नालंदा में विश्वस्तरीय सुविधाओं के बीच आस्था का संगम:15 स्थानों पर बने जर्मन हैंगर, सुरक्षा के लिए ‘आपदा मित्र’ और 250 कैमरे तैनात

नालंदा में विश्वस्तरीय सुविधाओं के बीच आस्था का संगम:15 स्थानों पर बने जर्मन हैंगर, सुरक्षा के लिए ‘आपदा मित्र’ और 250 कैमरे तैनात

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर में आयोजित होने वाले राजकीय मलमास मेला 2026 को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मेले के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने खुद कमान संभाल रखी है। डीएम-एसपी ने संबंधित अधिकारियों को कार्य में और गति लाने के निर्देश दिए। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को न केवल धार्मिक संतुष्टि देना है, बल्कि उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं और सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। कुल 15 स्थानों पर आधुनिक जर्मन हैंगर और टेंट पंडाल बनाए गए हैं इस बार मेले का स्वरूप बदला-बदला नजर आएगा क्योंकि पहली बार संपूर्ण मेला क्षेत्र, ब्रह्मकुंड परिसर और वैतरणी का एक विस्तृत ले-आउट प्लान तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। श्रद्धालुओं के आवासन को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसके तहत वीआईपी टेंट सिटी सहित कुल 15 स्थानों पर आधुनिक जर्मन हैंगर और टेंट पंडाल बनाए गए हैं। इन आवासन स्थलों पर शुद्ध पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य शिविर, हेल्प डेस्क और सुरक्षा के लिए पुलिस शिविर के साथ-साथ सीसीटीवी की चौबीस घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए ब्रह्मकुंड परिसर में भीड़ प्रबंधन के लिए लोहे का जिग-जैग बनाया गया है, जहाँ गर्मी से राहत देने हेतु मिस्ट फैन और मिस्ट कूलर लगाए गए हैं, साथ ही उनके मनोरंजन और जानकारी के लिए एलई़डी स्क्रीन पर भक्तिमय कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहेगा। नियंत्रण कक्ष से भीड़ की हर हलचल पर नजर रखी जा सके सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी इस वर्ष कई नवाचार देखने को मिल रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहली बार जिग-जैग से ब्रह्मकुंड तक ‘रेड कॉरिडोर’ का निर्माण किया गया है, जो केवल इमरजेंसी सेवाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा भीड़ के दबाव को कम करने के लिए होल्डिंग एरिया और बफर जोन विकसित किए गए हैं। तकनीक का सहारा लेते हुए ब्रह्मकुंड और सप्तधारा के निकास द्वार पर ऑडियो-विजुअल कैमरे लगाए गए हैं ताकि नियंत्रण कक्ष से भीड़ की हर हलचल पर नजर रखी जा सके। कुंड के भीतर ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए विशेष यंत्र लगाए गए हैं और 180 प्रशिक्षित आपदा मित्रों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी और सफाई पर भी विशेष जोर है। ‘पेयगंगा जल’ की आपूर्ति के लिए 300 प्याऊ और 125 स्टैंड पोस्ट बनाए गए हैं, जबकि स्वच्छता के लिए 1700 से अधिक सफाई कर्मियों की फौज तैनात की गई है जिनकी निगरानी मोबाइल ऐप के माध्यम से होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस की व्यवस्था के साथ-साथ खान-पान के लिए 25 ‘दीदी की रसोई’ स्टॉल लगाए गए हैं ताकि लोगों को सस्ते दर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए रिंग बस सेवा शुरू की गई है और 12 पार्किंग स्थलों के साथ एक विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। पूरे मेला क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा भारी संख्या में तैनात दंडाधिकारियों, पुलिस बल, 250 सीसीटीवी कैमरों और 16 वॉच टावर के कंधों पर है, जिससे इस बार का मलमास मेला भव्यता और सुरक्षा का एक नया मानक स्थापित करने के लिए तैयार दिख रहा है। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर में आयोजित होने वाले राजकीय मलमास मेला 2026 को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मेले के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने खुद कमान संभाल रखी है। डीएम-एसपी ने संबंधित अधिकारियों को कार्य में और गति लाने के निर्देश दिए। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इस वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को न केवल धार्मिक संतुष्टि देना है, बल्कि उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं और सुरक्षित माहौल प्रदान करना है। कुल 15 स्थानों पर आधुनिक जर्मन हैंगर और टेंट पंडाल बनाए गए हैं इस बार मेले का स्वरूप बदला-बदला नजर आएगा क्योंकि पहली बार संपूर्ण मेला क्षेत्र, ब्रह्मकुंड परिसर और वैतरणी का एक विस्तृत ले-आउट प्लान तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। श्रद्धालुओं के आवासन को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसके तहत वीआईपी टेंट सिटी सहित कुल 15 स्थानों पर आधुनिक जर्मन हैंगर और टेंट पंडाल बनाए गए हैं। इन आवासन स्थलों पर शुद्ध पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य शिविर, हेल्प डेस्क और सुरक्षा के लिए पुलिस शिविर के साथ-साथ सीसीटीवी की चौबीस घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुए ब्रह्मकुंड परिसर में भीड़ प्रबंधन के लिए लोहे का जिग-जैग बनाया गया है, जहाँ गर्मी से राहत देने हेतु मिस्ट फैन और मिस्ट कूलर लगाए गए हैं, साथ ही उनके मनोरंजन और जानकारी के लिए एलई़डी स्क्रीन पर भक्तिमय कार्यक्रमों का प्रसारण होता रहेगा। नियंत्रण कक्ष से भीड़ की हर हलचल पर नजर रखी जा सके सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी इस वर्ष कई नवाचार देखने को मिल रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहली बार जिग-जैग से ब्रह्मकुंड तक ‘रेड कॉरिडोर’ का निर्माण किया गया है, जो केवल इमरजेंसी सेवाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा भीड़ के दबाव को कम करने के लिए होल्डिंग एरिया और बफर जोन विकसित किए गए हैं। तकनीक का सहारा लेते हुए ब्रह्मकुंड और सप्तधारा के निकास द्वार पर ऑडियो-विजुअल कैमरे लगाए गए हैं ताकि नियंत्रण कक्ष से भीड़ की हर हलचल पर नजर रखी जा सके। कुंड के भीतर ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए विशेष यंत्र लगाए गए हैं और 180 प्रशिक्षित आपदा मित्रों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं जैसे पानी और सफाई पर भी विशेष जोर है। ‘पेयगंगा जल’ की आपूर्ति के लिए 300 प्याऊ और 125 स्टैंड पोस्ट बनाए गए हैं, जबकि स्वच्छता के लिए 1700 से अधिक सफाई कर्मियों की फौज तैनात की गई है जिनकी निगरानी मोबाइल ऐप के माध्यम से होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्थायी अस्पतालों और एम्बुलेंस की व्यवस्था के साथ-साथ खान-पान के लिए 25 ‘दीदी की रसोई’ स्टॉल लगाए गए हैं ताकि लोगों को सस्ते दर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए रिंग बस सेवा शुरू की गई है और 12 पार्किंग स्थलों के साथ एक विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। पूरे मेला क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा भारी संख्या में तैनात दंडाधिकारियों, पुलिस बल, 250 सीसीटीवी कैमरों और 16 वॉच टावर के कंधों पर है, जिससे इस बार का मलमास मेला भव्यता और सुरक्षा का एक नया मानक स्थापित करने के लिए तैयार दिख रहा है।  

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