Virtual Influencer Market: आप भी सोशल मीडिया पर दिखने वाले मॉडल या इन्फ्लुएंसर पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं तो जरा रुकिए। क्योंकि सोशल मीडिया की इसी चकाचौंध में बड़े धोखे छिपे हैं। इंस्टाग्राम और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जो किरदार तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, असल दुनिया में उनका वजूद ही नहीं है। दरअसल ये वर्चुअल इन्फ्लुएंसर और एआइ मॉडल हैं, जो इंसानों से ज्यादा प्यार, फॉलोअर्स और पैसा बटोर रहे हैं।
कंपनियों के लिए तो ये किसी ‘अलादीन के चिराग’ जैसे हैं, जो न कभी थकते हैं, न बीमार पड़ते हैं, न छुट्टी मांगते हैं और न ही किसी विवाद या स्कैंडल में फंसकर ब्रांड का नाम डुबोते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां अब असली इंसानों को दरकिनार कर इन डिजिटल पुतलों पर अरबों डॉलर का दांव लगा रही हैं।
वैश्विक मार्केट रिसर्च फर्म ग्रैंड व्यू रिसर्च की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्चुअल इन्फ्लुएंसर और एआइ मॉडल का बाजार 6 अरब डॉलर का था, जो 2030 तक बढ़कर 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेंड केवल मनोरंजन या फैशन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में विज्ञापन, ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग की पूरी तस्वीर बदल सकता है।
लेकिन इस चमक के पीछे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है, क्या इंसानी भावनाओं, रचनात्मकता और नौकरियों की जगह अब एल्गोरिद्म ले रहे हैं?
ब्राजील की चर्चित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर लू डू मगालू ने पिछले वर्ष 25 लाख डॉलर से ज्यादा की कमाई की, तो अमेरिका की लिल मिक्वेला नाम की वर्चुअल मॉडल फैशन ब्रांड्स के साथ काम कर हर पोस्ट से करीब 20 हजार डॉलर कमाती है। भारत की वर्चुअल इन्फ्लुएंसर क्यारा भी तेजी से लोकप्रिय हुई है। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियां इन डिजिटल चेहरों को इसलिए पसंद कर रही हैं, क्योंकि इन पर पूरा नियंत्रण रहता है और विज्ञापन लागत भी घटती है।
हर पोस्ट पर लाखों की कमाई
1. लू डू मगालू (ब्राजील)
दुनिया की सबसे बड़ी वर्चुअल इन्फ्लुएंसर। सालाना 25 लाख डॉलर की कमाई। प्रति पोस्ट औसतन 33,000 डॉलर (लगभग 27 लाख रुपए) से अधिक कमाती हैं।
2. लिल मिक्वेला (अमेरिका)
दुनिया के बड़े लग्जरी फैशन ब्रांड्स की पोस्टर गर्ल बन चुकी मिक्वेला प्रति पोस्ट 20,000 डॉलर (लगभग 16.6 लाख रुपए) चार्ज करती हैं।
3. अलारा एक्स (तुर्की)
प्रति पोस्ट 5,000 डॉलर (लगभग 4.1 लाख रुपए) की कमाई।
4. क्यारा (भारत)
भारत की पहली और सबसे लोकप्रिय वर्चुअल इन्फ्लुएंसर क्यारा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। वह प्रति पोस्ट 3,000 डॉलर (लगभग 2.5 लाख रुपए) तक कमा रही हैं।
(Source: AIthority.com)
कंपनियों की पहली पसंद क्यों?
- कम लागत: विज्ञापन अभियानों की लागत में करीब 30 प्रतिशत तक कमी।
- कोई विवाद नहीं: किसी स्कैंडल का खतरा नहीं, ब्रांड की छवि सुरक्षित।
- पूर्ण नियंत्रण: ब्रांड की जरूरत के मुताबिक व्यवहार और प्रस्तुति।
- हमेशा उपलब्ध: न बीमारी, न छुट्टियां और न शूटिंग डेट की समस्या।
इसलिए पसंद आ रहे डिजिटल चेहरे
- 58 प्रतिशत लोग कम से कम एक वर्चुअल इन्फ्लुएंसर को फॉलो करते हैं।
- 75 प्रतिशत जेनरेशन-Z इन डिजिटल किरदारों से गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं।
- 35 प्रतिशत लोगों ने इन एआइ मॉडल्स के प्रमोशन या रिव्यू से प्रभावित होकर सामान खरीदा।
- 27 प्रतिशत लोग इनके क्रिएटिव और अनोखे कंटेंट की वजह से इन्हें फॉलो करते हैं।
- 19 प्रतिशत लोग इन किरदारों की काल्पनिक कहानी और प्रस्तुति से प्रभावित होते हैं।
(स्रोत: मार्केट.यूएस)
खतरे भी कम नहीं
डीपफेक और ‘परफेक्ट खूबसूरती’ का दबाव
- पहचान का संकट: आम यूजर्स कई बार असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते, जिससे धोखाधड़ी की आशंका बढ़ती है।
- मानसिक तनाव: हर फ्रेम में ‘परफेक्ट’ दिखने वाले एआइ मॉडल युवाओं में हीनभावना बढ़ा रहे हैं।
- रोजगार पर असर: जूनियर मॉडल्स, बैकग्राउंड डांसर्स, कैमरामैन और मेकअप आर्टिस्ट्स की नौकरियों पर असर पड़ रहा है।


