धमदाहा प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित जीविका दीदी अधिकार केंद्र ने एक टूटते परिवार को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुक्रवार को केंद्र की पहल और गहन काउंसिलिंग के बाद एक पति-पत्नी के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हो गया, जिसके बाद दोनों साथ रहने को तैयार हो गए। जानकारी के अनुसार, काजल कुमारी और कृष्ण कुमार का विवाह 15 अगस्त 2024 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। शादी के कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंततः जीविका दीदी अधिकार केंद्र तक पहुंचा। केंद्र में दोनों पक्षों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। पंचायत प्रतिनिधियों, केंद्र के कर्मियों और गवाहों की उपस्थिति में लंबी बातचीत और काउंसिलिंग सत्र चला। इस दौरान पति-पत्नी को आपसी संवाद के महत्व, परिवार की अहमियत और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लाभों के बारे में समझाया गया। काउंसिलिंग के बाद, दोनों पक्ष अपने मतभेद भुलाकर एक साथ रहने पर सहमत हो गए। पत्नी पक्ष ने परिवार के साथ सामंजस्य बिठाने और सास-ससुर की सेवा करने का आश्वासन दिया, जबकि पति ने पत्नी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का वचन दिया। समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच एक लिखित एकरारनामा तैयार किया गया, जिस पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर लिए गए। इस अवसर पर जीविका दीदी अधिकार केंद्र की डाक कोऑर्डिनेटर कुमारी नंदन, जेंडर सीआरपी अंजलि कुमारी और खुशबू कुमारी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे। स्थानीय लोगों ने केंद्र की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि जीविका दीदी अधिकार केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समरसता बनाए रखने और टूटते रिश्तों को बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र छोटे-छोटे विवादों को कानूनी लड़ाई में बदलने से पहले ही बातचीत और समझौते के माध्यम से सुलझा रहा है। केंद्र में घरेलू विवाद, पारिवारिक कलह और महिलाओं से संबंधित मामलों में पहले दोनों पक्षों की समस्याओं को सुना जाता है। इसके बाद संवाद और आपसी समझ के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण अब बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इस केंद्र पर पहुंच रहे हैं। धमदाहा प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित जीविका दीदी अधिकार केंद्र ने एक टूटते परिवार को फिर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुक्रवार को केंद्र की पहल और गहन काउंसिलिंग के बाद एक पति-पत्नी के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हो गया, जिसके बाद दोनों साथ रहने को तैयार हो गए। जानकारी के अनुसार, काजल कुमारी और कृष्ण कुमार का विवाह 15 अगस्त 2024 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। शादी के कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया और अंततः जीविका दीदी अधिकार केंद्र तक पहुंचा। केंद्र में दोनों पक्षों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। पंचायत प्रतिनिधियों, केंद्र के कर्मियों और गवाहों की उपस्थिति में लंबी बातचीत और काउंसिलिंग सत्र चला। इस दौरान पति-पत्नी को आपसी संवाद के महत्व, परिवार की अहमियत और सामाजिक समरसता बनाए रखने के लाभों के बारे में समझाया गया। काउंसिलिंग के बाद, दोनों पक्ष अपने मतभेद भुलाकर एक साथ रहने पर सहमत हो गए। पत्नी पक्ष ने परिवार के साथ सामंजस्य बिठाने और सास-ससुर की सेवा करने का आश्वासन दिया, जबकि पति ने पत्नी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का वचन दिया। समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच एक लिखित एकरारनामा तैयार किया गया, जिस पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर लिए गए। इस अवसर पर जीविका दीदी अधिकार केंद्र की डाक कोऑर्डिनेटर कुमारी नंदन, जेंडर सीआरपी अंजलि कुमारी और खुशबू कुमारी सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे। स्थानीय लोगों ने केंद्र की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि जीविका दीदी अधिकार केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समरसता बनाए रखने और टूटते रिश्तों को बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र छोटे-छोटे विवादों को कानूनी लड़ाई में बदलने से पहले ही बातचीत और समझौते के माध्यम से सुलझा रहा है। केंद्र में घरेलू विवाद, पारिवारिक कलह और महिलाओं से संबंधित मामलों में पहले दोनों पक्षों की समस्याओं को सुना जाता है। इसके बाद संवाद और आपसी समझ के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण अब बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इस केंद्र पर पहुंच रहे हैं।


