लखीसराय धीरा पैक्स पर धान खरीद में घोटाले का आरोप:किसानों का भुगतान अटका, फर्जी नाम पर गबन; जांच की मांग

लखीसराय धीरा पैक्स पर धान खरीद में घोटाले का आरोप:किसानों का भुगतान अटका, फर्जी नाम पर गबन; जांच की मांग

लखीसराय के हलसी प्रखंड स्थित धीरा पैक्स में धान खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता और किसानों के भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। गांव के किसानों ने बिहार सरकार के सहकारिता विभाग को शिकायत पत्र भेजकर पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि धान खरीद के 48 घंटे के भीतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का भुगतान अनिवार्य है, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अधिकांश किसानों को राशि नहीं मिली है। फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान किसानों ने आरोप लगाया है कि पैक्स द्वारा फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान दिखाकर सरकारी राशि का गबन किया गया है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है, जिनके पास पर्याप्त कृषि भूमि नहीं है। किसानों का दावा है कि पैक्स अध्यक्ष ने अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम का उपयोग कर फर्जी भुगतान कराया है। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है। धान की राशि का भुगतान अब तक नहीं घोघसा गांव निवासी किसान राजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025-26 में लगभग 600 क्विंटल धान पैक्स में दिया था, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 220 क्विंटल ही दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शेष धान की राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसी तरह, घोघसा निवासी किसान शंकर कुमार ने कहा कि उन्होंने 530 क्विंटल धान जमा किया था, लेकिन पैक्स की ओर से केवल 200 क्विंटल का ही कागज दिया गया और 300 क्विंटल से अधिक धान का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग किसानों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने और बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग की है। इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में किसानों के बीच भारी आक्रोश है। वहीं, सहकारिता विभाग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सहकारिता पदाधिकारी सुमन कुमारी ने बताया कि धीरा पैक्स के किसानों की शिकायत मिली है और जांच कर जल्द समाधान किया जाएगा। लखीसराय के हलसी प्रखंड स्थित धीरा पैक्स में धान खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता और किसानों के भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। गांव के किसानों ने बिहार सरकार के सहकारिता विभाग को शिकायत पत्र भेजकर पैक्स अध्यक्ष और प्रबंधक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि धान खरीद के 48 घंटे के भीतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का भुगतान अनिवार्य है, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अधिकांश किसानों को राशि नहीं मिली है। फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान किसानों ने आरोप लगाया है कि पैक्स द्वारा फर्जी किसानों के नाम पर भुगतान दिखाकर सरकारी राशि का गबन किया गया है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया है, जिनके पास पर्याप्त कृषि भूमि नहीं है। किसानों का दावा है कि पैक्स अध्यक्ष ने अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम का उपयोग कर फर्जी भुगतान कराया है। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई गई है। धान की राशि का भुगतान अब तक नहीं घोघसा गांव निवासी किसान राजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2025-26 में लगभग 600 क्विंटल धान पैक्स में दिया था, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 220 क्विंटल ही दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शेष धान की राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसी तरह, घोघसा निवासी किसान शंकर कुमार ने कहा कि उन्होंने 530 क्विंटल धान जमा किया था, लेकिन पैक्स की ओर से केवल 200 क्विंटल का ही कागज दिया गया और 300 क्विंटल से अधिक धान का भुगतान आज तक नहीं किया गया है। दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग किसानों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने और बकाया भुगतान जल्द कराने की मांग की है। इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में किसानों के बीच भारी आक्रोश है। वहीं, सहकारिता विभाग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सहकारिता पदाधिकारी सुमन कुमारी ने बताया कि धीरा पैक्स के किसानों की शिकायत मिली है और जांच कर जल्द समाधान किया जाएगा।  

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