लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमत ध्वनि सीमा से अधिक न होः इमाम

लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमत ध्वनि सीमा से अधिक न होः इमाम

औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि की अनुमेय सीमा 75-80 डेसिबल, वाणिज्यिक क्षेत्रों में 70-75 डेसिबल, आवासीय क्षेत्रों में 65-70 डेसिबल और शांत घोषित इलाकों में 40-45 डेसिबल है। 

महानगर की नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने कहा कि पिछली सभी राज्य सरकारों ने मुसलमानों को आजादी तो दी, लेकिन उन्होंने समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं दिया। जबकि भाजपा की नई सरकार सिर्फ कानून को सख्ती से लागू कर रही है। कासमी ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के मुद्दे पर कहा कि ये नियम प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 1996-97 में बनाए गए मानदंडों पर आधारित हैं, जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि की अनुमेय सीमा 75-80 डेसिबल, वाणिज्यिक क्षेत्रों में 70-75 डेसिबल, आवासीय क्षेत्रों में 65-70 डेसिबल और शांत घोषित इलाकों में 40-45 डेसिबल है। कासमी ने कुछ ग्रामीण इलाकों में पुलिस द्वारा कथित तौर पर मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने की आई खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्होंने नियमों को ठीक से समझे बिना ऐसा किया। उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर को पूरी तरह से हटाने के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है। कासमी ने मस्जिद कमेटियों से अपील की कि वे अधिकारियों के साथ सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि लाउडस्पीकर का उपयोग अनुमत ध्वनि सीमा से अधिक न हो।

इमाम ने की बड़ी अपील

इमाम ने रविवार को बड़ी अपील की। उन्होंने मुसलमानों से हिंदू भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय की कुर्बानी से परहेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की हालिया अधिसूचना ने उचित स्थानीय बुनियादी ढांचे के अभाव में पशु वध को बहुत मुश्किल बना दिया है। मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने कहा कि यदि सरकार आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकती है, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए और साथ ही उसके वध और गोमांस के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

सबसे पहले इन सभी चीजों की व्यवस्था हो

राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह पशुवध के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें अधिकारियों द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के बिना पशुओं के वध पर रोक लगा दी गई है। दिशानिर्देश के मुताबिक, अधिकारी वध के लिए प्रमाण पत्र जारी करने से पहले बैल, सांड, गाय, बछड़े और भैंसों की उम्र एवं शारीरिक स्थिति का आकलन करेंगे। कासिम ने कहा कि सरकार को सबसे पहले इन सभी चीजों की व्यवस्था करनी चाहिए, हर क्षेत्र में बूचड़खाने बनाने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बाजार में पशु चिकित्सक उपलब्ध हों। यदि सरकार इस तरह की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम नहीं है, तो उसे गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए और पूरे देश में गायों के वध तथा गायों से संबंधित बूचड़खानों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे

कासमी ने पश्चिम बंगाल की नई सरकार द्वारा लागू किए गए पशु वध नियमों और धार्मिक स्थलों पर लाउड स्पीकर के इस्तेमाल संबंधी आदेश पर कहा कि मुसलमानों को विविधतापूर्ण समाज में ऐसी चीजों से बचना चाहिए जो दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं।
इमाम ने कहा कि हम अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करते हैं कि कृपया गाय की कुर्बानी न दें, क्योंकि इससे हमारे हिंदू भाइयों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय बकरियों की कुर्बानी दी जा सकती है। पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम का हवाला देते हुए, कासमी ने कहा कि यह कानून 1950 से लागू है और अब इसे और अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है।

  

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