भदोही की एक अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में पति-पत्नी को दोषी ठहराया है। सत्र न्यायाधीश अखिलेश दुबे ने इंद्रजीत उर्फ बोले को 10 साल के सश्रम कारावास और 20,000 रुपये के अर्थदंड की सज़ा सुनाई, जबकि उसकी पत्नी वंदना देवी को 7 साल के सश्रम कारावास और 20,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। कुल 40,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह मामला 15 फरवरी 2018 का है, जब दोपहर करीब 2 बजे सुरियावां थाना क्षेत्र के विजयीपुर गांव निवासी राजधर पुत्र प्रभुनाथ ने पुलिस को तहरीर दी थी। तहरीर के अनुसार, इंद्रजीत उर्फ बोले अपने हाथ में लोहे की रॉड लिए हुए था और उसकी पत्नी वंदना देवी के हाथ में लाठी थी। दोनों ने बर्फी देवी और राजधर के पिता को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। बर्फी देवी राजधर के पिता के पीछे छिपकर मदद की गुहार लगा रही थीं। इसी दौरान, पति-पत्नी ने राजधर के पिता पर जान से मारने की नीयत से लाठी और रॉड से हमला कर दिया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें स्वरूप रानी चिकित्सालय, प्रयागराज रेफर कर दिया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। सुरियावां थाने में इस संबंध में अभियोग पंजीकृत किया गया और जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के आदेश और पुलिस अधीक्षक भदोही अभिनव त्यागी के निर्देशन में “ऑपरेशन कन्विक्शन” के तहत चिन्हित अपराधों में दोषियों के खिलाफ त्वरित और अधिकतम दंडात्मक कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पंजीकृत अभियोग में स्थानीय पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और डीजीसी दिनेश कुमार पाण्डेय की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, 13 मई 2026 को माननीय न्यायाधीश श्री अखिलेश दुबे, सत्र न्यायाधीश भदोही ने यह फैसला सुनाया। दोषी इंद्रजीत उर्फ बोले और वंदना देवी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304/34 के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने इंद्रजीत उर्फ बोले को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, वंदना देवी को 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 20,000 रुपये के अर्थदंड की सज़ा सुनाई गई। यदि अर्थदंड की धनराशि अदा नहीं की जाती है, तो प्रत्येक दोषी को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।


