नालंदा विश्वविद्यालय का आज तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। यूनिवर्सिटी कैंपस के 2000 सीट की क्षमता वाले ‘विश्वमित्रालय’ ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा शामिल होंगे। इसके अलावा, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन भी शामिल होंगे। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने एग्जाम्स के खत्म होने के महज 9 दिनों के अंदर ही दीक्षांत समारोह का आयोजन कर रहा है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का कहना है कि एग्जाम खत्म होने के 9 दिनों के अंदर दीक्षांत समारोह आयोजित करने का उद्देश्य छात्रों को बिना किसी देरी के उनकी उपाधियां सौंपना है, ताकि वे अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकें। 14 देशों के 219 छात्र-छात्राओं को मिलेगी उपाधि प्राचीन नालंदा की तर्ज पर वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर इस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-26 बैच के कुल 219 मेधावियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इनमें भारत के अलावा वियतनाम, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार समेत दुनिया के 14 अलग-अलग देशों से छात्र-छात्राएं शामिल हैं। बेटियों ने मारी बाजी: 8 में से 7 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम दीक्षांत समारोह में कुल 8 गोल्ड मेडल में से 7 पर छात्राओं ने कब्जा जमाया है। मुख्य समारोह के समापन के बाद मुख्य अतिथि डॉ. पीके मिश्रा की ओर से यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित ‘कौटिल्य सेंटर फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ का भी विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। अब पढ़िए, नालंदा यूनिवर्सिटी के 1500 सालों की पूरी कहानी दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2024 को लाल किले की प्राचीर से कहा था कि हम ज्ञान की परंपरा को आगे बढाएंगे। नालंदा विश्वविद्यालय को पुर्नजीवित, पुर्नजाग्रत करेंगे। जिस नालंदा विश्वविद्यालय जिक्र पीएम ने किया उसे करीब 800 साल पहले आक्रमणकारियों ने जला दिया था। जून 2024 में पीएम मोदी ने नालंदा यूनिवर्सिटी के नए परिसर का उद्घाटन किया था। उन्होंने उस समय भी कहा था कि ‘आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।’ उन्होंने यह भी कहा था कि ‘नालंदा केवल भारत के अतीत का ही पुनर्जागरण नहीं है, इसमें भारत ही नहीं एशिया के कितने देशों की विरासत जुड़ी है।’ तब उन्होंने यहां के 1600 साल पुराने खंडहरों का भी दौरा किया था। नालंदा विश्वविद्यालय का नया कैंपस पुराने खंडहरों से लगभग करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। 7वीं शताब्दी के चीनी यात्री ह्वेनसांग की किताबों में नालंदा महाविहार के बारे में लिखा है… ‘पूरा विहार ईंटों की एक दीवार से घिरा था। इसका एक दरवाजा सीधे शिक्षा केंद्र में खुलता था, जहां आठ बड़े हॉल में पढ़ाई होती थी। यहां गगनचुंबी नौ-मंजिला पुस्तकालय भी था, जहां 90 लाख से ज्यादा किताबें मौजूद थीं।’ इतिहासकारों का मानना है कि नालंदा इतना विशाल था कि हमलावरों के आग लगाने के बाद परिसर तीन महीने तक सुलगता रहा था, लेकिन सवाल उठता है कि दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा केंद्र को किसने जलाया? ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि 1190 के दशक में, तुर्क-अफगान सैन्य जनरल बख्तियार खिलजी ने विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था। 