Barmer Government Schools: सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाना टेढ़ा खीर होता जा रहा है। बाड़मेर जिले में 97 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में 10 से भी कम नामांकन है। 20 से कम नामांकन वाले सैकड़ों में है। कम नामांकन को लेकर अब शिक्षा विभाग ने ऐसे विद्यालयों को टारगेट दिया है कि वे पूरा जोर लगाकर विद्यालयों में नामांकन बढ़ाएं। मुश्किल यह है कि आरटीई के नियमों के तहत बच्चा एक किमी दायरे से ही लाना पड़ रहा है। इस दूरी में बच्चे नहीं है।
रेगिस्तानी बाड़मेर जिले में छितराई आबादी है। यहां ढाणियों में लोग दूर-दूर तक रहते हैं। आरटीई(शिक्षा का अधिकार) नियम लागू हुआ तो तय हुआ कि प्राथमिक स्कूल एक किमी, उच्च प्राथमिक 02 किमी और माध्यमिक स्कूल 05 किमी की दूरी में होने चाहिए। ताकि बच्चों को ज्यादा दूरी तय कर स्कूल नहीं आना पड़े। इस वजह से बच्चे शिक्षा से वंचित भी नहीं रहे। इस नियम के लागू होने के बाद में बाड़मेर जिले में स्कूलों की संंख्या में गुणात्मक इजाफा हुआ।
बच्चे ही नहीं मिल रहे
एक किमी में विद्यालय खुलने के कारण कई गांव ढाणियां ऐसे है जहां पर बच्चे बहुत कम है। ऐसे 97 विद्यालय फिलहाल चिन्हित है जहां पर 10 से भी कम बच्चे दाखिल है। हालांकि स्कूल खुलने के वक्त न्यूनतम 20 बच्चों के नामांकन का नियम लागू कर दिया गया लेकिन स्कूल खुलने के बाद में यह संख्या घट गई। अब यह संख्या बढ़ नहीं रही है।
शिक्षकों को नोटिस..पर बच्चे ही नहीं
शिक्षकों को कम नामांकन पर लगातार नोटिस दिए जा रहे है लेकिन परिधि क्षेत्र में बच्चे ही नहीं होने से नामांकन करवाएं कहां पर। दूसरा गांव-गांव में निजी विद्यालय खुल गए हैं। निजी विद्यालयों बच्चों को बस की सुविधा दे रहे हैं। ऐसे में बच्चों का जुड़ाव निजी विद्यालयों में लगातार बढ़ रहा है।
एकल शिक्षकों के भरोसे स्कूल
नियमानुसार पांचवीं कक्षा तक के विद्यालय में कम से कम तीन शिक्षक होने चाहिए लेकिन अब इन स्कूलों में जहां नामांकन केवल 10 और 20 ही है वहां पर शिक्षक भी एक ही नियुक्त किया हुआ है। 10-20 बच्चों की इन स्कूलों में पांचों कक्षाएं एक साथ संचालित हो रही है ।
सरकारी स्कूल फैक्ट फाइल
11 से 15 नामांकन वाले राजकीय विद्यालय- 144
15 से 20 नामांकन वाले राजकीय विद्यालय- 296
नामांकन बढ़ाने के निर्देश
नामांकन बढ़ाने के निर्देश है। सभी स्कूलों में प्रवेशोत्सव और अन्य कार्यक्रम में विद्यालय परिधि क्षेत्र का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे और सरकारी विद्यालय से जुड़े यह प्रयास किए जाएंगे।- कृष्णसिंह राणीगांव, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक


