जौनपुर के सिंगरामऊ क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दोषी संदीप मौर्य को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह राशि पीड़िता को दी जाएगी। अर्थदंड न देने पर दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला उमेश कुमार द्वितीय की अदालत ने सुनाया। मामले में पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और गवाहों के साक्ष्य निर्णायक साबित हुए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता अपनी 13 वर्षीय उम्र में मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसके मामा रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते थे। इसी दौरान आरोपी संदीप मौर्य ने किशोरी को घर में अकेला पाकर धमकाया और लगातार उसका यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने बताया कि आरोपी उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी देता था, जिसके डर से वह लंबे समय तक चुप रही। मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया जब पीड़िता गर्भवती हो गई। आरोप है कि आरोपी उसे बहाने से बदलापुर ले गया और उसका गर्भपात करा दिया। घर लौटने पर पीड़िता ने पूरी घटना अपने मामा को बताई, जिसके बाद पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और न्यायालय में दर्ज बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। बचाव पक्ष ने आरोपी को जमीन विवाद में फंसाने की दलील दी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोष सिद्ध कर सख्त सजा सुनाई। फैसले के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के खिलाफ ऐसे अपराधों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में कानून का भय और संदेश बना रहे।