12वीं शताब्दी तक दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा का केंद्र रहा नालंदा विश्वविद्यालय आखिर कैसे तबाह हुआ; किताबों, रिसर्च पेपर्स और इतिहासकारों के हवाले से 1500 साल की पूरी कहानी… ‘इसमें कोई शक नहीं कि बख्तियार खिलजी ने ही नालंदा को जलाया’ बाबासाहेब अंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रो. आनंद सिंह ने ‘नालंदा महाविहार’ पर ‘डिक्लाइन ऑफ नालंदा’ रिसर्च पेपर और ‘नालंदा: अ ग्लोरियस पास्ट’ नाम की किताब लिखी हैं। प्रो. आनंद ‘डिक्लाइन ऑफ नालंदा’ में लिखते हैं, ‘धर्मस्वामिन 6 महीने तक नालंदा में रहे। नालंदा में एक समय 7 मंदिर, 14 बड़े और 84 छोटे विहार थे, जिन्हें मुस्लिमों ने नष्ट कर दिया था और उनकी देखभाल या संरक्षण के लिए वहां कोई नहीं बचा था। केवल दो विहार धा-ना-बा और घु-ना-बा ही इस्तेमाल के लायक बचे थे। साथ ही पूर्वी और पश्चिमी द्वार के साथ महाविहार दीवारें अस्तित्व में थीं, जो तारा और अन्य देवताओं के चित्रों से सजी हुईं थीं। हजारों भिक्षु वहां से भाग गए थे।’ प्रो. आनंद सिंह बताते हैं, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि बख्तियार खिलजी और उसके सैनिकों ने नालंदा को जलाया था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे में सबूत मिले हैं कि खुदाई में मिले दो-तिहाई मठों में आग लगा दी गई थी। ऐसा एक बार नहीं, समय के साथ कई बार हुआ था। आखिरी बार इसे 1235 ई. में जलाया गया था। इसके बाद भी यहां के लोगों ने इसे फिर से विकसित करने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।’ प्रो. आनंद सिंह बताते हैं, ‘तारानाथ ने अपनी किताब में नालंदा में हुई आगजनी की एक घटना का जिक्र किया है। इसमें दो तीर्थिका (तिब्बती ब्राह्मण) और कुछ श्रमणा (बौद्ध भिक्षु) के बीच झगड़ा हो जाता है। इसके बाद तीर्थिका आग के गोले नालंदा के एक मठ पर फेंक देते हैं, जिससे आग लग जाती है। बाद में उस पर काबू पा लिया जाता है। इस घटना से नालंदा के नष्ट होने का ताल्लुक नहीं है। नालंदा की खुदाई में पिघला हुआ एक कवच मिला, जिसकी बनावट तुर्की से मेल खाती है।’ ‘नालंदा यूनिवर्सिटी को ब्राह्मणों ने तुड़वाया, इसका कोई प्रमाण नहीं’ नालंदा विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति प्रो. अभय सिंह कहते हैं, ‘प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ब्राह्मणों ने तुड़वाया, इसका कहीं कोई प्रमाण नहीं है। जबकि बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी को जलाए जाने का एक प्रमाण मौजूद है। इस कॉन्ट्रोवर्सी में ज्यादा जाने से कोई लाभ नहीं है। इतना बड़ा इंस्टीट्यूशन जब अनसेफ हो गया और उस पर कई हमले हुए, आग लगा दी गई तब लोग उसे छोड़ कर चले गए। 3-4 आक्रमण रिकॉर्ड हैं। ऐसी संस्था का विनाश तो एकदम से नहीं हुआ, धीरे-धीरे लोग छोड़ कर चले गए, जिसके कारण विनाश हुआ। कुछ लोग मानते हैं कि दो ब्राह्मणों द्वारा आग लगा दी गई, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है। *********** ग्राफिक्स: अजित सिंह और अंकित द्विवेदी *********** रेफरेंसेस:
1. द वंडर दैट वाज इंडिया – एएल बाशम
2. ह्वेनसांग के आर्टिकल
3. द लाइफ ऑफ ह्वेन-सांग – शामन ह्वुई ली
4. चेजिंग द मॉन्क शैडो – मिशी सरन
5. तबकात-ए-नासिरी – मिन्हाज-ए-सिराज
6. पग सम जोन जैंग – सुम्पा खान पो
7. बायोग्राफी ऑफ धर्मस्वामिन
8. हिस्ट्री ऑफ बुद्धिस्म इन इंडिया – तारानाथ
9. द एंटीक्वेरियन रिमेंस इन बिहार – डीआर पाटिल
10. द अर्ली हिस्ट्री ऑफ इंडिया – विंसेंट स्मिथ
11. यूनिवर्सिटी ऑफ नालंदा – एचडी संकलिया
12. डिक्लाइन ऑफ नालंदा – प्रो. आनंद सिंह
13. नालंदा: अ ग्लोरियस पास्ट – प्रो. आनंद सिंह
