गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में एक अनोखा बदलाव देखा जा रहा है। यहां तैनात एक रिटायर्ड सेना का जवान अस्पताल परिसर को तंबाकू मुक्त बनाने के मिशन पर है, जिसने सैकड़ों लोगों को खैनी छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। यह पहल थावे प्रखंड के बरारी जगदीश गांव निवासी सिकंदर बैठा ने की है। 40 वर्षीय सिकंदर 2022 में सेना में नायक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अब वे अस्पताल में गार्ड के तौर पर अपनी ड्यूटी को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज सुधार का जरिया मानते हैं। अस्पताल के हर कोने पर रखते नजर सिकंदर बैठा का संकल्प है कि अस्पताल परिसर में कोई खैनी न खाए और न थूके। वे केवल गेट पर खड़े नहीं रहते, बल्कि अस्पताल के हर कोने पर नजर रखते हैं। खैनी खाने वाले लोग उन्हें देखते ही अपनी पुड़िया छिपाने लगते हैं। वे मरीजों, तीमारदारों के साथ-साथ अस्पताल कर्मचारियों की भी नियमित रूप से जांच करते हैं और उन्हें तंबाकू के नुकसान बताते हैं। अपनी लगन और आत्मीयता के कारण सिकंदर अब तक सैकड़ों लोगों की खैनी की आदत छुड़वा चुके हैं। शुरुआत में उन्हें कुछ विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी मुहिम जारी रखी। उनके नेक इरादों और सैन्य अनुशासन को देखकर अब हर कोई उनका सम्मान करता है। गोपालगंज के मॉडल अस्पताल में एक अनोखा बदलाव देखा जा रहा है। यहां तैनात एक रिटायर्ड सेना का जवान अस्पताल परिसर को तंबाकू मुक्त बनाने के मिशन पर है, जिसने सैकड़ों लोगों को खैनी छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। यह पहल थावे प्रखंड के बरारी जगदीश गांव निवासी सिकंदर बैठा ने की है। 40 वर्षीय सिकंदर 2022 में सेना में नायक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अब वे अस्पताल में गार्ड के तौर पर अपनी ड्यूटी को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज सुधार का जरिया मानते हैं। अस्पताल के हर कोने पर रखते नजर सिकंदर बैठा का संकल्प है कि अस्पताल परिसर में कोई खैनी न खाए और न थूके। वे केवल गेट पर खड़े नहीं रहते, बल्कि अस्पताल के हर कोने पर नजर रखते हैं। खैनी खाने वाले लोग उन्हें देखते ही अपनी पुड़िया छिपाने लगते हैं। वे मरीजों, तीमारदारों के साथ-साथ अस्पताल कर्मचारियों की भी नियमित रूप से जांच करते हैं और उन्हें तंबाकू के नुकसान बताते हैं। अपनी लगन और आत्मीयता के कारण सिकंदर अब तक सैकड़ों लोगों की खैनी की आदत छुड़वा चुके हैं। शुरुआत में उन्हें कुछ विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी मुहिम जारी रखी। उनके नेक इरादों और सैन्य अनुशासन को देखकर अब हर कोई उनका सम्मान करता है।


