जमशेदपुर ट्रिपल मर्डर केस; हाई-रिस्क कैटेगरी में आरोपी:जेल के स्पेशल वार्ड में CCTV से मॉनिटरिंग, लाई डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी

जमशेदपुर ट्रिपल मर्डर केस; हाई-रिस्क कैटेगरी में आरोपी:जेल के स्पेशल वार्ड में CCTV से मॉनिटरिंग, लाई डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी

जमशेदपुर के एग्रिको में हुए ट्रिपल मर्डर मामले के मुख्य आरोपी रवींद्र प्रसाद सिंह को घाघीडीह केंद्रीय कारा प्रशासन ने हाई-रिस्क बंदी घोषित करते हुए विशेष निगरानी में रखा है। उसकी हर गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ जेल कर्मियों की लगातार नजर बनी हुई है। सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे जेल अस्पताल के विशेष वार्ड में शिफ्ट किया गया है। जेल अधीक्षक अजय प्रजापति ने बताया कि आरोपी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। उसके आसपास ऐसे कैदियों को रखा गया है, जिनका व्यवहार शांत और संतुलित हो, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में बंदी की सुरक्षा के साथ-साथ अन्य कैदियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे अपराधियों का व्यवहार अलग, लगातार निगरानी जरूरी घाघीडीह जेल के पूर्व अधीक्षक सत्येंद्र चौधरी ने बताया कि परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की हत्या करने वाले आरोपियों का व्यवहार सामान्य अपराधियों से काफी अलग होता है। उन्होंने कहा कि कई आरोपी इस तरह की घटना के बाद गहरे मानसिक सदमे में चले जाते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह भावशून्य नजर आते हैं। ऐसे मामलों में बंदी के अगले कदम का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, इसलिए 24 घंटे निगरानी बेहद जरूरी होती है। वहीं, जेल चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार शर्मा के अनुसार आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं प्रतीत हो रही है। उसकी विस्तृत मनोवैज्ञानिक जांच कराई जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वह अपराधबोध, अवसाद या किसी अन्य मानसिक विकार से गुजर रहा है या नहीं। लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए कोर्ट में आज आवेदन इधर, मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अब आरोपी का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है। गुरुवार को पुलिस कोर्ट में इसके लिए आवेदन दे सकती है। सूत्रों के अनुसार कोर्ट ने इस संबंध में गुरुवार का समय निर्धारित किया है। यदि कोर्ट से अनुमति मिलती है, तो लाई डिटेक्टर टेस्ट किया जाएगा। इसके जरिए आरोपी से घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हासिल किए जा सकते हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस टेस्ट से घटना की सच्चाई तक पहुंचने और आरोपी के बयान की पुष्टि करने में मदद मिलेगी, जिससे पूरे मामले के खुलासे में तेजी आ सकती है। ————————————————— इसे भी पढ़ें… जमशेदपुर में ट्रिपल मर्डर; थानेदार के बयान पर केस दर्ज:पत्नी की हत्या, बच्चों की नींद और आत्महत्या की कोशिश पर उठ रहे सवाल जमशेदपुर एग्रिको ट्रिपल मर्डर केस एक ऐसा अनसुलझा सवाल बन गया है जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं। हालांकि पुलिस के सामने तीन ऐसे अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना जरूरी है। एक व्यक्ति, जिसने पूरी जवानी परिवार की खुशहाली के लिए खपा दी, जो बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुनता था। पत्नी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था, आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसने अचानक अपने हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में रवींद्र ही कातिल हैं, लेकिन उनके परिजन और पड़ोसी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर…. जमशेदपुर के एग्रिको में हुए ट्रिपल मर्डर मामले के मुख्य आरोपी रवींद्र प्रसाद सिंह को घाघीडीह केंद्रीय कारा प्रशासन ने हाई-रिस्क बंदी घोषित करते हुए विशेष निगरानी में रखा है। उसकी हर गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ जेल कर्मियों की लगातार नजर बनी हुई है। सुरक्षा और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे जेल अस्पताल के विशेष वार्ड में शिफ्ट किया गया है। जेल अधीक्षक अजय प्रजापति ने बताया कि आरोपी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। उसके आसपास ऐसे कैदियों को रखा गया है, जिनका व्यवहार शांत और संतुलित हो, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में बंदी की सुरक्षा के साथ-साथ अन्य कैदियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे अपराधियों का व्यवहार अलग, लगातार निगरानी जरूरी घाघीडीह जेल के पूर्व अधीक्षक सत्येंद्र चौधरी ने बताया कि परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं की हत्या करने वाले आरोपियों का व्यवहार सामान्य अपराधियों से काफी अलग होता है। उन्होंने कहा कि कई आरोपी इस तरह की घटना के बाद गहरे मानसिक सदमे में चले जाते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह भावशून्य नजर आते हैं। ऐसे मामलों में बंदी के अगले कदम का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, इसलिए 24 घंटे निगरानी बेहद जरूरी होती है। वहीं, जेल चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार शर्मा के अनुसार आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं प्रतीत हो रही है। उसकी विस्तृत मनोवैज्ञानिक जांच कराई जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वह अपराधबोध, अवसाद या किसी अन्य मानसिक विकार से गुजर रहा है या नहीं। लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए कोर्ट में आज आवेदन इधर, मामले की जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अब आरोपी का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी में है। गुरुवार को पुलिस कोर्ट में इसके लिए आवेदन दे सकती है। सूत्रों के अनुसार कोर्ट ने इस संबंध में गुरुवार का समय निर्धारित किया है। यदि कोर्ट से अनुमति मिलती है, तो लाई डिटेक्टर टेस्ट किया जाएगा। इसके जरिए आरोपी से घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब हासिल किए जा सकते हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस टेस्ट से घटना की सच्चाई तक पहुंचने और आरोपी के बयान की पुष्टि करने में मदद मिलेगी, जिससे पूरे मामले के खुलासे में तेजी आ सकती है। ————————————————— इसे भी पढ़ें… जमशेदपुर में ट्रिपल मर्डर; थानेदार के बयान पर केस दर्ज:पत्नी की हत्या, बच्चों की नींद और आत्महत्या की कोशिश पर उठ रहे सवाल जमशेदपुर एग्रिको ट्रिपल मर्डर केस एक ऐसा अनसुलझा सवाल बन गया है जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं। हालांकि पुलिस के सामने तीन ऐसे अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना जरूरी है। एक व्यक्ति, जिसने पूरी जवानी परिवार की खुशहाली के लिए खपा दी, जो बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने बुनता था। पत्नी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखता था, आखिर ऐसा क्या हुआ कि उसने अचानक अपने हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में रवींद्र ही कातिल हैं, लेकिन उनके परिजन और पड़ोसी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर….  

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