाचार और मनमानी के इन आरोपों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रतिनिधिमंडल में IMA अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार सिंह, सचिव डॉ. अमित आनंद, डॉ. पीके मधुकर, डॉ. आलोक निरंजन, राजकिशोर सिंह और डॉ. प्रणव प्रकाश सहित अन्य सदस्य शामिल थे।


