औरंगाबाद में सुहागिन महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा:पति के दीर्घायु जीवन की कामना, पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्जला व्रत रखा

औरंगाबाद में सुहागिन महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा:पति के दीर्घायु जीवन की कामना, पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्जला व्रत रखा

औरंगाबाद में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री व्रत किया। शहर से लेकर गांव तक धार्मिक माहौल बना रहा। सुबह से ही वट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना करने वाली महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्जला व्रत रखकर भगवान से अपने पति के सुखी और दीर्घ जीवन की प्रार्थना की। सुबह करीब छह बजे से ही महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली लेकर घरों से निकलीं। पूजा थाली में जल, दूध, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, भीगे चने, गुड़ और पूजा सामग्री रखी गई थी। वट वृक्ष के पास पहुंचकर जल और दूध अर्पित किया। इसके बाद वट वृक्ष की सात, ग्यारह या इक्कीस बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटा और पति की लंबी आयु की कामना की। सावित्री और सत्यवान की कथा पूजा के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से सावित्री-सत्यवान की कथा भी सुनी। कथा में बताया गया कि किस प्रकार सावित्री ने अपने तप, समर्पण और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिए थे। इस कथा को सुनने के बाद महिलाओं ने अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा संपन्न होने पर महिलाओं ने बांस के पंखे से वट वृक्ष और अपने पति को हवा दी, जिसे इस पर्व की विशेष परंपरा माना जाता है। इसके साथ ही महिलाओं ने सास, ननद और परिवार की अन्य महिलाओं को भीगे चने, गुड़, फल और श्रृंगार सामग्री दान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजा के लिए महिलाओं की भारी भीड़ शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित प्राचीन वट वृक्षों के पास विशेष पूजा व्यवस्था की गई थी। सिन्हा कॉलेज परिसर, बराटपुर, सोन कॉलोनी, नॉर्थ कोयल परिसर, यादव कॉलेज रोड, अदरी नदी सूर्य मंदिर परिसर, चित्रगुप्त नगर, गांधीनगर और रमेश चौक सहित कई स्थानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। कई जगह कथा वाचकों को बुलाकर सामूहिक कथा श्रवण कराया गया, जबकि कुछ स्थानों पर सामूहिक पूजा कार्यक्रम भी आयोजित हुए। आचार्य विश्वजीत तिवारी ने बताया कि इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और बट सावित्री व्रत कथा सुनती हैं। वे भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। औरंगाबाद में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री व्रत किया। शहर से लेकर गांव तक धार्मिक माहौल बना रहा। सुबह से ही वट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना करने वाली महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार निर्जला व्रत रखकर भगवान से अपने पति के सुखी और दीर्घ जीवन की प्रार्थना की। सुबह करीब छह बजे से ही महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली लेकर घरों से निकलीं। पूजा थाली में जल, दूध, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, भीगे चने, गुड़ और पूजा सामग्री रखी गई थी। वट वृक्ष के पास पहुंचकर जल और दूध अर्पित किया। इसके बाद वट वृक्ष की सात, ग्यारह या इक्कीस बार परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटा और पति की लंबी आयु की कामना की। सावित्री और सत्यवान की कथा पूजा के दौरान महिलाओं ने सामूहिक रूप से सावित्री-सत्यवान की कथा भी सुनी। कथा में बताया गया कि किस प्रकार सावित्री ने अपने तप, समर्पण और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त कर लिए थे। इस कथा को सुनने के बाद महिलाओं ने अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा संपन्न होने पर महिलाओं ने बांस के पंखे से वट वृक्ष और अपने पति को हवा दी, जिसे इस पर्व की विशेष परंपरा माना जाता है। इसके साथ ही महिलाओं ने सास, ननद और परिवार की अन्य महिलाओं को भीगे चने, गुड़, फल और श्रृंगार सामग्री दान कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूजा के लिए महिलाओं की भारी भीड़ शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित प्राचीन वट वृक्षों के पास विशेष पूजा व्यवस्था की गई थी। सिन्हा कॉलेज परिसर, बराटपुर, सोन कॉलोनी, नॉर्थ कोयल परिसर, यादव कॉलेज रोड, अदरी नदी सूर्य मंदिर परिसर, चित्रगुप्त नगर, गांधीनगर और रमेश चौक सहित कई स्थानों पर महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। कई जगह कथा वाचकों को बुलाकर सामूहिक कथा श्रवण कराया गया, जबकि कुछ स्थानों पर सामूहिक पूजा कार्यक्रम भी आयोजित हुए। आचार्य विश्वजीत तिवारी ने बताया कि इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और बट सावित्री व्रत कथा सुनती हैं। वे भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।  

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