EPF और EPS में क्या फर्क है, दोनों में कितना पैसा जमा होता है? बैलेंस चेक करने का प्रोसेस भी जानिए

EPF और EPS में क्या फर्क है, दोनों में कितना पैसा जमा होता है? बैलेंस चेक करने का प्रोसेस भी जानिए

EPF vs EPS Difference: कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF खाते में हर साल 31 मार्च को ब्याज की रकम जोड़ी जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPFO ने 8.25 फीसदी की दर से ब्याज तय किया है। अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपका EPF खाता है, तो यह ब्याज आपके खाते में आ गया होगा। लेकिन सवाल यह है कि इसे कहां और कैसे देखें? इसके साथ यह भी जानना जरूरी है कि आपकी सैलरी से कटने वाला पैसा दो जगह निवेश होता है एक EPF में दूसरा EPS में।

आपकी सैलरी से कटा पैसा जाता कहां है?

बहुत से कर्मचारियों को यह नहीं पता कि उनकी सैलरी से कटने वाला पैसा और नियोक्ता यानी employer का योगदान कहां जाता है। EPF के तहत कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 फीसदी हर महीने जमा करता है। यह पूरा 12 फीसदी EPF खाते में जाता है। नियोक्ता भी 12 फीसदी का योगदान देता है। लेकिन वह दो हिस्सों में बंटता है। इसमें से 3.67 फीसदी EPF खाते में जाता है और 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS खाते में जाता है। यह व्यवस्था उन कर्मचारियों पर लागू होती है जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपए तक है।

EPF interest rate 2025-26

EPF और EPS में क्या है असली फर्क

EPF और EPS दोनों एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट 1952 के तहत आते हैं। दोनों को एक तीन पक्षीय ट्रस्टी बोर्ड संभालता है जिसमें सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी तीनों के प्रतिनिधि होते हैं। लेकिन दोनों का मकसद अलग है।

EPF एक बचत खाते की तरह काम करता है जहां कर्मचारी और नियोक्ता दोनों मिलकर पैसा जमा करते हैं। यह रकम पूरी कामकाजी जिंदगी में बढ़ती रहती है और रिटायरमेंट पर एकमुश्त निकाली जा सकती है। सरकार हर साल इस जमा रकम पर ब्याज देती है।

EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में कर्मचारी खुद कोई पैसा नहीं डालता। इसमें केवल नियोक्ता का 8.33 फीसदी योगदान जाता है। 58 साल की उम्र के बाद इस स्कीम के तहत हर महीने पेंशन मिलती है। अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाए तो यह पेंशन उनके परिवार को मिलती रहती है। एक अहम बात यह है कि EPS खाते पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

पहलू EPF EPS
कर्मचारी का योगदान 12 फीसदी कुछ नहीं
नियोक्ता का योगदान 3.67 फीसदी 8.33 फीसदी
ब्याज 8.25 फीसदी सालाना कोई ब्याज नहीं
निकासी रिटायरमेंट पर एकमुश्त 58 साल की उम्र से मासिक पेंशन
मृत्यु के बाद मिलने वाला लाभ नॉमिनी को रकम मिलेगी परिवार को पेंशन मिलती है

ब्याज दर कौन तय करता है

EPF पर मिलने वाली सालाना ब्याज दर को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज तय करता है। यह फैसला केंद्रीय वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा के बाद लिया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह दर 8.25 फीसदी तय की गई है। यह ब्याज हर साल 31 मार्च को खाते में जोड़ा जाता है और पासबुक में मार्च की एंट्री के बाद दिखता है।

EPFO पोर्टल से ऐसे चेक करें बैलेंस

अगर आप घर बैठे अपने EPF खाते का बैलेंस और क्रेडिट हुआ ब्याज देखना चाहते हैं तो EPFO का पासबुक पोर्टल सबसे आसान तरीका है। इसके लिए आपको EPFO पासबुक पोर्टल पर जाना होगा। इसके बाद अपना UAN और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें। इसके बाद अपनी मेंबर आईडी चुनें और पासबुक आपके सामने खुल जाएगी।

इसके अलावा स्मार्टफोन के जरिए पासबुक देखने के लिए आपको उमंग ऐप डाउनलोड करना होगा। लेकिन पहले ये चेक करें कि आपका मोबाइल नंबर मेंबर ई-सेवा पोर्टल पर रजिस्टर्ड हुआ है या नहीं। इसके बाद-

  • उमंग ऐप खोलें
  • गवर्नमेंट सर्विसेज सेक्शन में EPFO चुनें
  • Employee Centric Services पर क्लिक करें
  • View Passbook ऑप्शन चुनें
  • अपना UAN दर्ज करें और Get OTP पर क्लिक करें
  • रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आया OTP डालें
  • लॉगिन करते ही पासबुक खुल जाएगी जहां क्रेडिट ब्याज दिखेगा।

रिटायरमेंट की तैयारी का मजबूत आधार

EPF और EPS मिलकर नौकरीपेशा लोगों के लिए एक मजबूत सुरक्षा जाल बनाते हैं। EPF रिटायरमेंट पर एकमुश्त रकम देता है जबकि EPS हर महीने पेंशन सुनिश्चित करता है। इसलिए अपने EPF खाते पर नजर रखना और सालाना ब्याज को समय पर चेक करना जरूरी है।

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