प्रशासन की बैरिकेडिंग से आस्था पर पहरा:राजगीर मलमास मेला; बिना दर्शन बाहर निकल रहे श्रद्धालु, तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश

प्रशासन की बैरिकेडिंग से आस्था पर पहरा:राजगीर मलमास मेला; बिना दर्शन बाहर निकल रहे श्रद्धालु, तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश

विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मलमास मेले में इस बार जिला प्रशासन की ओर से की गई कड़ी बैरिकेडिंग श्रद्धालुओं की आस्था और तीर्थ पुरोहितों की जीविका पर भारी पड़ती दिख रही है। मेले के मुख्य आकर्षण और आध्यात्मिक केंद्र ‘भगवान के ध्वज’ और ऐतिहासिक मंदिरों तक श्रद्धालुओं को नहीं जाने देने के कारण तीर्थ पुरोहितों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय पंडा कमेटी के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन के अड़ियल रवैए के कारण श्रद्धालु केवल ब्रह्मकुंड में स्नान कर बाहर निकलने को मजबूर हैं, जबकि मेले की मुख्य धार्मिक परंपराओं से उन्हें वंचित किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहित रंजीव उपाध्याय ने बताया कि इस पावन ध्वज का विशेष महत्व है, जहां 33 कोटि देवी-देवता विराजमान हैं। खुद मुख्यमंत्री ने इस ध्वजा का रोहण कर मलमास मेले का विधिवत प्रारंभ किया था। नियम के अनुसार, ब्रह्मकुंड में स्नान करने के बाद इस ध्वज और लक्ष्मी नारायण मंदिर का दर्शन करने पर ही पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन प्रशासन ने ऐसी बैरिकेडिंग कर दी है कि श्रद्धालु सिर्फ ब्रह्मकुंड में स्नान कर निकास द्वार से सीधे बाहर भेज दिए जा रहे हैं। इसके कारण न तो लोग लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंच पा रहे हैं और न ही सरस्वती कुंड में प्रथम स्नान कर पा रहे हैं। इस अव्यवस्था से श्रद्धालुओं को ध्वजारोहण के असली दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। प्रताड़ना का लगाया आरोप पंडा कमेटी के तीर्थ पुरोहित बलबीर उपाध्याय ने प्रशासन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राजगीर में 22 कुंड, 32 मंदिर और 33 कोटि देवताओं के दर्शन का विधान है, लेकिन पहली बार ऐसी पाबंदियां देखने को मिल रही हैं। इससे पहले भी कई बार पुरुषोत्तम (मलमास) मास लगा है, मगर ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं हुई। पहचान पत्र होने के बाद भी रोकने का आरोप पुरोहितों का आरोप है कि सरकार की ओर जारी पहचान पत्र (आई-कार्ड) होने के बावजूद उन्हें जगह-जगह रोका जा रहा है और अधिकारियों से लिखवाकर लाने की बात कहकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे सालों-साल भगवान की सेवा करते हैं और तीन साल तक इस मेले का इंतज़ार करते हैं ताकि उनकी जीविका चल सके। लेकिन प्रशासन के इस रवैए से उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया है। इस संबंध में जब पुरोहितों ने प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो उन्हें आश्वासन के बावजूद वार्ता से दरकिनार कर दिया गया। पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पुरोहितों के प्रति अपने इस रवैए को नहीं बदला और धार्मिक स्थलों तक पहुँच सुलभ नहीं की, तो यह गतिरोध मेले की साख को प्रभावित कर सकता है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा वहीं, इस मामले में राजगीर एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्हें पंडा कमेटी की ओर से मामले से अवगत कराया गया है। जो पूर्व से परंपरा चली आ रही है। उसको निर्वाहन किया जाएगा। जल्द ही शिकायत दूर कर ली जाएगी। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मलमास मेले में इस बार जिला प्रशासन की ओर से की गई कड़ी बैरिकेडिंग श्रद्धालुओं की आस्था और तीर्थ पुरोहितों की जीविका पर भारी पड़ती दिख रही है। मेले के मुख्य आकर्षण और आध्यात्मिक केंद्र ‘भगवान के ध्वज’ और ऐतिहासिक मंदिरों तक श्रद्धालुओं को नहीं जाने देने के कारण तीर्थ पुरोहितों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय पंडा कमेटी के सदस्यों का कहना है कि प्रशासन के अड़ियल रवैए के कारण श्रद्धालु केवल ब्रह्मकुंड में स्नान कर बाहर निकलने को मजबूर हैं, जबकि मेले की मुख्य धार्मिक परंपराओं से उन्हें वंचित किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहित रंजीव उपाध्याय ने बताया कि इस पावन ध्वज का विशेष महत्व है, जहां 33 कोटि देवी-देवता विराजमान हैं। खुद मुख्यमंत्री ने इस ध्वजा का रोहण कर मलमास मेले का विधिवत प्रारंभ किया था। नियम के अनुसार, ब्रह्मकुंड में स्नान करने के बाद इस ध्वज और लक्ष्मी नारायण मंदिर का दर्शन करने पर ही पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन प्रशासन ने ऐसी बैरिकेडिंग कर दी है कि श्रद्धालु सिर्फ ब्रह्मकुंड में स्नान कर निकास द्वार से सीधे बाहर भेज दिए जा रहे हैं। इसके कारण न तो लोग लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंच पा रहे हैं और न ही सरस्वती कुंड में प्रथम स्नान कर पा रहे हैं। इस अव्यवस्था से श्रद्धालुओं को ध्वजारोहण के असली दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। प्रताड़ना का लगाया आरोप पंडा कमेटी के तीर्थ पुरोहित बलबीर उपाध्याय ने प्रशासन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राजगीर में 22 कुंड, 32 मंदिर और 33 कोटि देवताओं के दर्शन का विधान है, लेकिन पहली बार ऐसी पाबंदियां देखने को मिल रही हैं। इससे पहले भी कई बार पुरुषोत्तम (मलमास) मास लगा है, मगर ऐसी स्थिति कभी उत्पन्न नहीं हुई। पहचान पत्र होने के बाद भी रोकने का आरोप पुरोहितों का आरोप है कि सरकार की ओर जारी पहचान पत्र (आई-कार्ड) होने के बावजूद उन्हें जगह-जगह रोका जा रहा है और अधिकारियों से लिखवाकर लाने की बात कहकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि वे सालों-साल भगवान की सेवा करते हैं और तीन साल तक इस मेले का इंतज़ार करते हैं ताकि उनकी जीविका चल सके। लेकिन प्रशासन के इस रवैए से उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट आ गया है। इस संबंध में जब पुरोहितों ने प्रशासनिक अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, तो उन्हें आश्वासन के बावजूद वार्ता से दरकिनार कर दिया गया। पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पुरोहितों के प्रति अपने इस रवैए को नहीं बदला और धार्मिक स्थलों तक पहुँच सुलभ नहीं की, तो यह गतिरोध मेले की साख को प्रभावित कर सकता है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा वहीं, इस मामले में राजगीर एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्हें पंडा कमेटी की ओर से मामले से अवगत कराया गया है। जो पूर्व से परंपरा चली आ रही है। उसको निर्वाहन किया जाएगा। जल्द ही शिकायत दूर कर ली जाएगी।  

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