क्या सिर्फ चाहने से बन जाएगी बिहार की IPL टीम:टीम बनने में 2 बड़े पेच, कैसे बनती है नई टीम, पढ़ें 5 सवाल-जवाब में

क्या सिर्फ चाहने से बन जाएगी बिहार की IPL टीम:टीम बनने में 2 बड़े पेच, कैसे बनती है नई टीम, पढ़ें 5 सवाल-जवाब में

बिहार की भी अपनी IPL टीम होनी चाहिए। बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद टीम बनाने की डिमांड तेजी से उठने लगी। CM सम्राट चौधरी ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया तो लोगों ने सोशल मीडिया पर टीम के नाम भी सुझा दिए। बिहार की IPL टीम बनेगी क्या। सबसे बड़ा पेच क्या है। BCCI के नियम क्या हैं। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः बिहार की अपनी IPL टीम बनाने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः यह चर्चा हाल में सोशल मीडिया में तब तेज हुई जब वेदांत ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल ने X पर बिहार की अपनी IPL (इंडिया प्रीमियर लीग) टीम होने की वकालत की। उन्होंने बिहार के उभरते खिलाड़ियों (जैसे समस्तीपुर के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने इस सीजन शानदार प्रदर्शन किया, और ईशान किशन, मुकेश कुमार, साकिब हुसैन) का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार क्रिकेट का एक नया पावरहाउस है और इसे भी मुंबई इंडियंस या चेन्नई सुपर किंग्स की तरह अपनी पहचान मिलनी चाहिए। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। CM सम्राट चौधरी ने कहा- ‘बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन’ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन’ के साथ ‘मिशन’ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।’ सवाल-2ः क्या बिजनेसमैन की मांग करने से IPL की टीम बन जाएगी? जवाबः नहीं, सिर्फ मांग करने या इच्छा जताने से IPL टीम नहीं बन सकती। IPL में कोई भी नई टीम शामिल करने का एकाधिकार पूरी तरह से भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और IPL गवर्निंग काउंसिल के पास है। कोई भी बिजनेसमैन (चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो) तब तक टीम नहीं खरीद सकता जब तक BCCI आधिकारिक तौर पर नई टीम के लिए टेंडर जारी न करे। जब BCCI टेंडर निकालता है, तब बिजनेसमैन या कॉर्पोरेट कंपनियों को बोली में शामिल होना पड़ता है। जिसकी बोली सबसे ऊंची और BCCI के नियमों के मुताबिक होती है, उसे ही टीम मालिकाना हक मिलता है। सवाल-3ः IPL की नई टीम बनाने का BCCI का नियम और शर्त क्या है? जवाबः BCCI के तय नियमों (जैसे कि पिछली बार 2021-22 में लखनऊ और गुजरात की टीमों को शामिल करते वक्त अपनाए गए थे) के मुताबिक मुख्य शर्तें… BCCI सबसे पहले नई फ्रेंचाइजी के लिए टेंडर जारी करता है, जिसे खरीदने की एक निश्चित नॉन-रिफंडेबल फीस (जैसे 10 लाख रुपए प्लस जीएसटी) होती है। सवाल-4ः IPL की टीम बनाने की शर्त क्या बिहार पूरा करता है? जवाबः वर्तमान स्थिति को देखें तो बिहार अभी इन कड़े मानकों पर खरा उतरने की तरफ अग्रसर है… पटना के मोइनुल हक स्टेडियम को इंटरनेशनल लेवल का बनाने का प्लान तैयार है। काम चालू है। इसके अलावा राजगीर में इंटरनेशलन लेवल का क्रिकेट स्टेडियम बन रहा है। करीब 80% तक काम हो चुका है। सवाल-5ः जब सभी शर्तों को बिहार पूरा करने वाला है तो टीम बनाने में क्या दिक्कत है? जवाबः फिलहाल बिहार के सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती या पेच है कि लीग में जगह नहीं है। फिलहाल IPL में 10 टीमें खेल रही हैं और शेड्यूल पूरी तरह से पैक है। जब तक BCCI टीमों की संख्या बढ़ाकर 12 करने का फैसला नहीं करता, तब तक नई टीम का स्लॉट उपलब्ध ही नहीं होगा। हालांकि… IPL चेयरमैन ने संकेत दिया है कि भविष्य में (शायद 2027-2028 के बाद) 12 टीमों की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में इसे लेकर भारी रुचि है, लेकिन कुछ बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां हैं… बिहार की भी अपनी IPL टीम होनी चाहिए। बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के इस पोस्ट के बाद टीम बनाने की डिमांड तेजी से उठने लगी। CM सम्राट चौधरी ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया तो लोगों ने सोशल मीडिया पर टीम के नाम भी सुझा दिए। बिहार की IPL टीम बनेगी क्या। सबसे बड़ा पेच क्या है। BCCI के नियम क्या हैं। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः बिहार की अपनी IPL टीम बनाने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः यह चर्चा हाल में सोशल मीडिया में तब तेज हुई जब वेदांत ग्रुप के चेयरमैन और दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल ने X पर बिहार की अपनी IPL (इंडिया प्रीमियर लीग) टीम होने की वकालत की। उन्होंने बिहार के उभरते खिलाड़ियों (जैसे समस्तीपुर के 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने इस सीजन शानदार प्रदर्शन किया, और ईशान किशन, मुकेश कुमार, साकिब हुसैन) का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार क्रिकेट का एक नया पावरहाउस है और इसे भी मुंबई इंडियंस या चेन्नई सुपर किंग्स की तरह अपनी पहचान मिलनी चाहिए। इस पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। CM सम्राट चौधरी ने कहा- ‘बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन’ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन’ के साथ ‘मिशन’ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।’ सवाल-2ः क्या बिजनेसमैन की मांग करने से IPL की टीम बन जाएगी? जवाबः नहीं, सिर्फ मांग करने या इच्छा जताने से IPL टीम नहीं बन सकती। IPL में कोई भी नई टीम शामिल करने का एकाधिकार पूरी तरह से भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और IPL गवर्निंग काउंसिल के पास है। कोई भी बिजनेसमैन (चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो) तब तक टीम नहीं खरीद सकता जब तक BCCI आधिकारिक तौर पर नई टीम के लिए टेंडर जारी न करे। जब BCCI टेंडर निकालता है, तब बिजनेसमैन या कॉर्पोरेट कंपनियों को बोली में शामिल होना पड़ता है। जिसकी बोली सबसे ऊंची और BCCI के नियमों के मुताबिक होती है, उसे ही टीम मालिकाना हक मिलता है। सवाल-3ः IPL की नई टीम बनाने का BCCI का नियम और शर्त क्या है? जवाबः BCCI के तय नियमों (जैसे कि पिछली बार 2021-22 में लखनऊ और गुजरात की टीमों को शामिल करते वक्त अपनाए गए थे) के मुताबिक मुख्य शर्तें… BCCI सबसे पहले नई फ्रेंचाइजी के लिए टेंडर जारी करता है, जिसे खरीदने की एक निश्चित नॉन-रिफंडेबल फीस (जैसे 10 लाख रुपए प्लस जीएसटी) होती है। सवाल-4ः IPL की टीम बनाने की शर्त क्या बिहार पूरा करता है? जवाबः वर्तमान स्थिति को देखें तो बिहार अभी इन कड़े मानकों पर खरा उतरने की तरफ अग्रसर है… पटना के मोइनुल हक स्टेडियम को इंटरनेशनल लेवल का बनाने का प्लान तैयार है। काम चालू है। इसके अलावा राजगीर में इंटरनेशलन लेवल का क्रिकेट स्टेडियम बन रहा है। करीब 80% तक काम हो चुका है। सवाल-5ः जब सभी शर्तों को बिहार पूरा करने वाला है तो टीम बनाने में क्या दिक्कत है? जवाबः फिलहाल बिहार के सामने सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती या पेच है कि लीग में जगह नहीं है। फिलहाल IPL में 10 टीमें खेल रही हैं और शेड्यूल पूरी तरह से पैक है। जब तक BCCI टीमों की संख्या बढ़ाकर 12 करने का फैसला नहीं करता, तब तक नई टीम का स्लॉट उपलब्ध ही नहीं होगा। हालांकि… IPL चेयरमैन ने संकेत दिया है कि भविष्य में (शायद 2027-2028 के बाद) 12 टीमों की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में इसे लेकर भारी रुचि है, लेकिन कुछ बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां हैं…  

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