अफसरों की सख़्ती भी थानों की मनमानी पर अंकुश लगा पाने में नाकाम हो रही है। ताज़ा मामला रोहटा थाने का है। यहां SSP ऑफिस से थाने भेजे गए पीड़ित पर भी दरोगा ने तहरीर बदलने का दबाव बना दिया। उसे गवाह मांगे जा रहे हैं। पीड़ित शुक्रवार को दोबारा एसएसपी ऑफिस पहुंचा और अफसरों से शिकायत की। मामले की जांच CO को सौंप गई है। पहले एक नजर पूरे मामले पर
मामला रोहटा थाने के ग्राम रसूलपुर का है। यहां परवेज अपने परिवार के साथ रहता है। अपनी जीविका चलाने के लिए परवेज फलों का ठेला लगाता है। परवेज ने एसएसपी से शिकायत की उसके गांव का शौकीन पुत्र युसूफ अपराधी किस्म का व्यक्ति है। आरोप है कि शौकीन उससे 50 हजार रूपए की रंगदारी मांग रहा है। रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी मिल रही है। जेल काटकर बाहर आया है शौकीन
पीड़ित परवेज ने एसएससी को बताया कि शौकीन हत्या के एक मामले में 6 साल की सजा काटकर कुछ समय पहले की जमानत पर जेल से बाहर आया है। गांव में आते ही उसने लोगों को धमकाना शुरू कर दिया है। उससे सीधे 50 हजार रूपए की रंगदारी मांगी है, जिसके बाद परिवार दहशत में है। एसएसपी ऑफिस से थाने में भेजा गया
पक्ष जानने के बाद एसएसपी ऑफिस से अफसर ने परवेज को वापस रोहटा थाने भेजा। 14 मई को वह थाने पहुंचा तो वहां थाना अध्यक्ष पूजा पवार ने पूरी बात सुनी और उसे पूठ चौकी पर तैनात दरोगा अमित यादव के पास भेज दिया। आरोप है कि तहरीर देखते ही दरोगा अमित यादव ने उसे दर्ज करने से मना कर दिया। रंगदारी का आरोप हटाने के लिए कहा
परवेज ने आरोप लगाया कि दरोगा अमित यादव ने दूसरी तहरीर लिखकर देने की बात कही। दबाव बनाया कि वह नई तहरीर में से रंगदारी मांगने का आरोप हटा दे। तब ही वह उसकी रिपोर्ट दर्ज कराएगा वरना रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी। परवेज ने शुक्रवार को अफसरों को बताया कि उसे व उसके परिवार को जान का खतरा है। फिर भी पुलिस आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है।