14. https://x.com/Profdilipmandal/status/1804098775180300735 नालंदा विश्वविद्यालय का आज तीसरा दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। यूनिवर्सिटी कैंपस के 2000 सीट की क्षमता वाले ‘विश्वमित्रालय’ ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा शामिल होंगे। इसके अलावा, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन भी शामिल होंगे। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने एग्जाम्स के खत्म होने के महज 9 दिनों के अंदर ही दीक्षांत समारोह का आयोजन कर रहा है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट का कहना है कि एग्जाम खत्म होने के 9 दिनों के अंदर दीक्षांत समारोह आयोजित करने का उद्देश्य छात्रों को बिना किसी देरी के उनकी उपाधियां सौंपना है, ताकि वे अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकें। 14 देशों के 219 छात्र-छात्राओं को मिलेगी उपाधि प्राचीन नालंदा की तर्ज पर वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर इस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-26 बैच के कुल 219 मेधावियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इनमें भारत के अलावा वियतनाम, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार समेत दुनिया के 14 अलग-अलग देशों से छात्र-छात्राएं शामिल हैं। बेटियों ने मारी बाजी: 8 में से 7 गोल्ड मेडल छात्राओं के नाम दीक्षांत समारोह में कुल 8 गोल्ड मेडल में से 7 पर छात्राओं ने कब्जा जमाया है। मुख्य समारोह के समापन के बाद मुख्य अतिथि डॉ. पीके मिश्रा की ओर से यूनिवर्सिटी के नवनिर्मित ‘कौटिल्य सेंटर फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ का भी विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। अब पढ़िए, नालंदा यूनिवर्सिटी के 1500 सालों की पूरी कहानी दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2024 को लाल किले की प्राचीर से कहा था कि हम ज्ञान की परंपरा को आगे बढाएंगे। नालंदा विश्वविद्यालय को पुर्नजीवित, पुर्नजाग्रत करेंगे। जिस नालंदा विश्वविद्यालय जिक्र पीएम ने किया उसे करीब 800 साल पहले आक्रमणकारियों ने जला दिया था। जून 2024 में पीएम मोदी ने नालंदा यूनिवर्सिटी के नए परिसर का उद्घाटन किया था। उन्होंने उस समय भी कहा था कि ‘आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं।’ उन्होंने यह भी कहा था कि ‘नालंदा केवल भारत के अतीत का ही पुनर्जागरण नहीं है, इसमें भारत ही नहीं एशिया के कितने देशों की विरासत जुड़ी है।’ तब उन्होंने यहां के 1600 साल पुराने खंडहरों का भी दौरा किया था। नालंदा विश्वविद्यालय का नया कैंपस पुराने खंडहरों से लगभग करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। 7वीं शताब्दी के चीनी यात्री ह्वेनसांग की किताबों में नालंदा महाविहार के बारे में लिखा है… ‘पूरा विहार ईंटों की एक दीवार से घिरा था। इसका एक दरवाजा सीधे शिक्षा केंद्र में खुलता था, जहां आठ बड़े हॉल में पढ़ाई होती थी। यहां गगनचुंबी नौ-मंजिला पुस्तकालय भी था, जहां 90 लाख से ज्यादा किताबें मौजूद थीं।’ इतिहासकारों का मानना है कि नालंदा इतना विशाल था कि हमलावरों के आग लगाने के बाद परिसर तीन महीने तक सुलगता रहा था, लेकिन सवाल उठता है कि दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा केंद्र को किसने जलाया? ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि 1190 के दशक में, तुर्क-अफगान सैन्य जनरल बख्तियार खिलजी ने विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया था। 