Ebola In India: अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने देश भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में अब तक इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चौकस कर रही है।
फोर्ब्स (Forbes) की रिपोर्ट: “महामारी हमारे नियंत्रण से बाहर है”
फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस आउटब्रेक को लेकर गहरा अफसोस और गंभीर चिंता जताई है। अफ्रीका सीडीसी (Africa CDC) के महानिदेशक डॉ. जीन कासेया ने स्वास्थ्य नेताओं की एक बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी, “यह बहुत ज्यादा है (This is too much)। हम और अधिक अफ्रीकियों की मौत बर्दाश्त नहीं कर सकते।”
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेयेसस ने बताया कि इबोला से मरने वालों की संख्या बढ़कर 220 हो गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “फिलहाल, महामारी हमारे नियंत्रण से बाहर है।” हालात की गंभीरता को देखते हुए डब्ल्यूएचओ के प्रमुख खुद व्यक्तिगत रूप से कांगो (DRC) की यात्रा पर जा रहे हैं। अब 11 अफ्रीकी देशों को जोखिम में माना जा रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करते हुए आगाह किया कि “कोई भी एक देश अकेले इस तरह के प्रकोप का सामना नहीं कर सकता है।”
इसी वैश्विक आपातकाल (Global Emergency) के मद्देनजर भारत ने अपनी तैयारियों को समय रहते दोगुना कर दिया है।
एयरपोर्ट्स पर कड़ाई और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल
इस वैश्विक खतरे को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों और एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) को अलर्ट पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, यदि उड़ान के दौरान किसी यात्री में इबोला जैसे गंभीर लक्षण (बुखार, कमजोरी, उल्टी या ब्लीडिंग) दिखते हैं, तो एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय मानकों (WHO और IATA प्रोटोकॉल) के तहत मरीज के आस-पास की सीटों को सुरक्षित दूरी पर रखती हैं और लैंडिंग के बाद विमान को निर्धारित आइसोलेशन बे में पार्क कर पूरी तरह सैनिटाइज किया जाता है।
गुजरात में तेजी से बने आइसोलेशन वार्ड्स
भारत में गुजरात सरकार ने इबोला के खतरे से निपटने के लिए सबसे पहले बड़े कदम उठाए हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग शहरों में पुख्ता इंतजाम किए हैं:
अहमदाबाद सिविल अस्पताल: यहां संदिग्ध (suspected) मरीजों के लिए 32 बेड्स की एक विशेष ‘एपेक्स सुविधा’ शुरू की गई है।
एसवीपी (SVP) अस्पताल, अहमदाबाद: इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास होने के कारण, यहां प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए 60 बेड्स का समर्पित आइसोलेशन वार्ड तैयार है। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे के बीच आने वाले यात्रियों की सघन थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है।
न्यू सिविल अस्पताल (NCH), सूरत: सूरत में 10 बेड्स का स्पेशल आइसोलेशन वार्ड एक्टिव किया गया है। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पारुल वडगामा के मुताबिक, यह वार्ड वेंटिलेटर, मॉनिटर्स और जरूरी जीवन रक्षक दवाओं से लैस है। इसमें संदिग्ध मरीजों के लिए समर्पित लिफ्ट, अलग ओपीडी और पृथक एंट्री-एग्जिट रूट बनाए गए हैं, ताकि आम मरीजों में संक्रमण न फैले। लगभग 75 डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को इसकी विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
छत्तीसगढ़ में हाई अलर्ट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर इबोला को लेकर विशेष गाइडलाइंस और एडवायजरी जारी की है। प्रशासन ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को अंतरराष्ट्रीय और कनेक्टिंग फ्लाइट्स से आने वाले यात्रियों पर कड़ी नजर रखने और किसी भी संदिग्ध लक्षण वाले यात्री की तुरंत रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।
आंध्र प्रदेश में थर्मल स्कैनिंग अनिवार्य
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश सरकार ने भी वैश्विक चिंताओं को देखते हुए विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर विशेष इबोला स्क्रीनिंग काउंटर और जांच केंद्र स्थापित कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग अनिवार्य कर दी गई है।
तमिलनाडु सहित देश के अन्य राज्यों में अलर्ट
तमिलनाडु (चेन्नई एयरपोर्ट) सहित देश के अन्य राज्यों के एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (APHO) भी पूरी तरह मुस्तैद हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये सारे कदम सिर्फ सुरक्षा और एहतियात (Preventive Measures) के तौर पर उठाए जा रहे हैं, इसलिए आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


