BJP में जल्द होगा बड़ा फेरबदल, कई महामंत्रियों की छुट्टी तय! पंकज चौधरी और नितिन नबीन की मुलाकात के बाद क्या तय हुआ?

BJP में जल्द होगा बड़ा फेरबदल, कई महामंत्रियों की छुट्टी तय! पंकज चौधरी और नितिन नबीन की मुलाकात के बाद क्या तय हुआ?

Preparations For Big Changes In BJP UP: उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े बदलाव को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर जल्द विराम लग सकता है। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद संगठन को नए सिरे से तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। इसी सिलसिले में बुधवार को दिल्ली में भाजपा नेतृत्व के बीच लंबी बैठक हुई, जिसमें संगठन के नए स्वरूप और पदाधिकारियों के चयन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

संगठन पदाधिकारियों के नाम लगभग तय

बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने करीब तीन घंटे तक मंथन किया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि यह बैठक 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए बेहद अहम थी। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश संगठन में महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, मीडिया टीम और क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। हालांकि क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पहले संगठन पदाधिकारियों की सूची जारी की जाएगी, जबकि क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा बाद में की जा सकती है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल सभी वर्गों और क्षेत्रों को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है।

सभी महामंत्री बदले जाने की चर्चा

भाजपा संगठन में इस बार बड़े पैमाने पर फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा सभी महामंत्रियों को बदला जा सकता है। इनमें से करीब 4 नेताओं को संगठन से बाहर किया जा सकता है, जबकि कुछ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दिए जाने की तैयारी है।

युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों के नामों पर भी अभी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। इसको लेकर 22 मई को दिल्ली में एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि 30 मई तक भाजपा की नई प्रदेश टीम की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

2027 चुनाव पर भाजपा की नजर

भाजपा नेतृत्व 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार में जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। पार्टी चाहती है कि हर वर्ग और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिले ताकि चुनावी समीकरण मजबूत किए जा सकें। हालांकि सिफारिश, राजनीतिक दबाव के कारण पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन बनाना आसान नहीं माना जा रहा है। यही वजह है कि नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है।

दिल्ली-लखनऊ के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

बताया जा रहा है कि संगठन में पद पाने और अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश में कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा और संघ के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकातों का दौर जारी है। कई नेता संगठन में मजबूत जगह बनाने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार संगठन में युवाओं, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन को विशेष महत्व दे सकती है। ऐसे में नई टीम में कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

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