गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस में नौकरी नहीं:हाईकोर्ट ने कहा- साफ छवि और अच्छा चरित्र जरूरी

गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को पुलिस में नौकरी नहीं:हाईकोर्ट ने कहा- साफ छवि और अच्छा चरित्र जरूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं, उन्हें पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में नौकरी नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और भरोसे से जुड़ी एक जिम्मेदार सेवा है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस भर्ती में उम्मीदवार का चरित्र और उसकी छवि अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने शेखर नामक एक अभ्यर्थी की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता शेखर के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया था कि उसके खिलाफ दर्ज मुकदमा गलत मंशा से कराया गया है और वह अभी तक किसी भी मामले में दोषी साबित नहीं हुआ है। इसलिए उसे पुलिस भर्ती से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि दोष अभी साबित नहीं हुआ है। पुलिस विभाग में भर्ती के लिए उम्मीदवार का रिकॉर्ड साफ होना अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर अपराध के आरोप लंबित हैं, तो सरकार और भर्ती एजेंसी उसे नौकरी के लिए अनुपयुक्त मान सकती है। न्यायालय ने आगे कहा कि पुलिस कानून लागू कराने वाली संस्था है। ऐसे में, यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहा कोई व्यक्ति पुलिस में भर्ती हो जाता है, तो इससे विभाग की छवि और जनता का भरोसा नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का भी हवाला दिया। न्यायालय ने दोहराया कि पुलिस भर्ती में चरित्र सत्यापन एक अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है और सरकार को विभाग की गरिमा तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए सही उम्मीदवारों का चयन करने का अधिकार है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *