मैनपुरी के जनपद न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर गठित एक समिति ने आगरा स्थित राजकीय बालगृह (शिशु) का निरीक्षण किया। इस दौरान बालगृह में कई खामियां सामने आईं, जिस पर अधिकारियों ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए। समिति में अपर जनपद न्यायाधीश एफटीसी-1 कुलदीप सिंह और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नूतन चौहान शामिल थीं, जिन्होंने बालगृह का भौतिक निरीक्षण किया। समिति के अध्यक्ष तालेवार सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। निरीक्षण के समय प्रभारी अधीक्षक बेटा सिंह भी मौजूद रहे। अधीक्षक ने बताया कि बालगृह में शून्य से दस वर्ष तक के बच्चों को आश्रय दिया जाता है। वर्तमान में यहां 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 30 और 6 से 10 वर्ष आयु वर्ग के 15 बच्चे रह रहे हैं। इनमें मैनपुरी जनपद के दो बच्चे भी शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान एक ऐसा बच्चा मिला जिसे आंखों से दिखाई नहीं देता, जिसका शरीर पूरी तरह काम नहीं करता और उसे मिर्गी के दौरे भी आते हैं। निरीक्षण के दौरान आरजू नाम की एक बच्ची शारीरिक रूप से बेहद कमजोर पाई गई। इस पर समिति ने उसे तत्काल अस्पताल के एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) वार्ड में भर्ती कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बच्चों के स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया। बालगृह में लगे दो सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए, जिस पर प्रभारी अधीक्षक को जल्द से जल्द कैमरे ठीक कराने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, पाकशाला (रसोईघर) का निरीक्षण करने पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों के रहने और भोजन व्यवस्था में स्वच्छता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। निरीक्षण के बाद समिति ने बालगृह प्रशासन को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और बच्चों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


