‘क्या एक मजदूर की जान की कीमत कम है?’:दरभंगा में राजमिस्त्री की मौत, सीपीआई (एम) नेता बोले- मुआवजे पर अंचलाधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला

‘क्या एक मजदूर की जान की कीमत कम है?’:दरभंगा में राजमिस्त्री की मौत, सीपीआई (एम) नेता बोले- मुआवजे पर अंचलाधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला

दरभंगा बहेरा थाना इलाके के त्रिमुहानी चौक के पास रविवार शाम सड़क हादसे में एक राजमिस्त्री की दर्दनाक मौत हो गई। घटना को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती डीएमसीएच पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अंचलाधिकारी, बहेरी से दूरभाष पर बात कर मृतक के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की। श्याम भारती ने आरोप लगाया कि अंचलाधिकारी ने मुआवजे को लेकर गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया और कहा कि सड़क दुर्घटना का मुआवजा जिला परिवहन पदाधिकारी की ओर से दिया जाएगा। उन्होंने इसे प्रशासन की संवेदनहीनता बताते हुए सवाल किया कि क्या एक मजदूर की जान की कीमत कम है? काम से लौटने के दौरान हुआ हादसा मृतक की पहचान शंकररोहार गांव के रहने वाले 34 साल के पप्पू राम के रूप में की गई। पप्पू राम काम खत्म कर बाइक से त्रिमुहानी चौक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वे सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपुर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने डीएमसीएच रेफर कर दिया। रविवार की देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ा परिजन उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच लेकर पहुंचे, लेकिन रविवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी जानकी देवी, माता परमेश्वरी देवी समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जाता है कि पप्पू राम चार बहनों और दो भाइयों में सबसे बड़े थे तथा परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी के अलावा तीन वर्ष और 8 माह की मासूम पुत्रियां हैं। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। घटना की सूचना मिलने पर बहेड़ी थाना पुलिस मृतक के घर पहुंची और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की। सीपीआई (एम) ने 10 लाख रुपए मुआवजे, पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की सीपीआई (एम) ने सरकार और प्रशासन से मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा, पत्नी को सरकारी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था तथा त्रिमुहानी चौक पर स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि सात दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर डीएम कार्यालय पर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर पार्टी नेता अधिवक्ता हरिशंकर राम एवं युवा नेता हीरा मंडल भी मौजूद थे। दरभंगा बहेरा थाना इलाके के त्रिमुहानी चौक के पास रविवार शाम सड़क हादसे में एक राजमिस्त्री की दर्दनाक मौत हो गई। घटना को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती डीएमसीएच पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अंचलाधिकारी, बहेरी से दूरभाष पर बात कर मृतक के परिजनों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की। श्याम भारती ने आरोप लगाया कि अंचलाधिकारी ने मुआवजे को लेकर गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिया और कहा कि सड़क दुर्घटना का मुआवजा जिला परिवहन पदाधिकारी की ओर से दिया जाएगा। उन्होंने इसे प्रशासन की संवेदनहीनता बताते हुए सवाल किया कि क्या एक मजदूर की जान की कीमत कम है? काम से लौटने के दौरान हुआ हादसा मृतक की पहचान शंकररोहार गांव के रहने वाले 34 साल के पप्पू राम के रूप में की गई। पप्पू राम काम खत्म कर बाइक से त्रिमुहानी चौक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वे सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपुर ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने डीएमसीएच रेफर कर दिया। रविवार की देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ा परिजन उन्हें इलाज के लिए डीएमसीएच लेकर पहुंचे, लेकिन रविवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी जानकी देवी, माता परमेश्वरी देवी समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जाता है कि पप्पू राम चार बहनों और दो भाइयों में सबसे बड़े थे तथा परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पत्नी के अलावा तीन वर्ष और 8 माह की मासूम पुत्रियां हैं। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। घटना की सूचना मिलने पर बहेड़ी थाना पुलिस मृतक के घर पहुंची और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की। सीपीआई (एम) ने 10 लाख रुपए मुआवजे, पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की सीपीआई (एम) ने सरकार और प्रशासन से मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा, पत्नी को सरकारी नौकरी, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था तथा त्रिमुहानी चौक पर स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि सात दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर डीएम कार्यालय पर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर पार्टी नेता अधिवक्ता हरिशंकर राम एवं युवा नेता हीरा मंडल भी मौजूद थे।  

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