गेहूं अधिप्राप्ति में पिछड़ा औरंगाबाद:अधिकांश पैक्सों का नहीं खुला खाता, किसान बोले- सरकारी खरीद प्रक्रिया जटिल और खर्चीली

गेहूं अधिप्राप्ति में पिछड़ा औरंगाबाद:अधिकांश पैक्सों का नहीं खुला खाता, किसान बोले- सरकारी खरीद प्रक्रिया जटिल और खर्चीली

औरंगाबाद में इस साल भी गेहूं अधिप्राप्ति की रफ्तार बेहद धीमी है। सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बावजूद किसान पैक्सों के माध्यम से गेहूं बेचने में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। नतीजा यह है कि जिले में चयनित अधिकांश पैक्सों का खाता तक नहीं खुल सका है और खरीद लक्ष्य के मुकाबले अब तक बेहद कम गेहूं की खरीद हो पाई है। सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसके बावजूद जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की भागीदारी काफी कम दिखाई दे रही है। जिले में गेहूं खरीद के लिए कुल 189 समितियों का चयन किया गया था, जिनमें 179 पैक्स और 10 व्यापार मंडल शामिल हैं। सभी समितियों को प्रारंभिक तौर पर एक-एक लॉट यानी 290 क्विंटल गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन स्थिति यह है कि अधिकांश समितियां खरीद प्रक्रिया शुरू ही नहीं कर सकीं। 162 किसानों से लगभग 1005 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद जिला स्तर पर अब तक केवल 162 किसानों से लगभग 1005 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है, जो निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बेहद कम मानी जा रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कई प्रखंडों में अधिकांश पैक्सों का खाता तक नहीं खुला है। औरंगाबाद सदर प्रखंड में गेहूं अधिप्राप्ति के लिए 11 पैक्सों का चयन किया गया था। इनमें से केवल बेला और पोखराहा पैक्स ने एक-एक किसान से गेहूं खरीदा, जबकि बाकी नौ पैक्सों में खरीद प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
बारूण में 26 किसानों ने गेहूं खरीदा इसी प्रकार बारूण प्रखंड में चयनित 13 समितियों में से केवल 7 समितियों ने 26 किसानों से गेहूं खरीदा। दाउदनगर प्रखंड की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। यहां 13 समितियों का चयन किया गया था, लेकिन केवल कनाप पैक्स की ओर से 5 किसानों से गेहूं खरीदा गया। बाकी 12 पैक्सों का खाता तक नहीं खुल सका। देव प्रखंड में चयनित 16 पैक्सों में से मात्र तीन पैक्सों ने 11 किसानों से गेहूं खरीदा। वहीं गोह प्रखंड में चयनित 20 समितियों में से केवल तीन समितियों ने 11 किसानों से खरीदारी की।
धान अधिप्राप्ति में समितियों ने लिया था बढ़-चढ़कर भाग हसपुरा प्रखंड में 12 समितियों का चयन किया गया था, लेकिन इनमें से 10 का खाता तक नहीं खुला। केवल दो पैक्सों की ओर से 8 किसानों से गेहूं खरीदा गया। कुटुंबा प्रखंड में 19 समितियों में से केवल चार समितियों ने 19 किसानों से खरीदारी की। मदनपुर प्रखंड में भी 16 पैक्सों का चयन हुआ था, लेकिन केवल दो समितियों ने चार किसानों से ही गेहूं खरीदा। जिले के अन्य प्रखंडों की स्थिति भी लगभग इसी प्रकार की बताई जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि धान अधिप्राप्ति के दौरान जिले के अधिकांश पैक्सों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस समय खरीद लक्ष्य को भी बढ़ाना पड़ा था, लेकिन गेहूं अधिप्राप्ति में समितियों की उदासीनता और किसानों की बेरुखी के कारण लक्ष्य का केवल मामूली हिस्सा ही पूरा हो सका है। बैरांव पैक्स अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने बताया कि उनके पैक्स में एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब किसान खुद दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं तो पैक्स स्तर पर कुछ करना संभव नहीं है।
सरकारी स्तर पर गेहूं बेचने की प्रक्रिया जटिल वहीं, किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया काफी जटिल और खर्चीली है। बुमरू गांव के किसान संजय कुमार सिंह और सुही गांव के किसान सुदर्शन पांडेय ने बताया कि पैक्स में गेहूं बेचने के लिए किसानों को पहले पैक्स से बोरा लेना पड़ता है, फिर उसमें गेहूं भरकर गोदाम तक पहुंचाना होता है। इससे अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। किसानों के अनुसार प्रति क्विंटल 2 से 3 सौ रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। दूसरी ओर निजी व्यापारी सीधे खेत या घर से 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को सुविधा मिलती है। किसानों ने यह भी बताया कि सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान मिलने में देरी होती है और पैसों के लिए कई बार पैक्स का चक्कर लगाना पड़ता है। यही कारण है कि अधिकांश किसान सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय निजी व्यापारियों को गेहूं बेचना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं।
