अयोध्या में पक्के घाटों से दूर होती जा रही सरयू नदी को फिर से राम की पैड़ी तक स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए बैराज निर्माण परियोजना को अब बेहद जरूरी माना जा रहा है। हालात यह हैं कि श्रद्धालुओं को स्नान के लिए तपती रेत पर लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ऐसे में वर्षों से प्रस्तावित सरयू बैराज परियोजना को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं। रामनगरी में नया घाट-गोंडा मार्ग के पुराने पुल और रेलवे पुल के बीच 820 मीटर लंबा बैराज प्रस्तावित है। इसकी चौड़ाई करीब 50 मीटर और ऊंचाई 23 मीटर रखी गई है। बैराज की निगरानी के लिए चारों ओर टू-लेन सड़क भी बनाई जाएगी, जिस पर हल्के वाहन चल सकेंगे। परियोजना के लिए अधिकांश विभागों से अनापत्ति मिल चुकी है। रेलवे, वन विभाग और मॉडल स्टडी समेत आठ में से सात आपत्तियों का निस्तारण हो चुका है। अब सिर्फ पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम एनओसी मिलना बाकी है। इसके लिए गोंडा और बस्ती के किसानों की जनसुनवाई वर्ष 2025 में गोंडा में कराई जा चुकी है। करीब सात वर्ष पहले तैयार डीपीआर के अनुसार बैराज परियोजना की लागत 2921 करोड़ रुपए आंकी गई थी। हालांकि अब पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद परियोजना की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में पुनरीक्षित डीपीआर तैयार करनी पड़ेगी। अनुसंधान एवं नियोजन खंड बस्ती के अधीक्षण अभियंता डीसी वर्मा के अनुसार पर्यावरण मंत्रालय से अंतिम अनापत्ति मिलते ही परियोजना को केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। 45 गेट वाला बैराज, 20 हजार हेक्टेयर सिंचाई को मिलेगा पानी प्रस्तावित बैराज का जलसंग्रहण क्षेत्र 87 हजार 220 वर्ग मीटर बताया गया है, जो लखीमपुर और बहराइच सीमा से घाघरा नदी के हिस्से को कवर करते हुए अयोध्या तक फैलेगा। बैराज में कुल 45 गेट लगाए जाएंगे। इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अयोध्या के पक्के घाटों पर सरयू का जलस्तर स्थायी रूप से बना रहेगा। साथ ही बस्ती जिले की सरयू पंप कैनाल को भी सालभर पानी मिल सकेगा। अभी तक खरीफ सीजन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पाता था, लेकिन बैराज बनने के बाद रबी और खरीफ दोनों सीजन में करीब 20 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव हो सकेगी। गडकरी ने की थी परियोजना की घोषणा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अयोध्या दौरे के दौरान इस बैराज परियोजना के निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद से परियोजना को रामनगरी की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचना योजनाओं में माना जा रहा है।


