Pune Private Tanker Problem: हर साल जैसे ही गर्मियों का मौसम आता है और पारा बढ़ता है, पुणे के बड़े हिस्से में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। सोसायटियों और कॉलोनियों में नल सूख जाते हैं, टैंकरों की लंबी कतारें लग जाती हैं और हजारों नागरिक अपनी सबसे बुनियादी जरूरत यानी पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं।
सोचने वाली बात यह है कि ये हालात उस शहर की है जो एक नहीं दो नहीं बल्कि चार- चार बांधों से पानी लेता है। पुणे देश के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक है, लेकिन यहां का वॉटर सप्लाई सिस्टम इस रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है। पुणे नगर निगम के सामने यह एक बड़ी और गंभीर चुनौती है कि वह इस लगातार बढ़ती आबादी को समान रूप से और पर्याप्त पानी कैसे पहुंचाए, जबकि पानी के स्रोत सीमित हैं, बुनियादी ढांचा इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना हो चुका है और निगम के हाथ सरकार के पुराने कोटे के नियमों से बंधे हुए हैं।
मंजूर कोटे से कहीं आगे निकल गया शहर
शहर की आबादी जो साल 2021 में 70 लाख थी, वह अब साल 2025-26 में अनुमानित रूप से बढ़कर 77.76 लाख तक पहुंच गई है। इस भारी आबादी ने नगर निगम पर पानी की सप्लाई को लेकर भारी दबाव बना दिया है। अगर सरकार के तय मानक के हिसाब से देखें, तो पुणे शहर को हर साल 21.03 TMC थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट पानी की जरूरत है। इसका उल्टा, राज्य का जल संसाधन विभाग उसने पुणे के लिए केवल 16.36 TMC पानी ही मंजूर किया है। राज्य सरकार शहर की इस बढ़ती आबादी को मान्यता देने और कोटा बढ़ाने से इनकार कर रही है। नगर निगम लगातार अपना कोटा बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन कोटा बढ़ने के बजाय तय सीमा से ज्यादा पानी लेने के कारण उस पर हर साल 147 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है। यह बकाया राशि अब बढ़कर 1,020 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है, जिसे लेकर नगर निगम कानूनी रूप से विरोध कर रहा है।
चार बांधों से भी नहीं बुझ रही प्यास
पुणे शहर मुख्य रूप से मुथा नदी के ऊपरी हिस्से में बने चार बांधों की एक श्रृंखला से पानी लेता है, जिनके नाम हैं। कुछ खास इलाकों में पानी की कमी को दूर करने के लिए नगर निगम ने भामा आस्खेड बांध से भी पानी लेना शुरू कर दिया है। बढ़ती किल्लत को देखते हुए नगर निगम ने अब मुल्शी बांध से 5 TMC पानी निकालने की अनुमति मांगी है। इस मांग पर राज्य सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन अभी तक नगर निगम को मुल्शी बांध से पानी खींचना शुरू करने के लिए कोई आधिकारिक या लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।
इस पूरे मामले पर राज्य जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि पुणे शहर के लिए पानी की कोई कमी नहीं है क्योंकि बांधों में पर्याप्त पानी है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि शहरों में पानी की खपत बहुत ज्यादा बढ़ने के कारण पुणे के ग्रामीण इलाकों में पानी की सप्लाई कम हो गई है।
32% पानी लीकेज में हो रहा बर्बाद
शहर के सप्लाई नेटवर्क में कमियों के कारण अनुमानित 32 प्रतिशत पानी केवल लीकेज और चोरी की वजह से बर्बाद हो जाता है। नगर निगम अब इस बात का सटीक पता लगाने के लिए पूरे शहर में वॉटर मीटर लगा रहा है कि आखिर पानी का नुकसान कहां और कितना हो रहा है। इस बर्बादी को रोकने और सभी को समान रूप से पानी पहुंचाने के लिए शहर में 24×7 वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके तहत नई पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं और पानी की ऊंची टंकियां बनाई जा रही हैं। नगर निगम का दावा है कि उन्होंने पुराने शहर के इलाके में लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है, लेकिन नए और बाहरी इलाकों में अभी काम होना बाकी है।
गंदा पानी पीने से बीमार हो रहे लोग
इन 25 गांवों में से 12 गांव ऐसे हैं जो गुइयां-बैरे सिंड्रोम नाम की गंभीर बीमारी से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों को वर्तमान में केवल क्लोरीन मिला हुआ, बिना साफ किया हुआ कच्चा पानी मिल रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए 890 करोड़ रुपए की एक जल योजना का प्रस्ताव रखा गया है। इस योजना में 200 MLD का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, 71 किलोमीटर लंबी मुख्य ट्रांसमिशन लाइन और 390 किलोमीटर लंबी लाइनें शामिल हैं, जिससे साल 2052 तक लगभग 7.78 लाख लोगों को फायदा होगा। इसके अलावा, बाकी बचे 13 गांवों की पानी योजनाओं के लिए 1,156 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया है।
प्राइवेट टैंकरों का बढ़ता राज
पुणे नगर निगम के पास अपना खुद का टैंकर बेड़ा है, लेकिन शहर की इतनी बड़ी मांग को पूरा करने के लिए यह बेहद छोटा है। नतीजा यह है कि शहर के ज्यादातर इलाकों में पानी की कमी को पूरा करने का काम प्राइवेट टैंकर मालिक कर रहे हैं। इन प्राइवेट टैंकरों पर न तो नगर निगम का कोई नियंत्रण है और न ही किसी दूसरी अथॉरिटी का। जहां से पानी मिल जाता है वहां से पानी उठाकर ले आते हैं। जिनमें से कई जल स्रोत बेहद प्रदूषित हो चुके हैं। पानी से होने वाली बीमारियों और इन्फेक्शन से बचने के लिए नगर निगम अब खुद नागरिकों से अपील कर रहा है कि वे टैंकर का पानी इस्तेमाल करने से पहले उसकी शुद्धता की जांच जरूर करवा लें।
इन इलाकों के लिए टैंकर एकमात्र सहारा
फिलहाल नगर निगम में नरहे गांव के केवल 80 प्रतिशत हिस्से में पानी की सप्लाई कर पाता है, बाकी का 20 प्रतिशत हिस्सा नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण प्यासा है। हाल ही में निगम में शामिल हुए नए गांवों, होलकरवाड़ी, हांडेवाड़ी, औताडेवाड़ी, वडाचीवाड़ी, उंड्री और पिसोली में पुराना पाइपलाइन नेटवर्क बेहद कमजोर और नाकाफी है। इन इलाकों की जरूरत पूरी करने के लिए नगर निगम को खुद हर रोज 210 टैंकर तैनात करने पड़ते हैं। इन इलाकों में रोज सुबह पानी के टैंकरों का इंतजार करना इस बात का सीधा सबूत है कि पुणे के वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर को अभी कितना लंबा सफर तय करना बाकी है।