1275 किसानों ने किया था ऑनलाइन आवेदन जानकारी के अनुसार जिले में सरकारी स्तर पर गेहूं बेचने के लिए कुल 1275 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इनमें 940 रैयत और 335 गैर रैयत किसान शामिल थे। लेकिन आवेदन करने वाले किसानों में से केवल 162 किसान ही पैक्सों तक गेहूं बेचने पहुंचे। इससे साफ है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में सुधार और किसानों को सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराए बिना गेहूं अधिप्राप्ति का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। औरंगाबाद में इस साल भी गेहूं अधिप्राप्ति की रफ्तार बेहद धीमी है। सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बावजूद किसान पैक्सों के माध्यम से गेहूं बेचने में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं। नतीजा यह है कि जिले में चयनित अधिकांश पैक्सों का खाता तक नहीं खुल सका है और खरीद लक्ष्य के मुकाबले अब तक बेहद कम गेहूं की खरीद हो पाई है। सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसके बावजूद जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की भागीदारी काफी कम दिखाई दे रही है। जिले में गेहूं खरीद के लिए कुल 189 समितियों का चयन किया गया था, जिनमें 179 पैक्स और 10 व्यापार मंडल शामिल हैं। सभी समितियों को प्रारंभिक तौर पर एक-एक लॉट यानी 290 क्विंटल गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन स्थिति यह है कि अधिकांश समितियां खरीद प्रक्रिया शुरू ही नहीं कर सकीं। 162 किसानों से लगभग 1005 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद जिला स्तर पर अब तक केवल 162 किसानों से लगभग 1005 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है, जो निर्धारित लक्ष्य की तुलना में बेहद कम मानी जा रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कई प्रखंडों में अधिकांश पैक्सों का खाता तक नहीं खुला है। औरंगाबाद सदर प्रखंड में गेहूं अधिप्राप्ति के लिए 11 पैक्सों का चयन किया गया था। इनमें से केवल बेला और पोखराहा पैक्स ने एक-एक किसान से गेहूं खरीदा, जबकि बाकी नौ पैक्सों में खरीद प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
बारूण में 26 किसानों ने गेहूं खरीदा इसी प्रकार बारूण प्रखंड में चयनित 13 समितियों में से केवल 7 समितियों ने 26 किसानों से गेहूं खरीदा। दाउदनगर प्रखंड की स्थिति भी कुछ बेहतर नहीं है। यहां 13 समितियों का चयन किया गया था, लेकिन केवल कनाप पैक्स की ओर से 5 किसानों से गेहूं खरीदा गया। बाकी 12 पैक्सों का खाता तक नहीं खुल सका। देव प्रखंड में चयनित 16 पैक्सों में से मात्र तीन पैक्सों ने 11 किसानों से गेहूं खरीदा। वहीं गोह प्रखंड में चयनित 20 समितियों में से केवल तीन समितियों ने 11 किसानों से खरीदारी की।
धान अधिप्राप्ति में समितियों ने लिया था बढ़-चढ़कर भाग हसपुरा प्रखंड में 12 समितियों का चयन किया गया था, लेकिन इनमें से 10 का खाता तक नहीं खुला। केवल दो पैक्सों की ओर से 8 किसानों से गेहूं खरीदा गया। कुटुंबा प्रखंड में 19 समितियों में से केवल चार समितियों ने 19 किसानों से खरीदारी की। मदनपुर प्रखंड में भी 16 पैक्सों का चयन हुआ था, लेकिन केवल दो समितियों ने चार किसानों से ही गेहूं खरीदा। जिले के अन्य प्रखंडों की स्थिति भी लगभग इसी प्रकार की बताई जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि धान अधिप्राप्ति के दौरान जिले के अधिकांश पैक्सों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उस समय खरीद लक्ष्य को भी बढ़ाना पड़ा था, लेकिन गेहूं अधिप्राप्ति में समितियों की उदासीनता और किसानों की बेरुखी के कारण लक्ष्य का केवल मामूली हिस्सा ही पूरा हो सका है। बैरांव पैक्स अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने बताया कि उनके पैक्स में एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब किसान खुद दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं तो पैक्स स्तर पर कुछ करना संभव नहीं है।
सरकारी स्तर पर गेहूं बेचने की प्रक्रिया जटिल वहीं, किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया काफी जटिल और खर्चीली है। बुमरू गांव के किसान संजय कुमार सिंह और सुही गांव के किसान सुदर्शन पांडेय ने बताया कि पैक्स में गेहूं बेचने के लिए किसानों को पहले पैक्स से बोरा लेना पड़ता है, फिर उसमें गेहूं भरकर गोदाम तक पहुंचाना होता है। इससे अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। किसानों के अनुसार प्रति क्विंटल 2 से 3 सौ रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। दूसरी ओर निजी व्यापारी सीधे खेत या घर से 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को सुविधा मिलती है। किसानों ने यह भी बताया कि सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान मिलने में देरी होती है और पैसों के लिए कई बार पैक्स का चक्कर लगाना पड़ता है। यही कारण है कि अधिकांश किसान सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय निजी व्यापारियों को गेहूं बेचना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं।
1275 किसानों ने किया था ऑनलाइन आवेदन जानकारी के अनुसार जिले में सरकारी स्तर पर गेहूं बेचने के लिए कुल 1275 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इनमें 940 रैयत और 335 गैर रैयत किसान शामिल थे। लेकिन आवेदन करने वाले किसानों में से केवल 162 किसान ही पैक्सों तक गेहूं बेचने पहुंचे। इससे साफ है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में सुधार और किसानों को सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराए बिना गेहूं अधिप्राप्ति का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा।  

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