12वीं शताब्दी तक दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा का केंद्र रहा नालंदा विश्वविद्यालय आखिर कैसे तबाह हुआ; किताबों, रिसर्च पेपर्स और इतिहासकारों के हवाले से 1500 साल की पूरी कहानी… ‘इसमें कोई शक नहीं कि बख्तियार खिलजी ने ही नालंदा को जलाया’ बाबासाहेब अंबेडकर यूनिवर्सिटी के प्रो. आनंद सिंह ने ‘नालंदा महाविहार’ पर ‘डिक्लाइन ऑफ नालंदा’ रिसर्च पेपर और ‘नालंदा: अ ग्लोरियस पास्ट’ नाम की किताब लिखी हैं। प्रो. आनंद ‘डिक्लाइन ऑफ नालंदा’ में लिखते हैं, ‘धर्मस्वामिन 6 महीने तक नालंदा में रहे। नालंदा में एक समय 7 मंदिर, 14 बड़े और 84 छोटे विहार थे, जिन्हें मुस्लिमों ने नष्ट कर दिया था और उनकी देखभाल या संरक्षण के लिए वहां कोई नहीं बचा था। केवल दो विहार धा-ना-बा और घु-ना-बा ही इस्तेमाल के लायक बचे थे। साथ ही पूर्वी और पश्चिमी द्वार के साथ महाविहार दीवारें अस्तित्व में थीं, जो तारा और अन्य देवताओं के चित्रों से सजी हुईं थीं। हजारों भिक्षु वहां से भाग गए थे।’ प्रो. आनंद सिंह बताते हैं, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि बख्तियार खिलजी और उसके सैनिकों ने नालंदा को जलाया था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे में सबूत मिले हैं कि खुदाई में मिले दो-तिहाई मठों में आग लगा दी गई थी। ऐसा एक बार नहीं, समय के साथ कई बार हुआ था। आखिरी बार इसे 1235 ई. में जलाया गया था। इसके बाद भी यहां के लोगों ने इसे फिर से विकसित करने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।’ प्रो. आनंद सिंह बताते हैं, ‘तारानाथ ने अपनी किताब में नालंदा में हुई आगजनी की एक घटना का जिक्र किया है। इसमें दो तीर्थिका (तिब्बती ब्राह्मण) और कुछ श्रमणा (बौद्ध भिक्षु) के बीच झगड़ा हो जाता है। इसके बाद तीर्थिका आग के गोले नालंदा के एक मठ पर फेंक देते हैं, जिससे आग लग जाती है। बाद में उस पर काबू पा लिया जाता है। इस घटना से नालंदा के नष्ट होने का ताल्लुक नहीं है। नालंदा की खुदाई में पिघला हुआ एक कवच मिला, जिसकी बनावट तुर्की से मेल खाती है।’ ‘नालंदा यूनिवर्सिटी को ब्राह्मणों ने तुड़वाया, इसका कोई प्रमाण नहीं’ नालंदा विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति प्रो. अभय सिंह कहते हैं, ‘प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ब्राह्मणों ने तुड़वाया, इसका कहीं कोई प्रमाण नहीं है। जबकि बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी को जलाए जाने का एक प्रमाण मौजूद है। इस कॉन्ट्रोवर्सी में ज्यादा जाने से कोई लाभ नहीं है। इतना बड़ा इंस्टीट्यूशन जब अनसेफ हो गया और उस पर कई हमले हुए, आग लगा दी गई तब लोग उसे छोड़ कर चले गए। 3-4 आक्रमण रिकॉर्ड हैं। ऐसी संस्था का विनाश तो एकदम से नहीं हुआ, धीरे-धीरे लोग छोड़ कर चले गए, जिसके कारण विनाश हुआ। कुछ लोग मानते हैं कि दो ब्राह्मणों द्वारा आग लगा दी गई, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं है। *********** ग्राफिक्स: अजित सिंह और अंकित द्विवेदी *********** रेफरेंसेस:
1. द वंडर दैट वाज इंडिया – एएल बाशम
2. ह्वेनसांग के आर्टिकल
3. द लाइफ ऑफ ह्वेन-सांग – शामन ह्वुई ली
4. चेजिंग द मॉन्क शैडो – मिशी सरन
5. तबकात-ए-नासिरी – मिन्हाज-ए-सिराज
6. पग सम जोन जैंग – सुम्पा खान पो
7. बायोग्राफी ऑफ धर्मस्वामिन
8. हिस्ट्री ऑफ बुद्धिस्म इन इंडिया – तारानाथ
9. द एंटीक्वेरियन रिमेंस इन बिहार – डीआर पाटिल
10. द अर्ली हिस्ट्री ऑफ इंडिया – विंसेंट स्मिथ
11. यूनिवर्सिटी ऑफ नालंदा – एचडी संकलिया
12. डिक्लाइन ऑफ नालंदा – प्रो. आनंद सिंह
13. नालंदा: अ ग्लोरियस पास्ट – प्रो. आनंद सिंह
14. https://x.com/Profdilipmandal/status/1804098775180300735


