‘शाहरुख खान और अंबानी ने परमिट नहीं लिया…’, ऑटो-टैक्सी चालकों के मराठी सख्ती पर परिवहन मंत्री का बड़ा बयान

‘शाहरुख खान और अंबानी ने परमिट नहीं लिया…’, ऑटो-टैक्सी चालकों के मराठी सख्ती पर परिवहन मंत्री का बड़ा बयान

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर चालक यूनियनों और कई प्रवासी संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला किसी की रोजी-रोटी छीनने के लिए नहीं बल्कि यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद के लिए लिया गया है। यह कोई नया नियम नहीं है। यह पहले से मौजूद है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि शाहरुख खान, सलमान खान या अंबानी और अडानी ने सरकार से लाइसेंस और परमिट नहीं लिया, जो उन पर यह नियम लागू हो।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ‘इंडियन एक्सप्रेस टाउनहॉल’ कार्यक्रम में इस पूरे विवाद पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा से जुड़ा यह नियम नया नहीं है, बल्कि 1989 से लागू है और अब सिर्फ उसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।

‘यह नया नियम नहीं, 1989 से लागू है’

मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि कई विधायकों की ओर से आरटीओ में फर्जी परमिट और डुप्लीकेट दस्तावेजों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इसी दौरान यह मुद्दा सामने आया कि बड़ी संख्या में ऑटो-टैक्सी चालक मराठी नहीं जानते, जिससे यात्रियों के साथ विवाद की स्थिति बनती है। खासकर ग्रामीण महाराष्ट्र से आने वाले कई यात्री हिंदी बोलने में सहज नहीं होते, जिसके कारण कभी-कभी बहस और विवाद हो जाता है।

उन्होंने बताया कि अकेले मीरा-भायंदर शहर में किए गए एक सर्वे में 3500 ड्राइवरों में से 565 चालक ऐसे थे, जिन्हें मराठी नहीं आती थी।

चालकों को मराठी सिखाने के लिए दे रहे पैसे- मंत्री

राज्य सरकार ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया है। सरनाईक ने कहा कि सरकार सिर्फ आदेश जारी कर चुप नहीं बैठी है, बल्कि मुंबई मराठी साहित्य संगठन की मदद से एक व्यावहारिक हैंडबुक भी तैयार की गई है ताकि चालक आसानी से बोलचाल की मराठी सीख सकें।

उन्होंने कहा कि हर आधे घंटे की क्लास के लिए चालकों को 100 रुपये भी दिए जा रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी से मराठी में विद्वान बनने की उम्मीद नहीं कर रही। सिर्फ इतनी मराठी आनी चाहिए कि यात्री से बातचीत हो सके और विवाद टाला जा सके।

‘महाराष्ट्र में काम करना है तो मराठी जरूरी’

शिवसेना (एकनाथ शिंदे) नेता प्रताप सरनाईक ने कहा कि जब चालक लाइसेंस और परमिट लेते हैं, तब वे एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं जिसमें मराठी भाषा की जानकारी भी एक शर्त होती है। ऐसे में अब इसे जबरदस्ती कहना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद तुरंत लाइसेंस जब्त नहीं किए जाएंगे। पहली गलती पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

परिवहन मंत्री ने यह भी कहा कि मुंबई ने देशभर के लोगों को अपनाया है और यही महाराष्ट्र की पहचान है। लेकिन सम्मान दोनों तरफ से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यह नहीं कह रही कि लोग घर में मराठी बोलें, बल्कि सिर्फ यात्रियों से संवाद के लिए बोलचाल की भाषा सीखने की बात कही जा रही है।

शाहरुख, सलमान हमसे परमिट नहीं लेते- मंत्री

मराठी बनाम हिंदी विवाद में अक्सर श्रमिक वर्ग को निशाना बनाए जाने के आरोपों पर प्रताप सरनाईक ने कहा कि शाहरुख खान, सलमान खान, अंबानी या अडानी ने उनसे कोई लाइसेंस या परमिट नहीं लिया, इसलिए उन पर यह नियम लागू नहीं होता। लेकिन ऑटो-टैक्सी चालक जब परमिट या लाइसेंस लेते हैं, तब मराठी भाषा आने की शर्त उसमें होती हैं। सरनाईक ने जोर देकर कहा सड़क पर हर किसी से मराठी बोलने के लिए नहीं कहा जा रहा है, सिर्फ अपने यात्री से संवाद करना है।

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