India, Russia और Iran ने मिलाया हाथ, जानिये BRICS Foreign Ministers Meeting में क्या कुछ हुआ खास

India, Russia और Iran ने मिलाया हाथ, जानिये BRICS Foreign Ministers Meeting में क्या कुछ हुआ खास
नयी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में वैश्विक अस्थिरता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। भारत ने सम्मेलन के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि व्यावहारिक और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। संघर्ष, जलवायु संकट, महामारी के बाद की चुनौतियां, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और बढ़ती महंगाई ने विकासशील देशों की चिंताओं को और गहरा किया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों की एकजुटता विशेष महत्व रखती है और समूह को केवल विचार विमर्श तक सीमित न रहकर प्रभावी तथा समन्वित जवाब तैयार करने होंगे।

इसे भी पढ़ें: BRICS Meeting: नई दिल्ली में PM मोदी की रूसी विदेश मंत्री Lavrov से अहम चर्चा, बढ़ी हलचल

जयशंकर ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष, समुद्री यातायात के लिए खतरे और ऊर्जा ढांचे में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। जयशंकर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित तथा निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शांति टुकड़ों में नहीं हो सकती और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाने से बचना आवश्यक है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष के स्थायी समाधान का मार्ग हैं। उन्होंने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बताते हुए कहा कि भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर रचनात्मक प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी वैश्विक प्राथमिकता बताया और कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
हम आपको बता दें कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, इंडोनेशिया के सुगियोनो और दक्षिण अफ्रीका के रोनाल्ड लामोला सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने पर बल दिया।
देखा जाये तो सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों ने भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को बढ़ाया है। भारत ने इस पृष्ठभूमि में भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला और विविध बाजारों की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि कई देश ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं तथा ब्रिक्स इन देशों को अधिक प्रभावी ढंग से सहायता प्रदान कर सकता है।
हम आपको बता दें कि ब्रिक्स समूह, जिसमें शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, उसका अब तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी सदस्य बना। आज यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भारत यात्रा भी विशेष चर्चा में रही। वह ऐसे विमान से दिल्ली पहुंचे जिस पर ‘मिनाब 168’ लिखा था। यह उस घटना का प्रतीक है जिसमें ईरान के अनुसार फरवरी में मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई थी। इस घटना ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मानवीय पहलू को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अराघची और जयशंकर के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और संपर्क परियोजनाओं पर चर्चा होने की भी खबरें हैं।
वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी भारत के साथ अपने देश के संबंधों को मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी दबावों और अनुचित प्रतिस्पर्धा के बावजूद रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति संबंधी अपने सभी समझौतों का पालन करेगा। उन्होंने कुडनकुलम परमाणु परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस और भारत के बीच ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि गहरी मित्रता पर आधारित हैं।
हम आपको यह भी बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी उठाए गए। जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है तथा सुरक्षा परिषद में सुधार अब और अधिक टाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जलवायु न्याय, वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच सुनिश्चित करना विकासशील देशों के हित में बेहद जरूरी है।
बहरहाल, भारत ने इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि आज की दुनिया में सहयोग, संवाद और सुधार ही स्थिरता का आधार बन सकते हैं। पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ब्रिक्स देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने स्पष्ट किया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत बनाने और अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में ब्रिक्स की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *