यमुनानगर में करीब 53 साल पहले मृत हो चुके व्यक्ति के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि मृतक के नाम पर एक फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर वर्ष 2017 में वसीयत भी तैयार करवाई गई। मामले में शिकायतकर्ता ने पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां फर्जी वसीयत को रद्द कर दिया गया। अब पुलिस ने शिकायत और जांच के आधार पर आरोपी धर्म नारायण समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 1973 में लाडवा में हुई थी मौत शिकायतकर्ता मोहन लाल निवासी राजा साहब गली, जगाधरी ने बताया कि जोती राम पुत्र प्रभु उनके पिता के ताऊ थे। वह अविवाहित और निःसंतान थे तथा अपनी पूरी जिंदगी उनके परिवार के साथ ही रहे। जोती राम की मृत्यु 26 मई 1973 को गांव गुड़ी, तहसील लाडवा जिला कुरुक्षेत्र में हो चुकी थी। उनकी मौत के बाद परिवार की जमीन और संपत्ति पर वारिस होने का अधिकार मोहन लाल को था। मोहन लाल ने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी डीलर धर्म नारायण निवासी मॉडल कॉलोनी, यमुनानगर ने सुनियोजित साजिश के तहत मृतक जोती राम के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करवाया। किसी दूसरे मृत व्यक्ति के आधार कार्ड का किया इस्तेमाल इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति को जोती राम बनाकर 28 जुलाई 2017 को अपने पक्ष में फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वसीयत में शामिल गवाहों को भी पता था कि पेश किया गया व्यक्ति असली जोती राम नहीं बल्कि कोई फर्जी व्यक्ति है, फिर भी उन्होंने जानबूझकर धर्म नारायण का साथ दिया। जांच के दौरान पता चला कि जिस आधार नंबर का इस्तेमाल जोती राम के नाम पर किया गया, वह असल में चमन लाल पुत्र हवेली राम निवासी कमलपुरी, कांसापुर यमुनानगर का था। शिकायतकर्ता के अनुसार चमन लाल की भी मृत्यु 7 जनवरी 2018 को हो चुकी थी। आरोप है कि धर्म नारायण ने मृतक चमन लाल के आधार नंबर का इस्तेमाल कर जोती राम का फर्जी आधार कार्ड बनवाया। हरिद्वार में 2018 में दर्ज है मृत्यु मोहन लाल ने आरोप लगाया कि इसी आधार नंबर पर यमुनानगर नगर निगम में चमन लाल की मृत्यु दर्ज है, जबकि हरिद्वार नगर निगम में उसी नंबर पर जोती राम की मृत्यु 14 जनवरी 2018 को दर्ज करवाई गई। जबकि वास्तविकता यह है कि जोती राम की मौत वर्ष 1973 में ही हो चुकी थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब फर्जी वसीयत सामने आई तो उन्होंने जगाधरी कोर्ट में इसे चुनौती दी। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद धर्म नारायण के पक्ष में बनाई गई वसीयत को रद्द कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि कोर्ट में भी दस्तावेज फर्जी पाए गए। मोहान लाल ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि धर्म नारायण ने फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र और वसीयत तैयार कर जमीन हड़पने की कोशिश की। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी धर्म नारायण के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी एसआई जसबीर सिंह का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करेंगे।


