टैंक के गोले बनाम आसमान से रॉकेट! दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच छिड़ी आर-पार की जंग!

टैंक के गोले बनाम आसमान से रॉकेट! दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच छिड़ी आर-पार की जंग!

IDF: मध्य पूर्व में शांति की कोशिशें एक बार फिर बारूद के धुएं में खोती हुई नजर आ रही हैं। बुधवार को इजरायली रक्षा बल (IDF) ने पुष्टि की कि दक्षिणी लेबनान में सक्रिय उनके सैनिकों को निशाना बना कर हिजबुल्लाह ने कई रॉकेट दागे हैं। हालांकि, इस हमले में किसी भी इजरायली सैनिक के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसने क्षेत्र में पहले से ही नाजुक बनी स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

हमले का विवरण और IDF की प्रतिक्रिया

इजरायली सेना के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल के अनुसार, उत्तरी इजरायल के जारित इलाके में सायरन की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती जांच के बाद IDF ने साफ किया कि यह हमला हिजबुल्लाह की ओर से किया गया था। सेना ने बताया कि रॉकेट सैनिकों के बिल्कुल करीब गिरे, लेकिन किस्मत अच्छी थी कि किसी को चोट नहीं आई।

आतंकवादी को टैंक फायर के जरिये ढेर कर दिया

सिर्फ रॉकेट ही नहीं, इजरायली वायु सेना ने दक्षिणी लेबनान के ऊपर उड़ रहे कई ‘संदिग्ध हवाई लक्ष्यों’ (संभवतः ड्रोन) को भी मार गिराया। एक अन्य अभियान में, IDF ने अपनी ‘फॉरवर्ड डिफेंस लाइन’ के दक्षिण में निगरानी कर रहे एक आतंकवादी को टैंक फायर के जरिये ढेर कर दिया। इजरायल का कहना है कि वे दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के अपने मिशन पर अडिग हैं, ताकि अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

‘मैदान को नरक बना देंगे’: हिजबुल्लाह का कड़ा रुख

दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने एक बार फिर इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कासिम ने एक टेलीविजन संबोधन में घोषणा की कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताएं लेबनान का आंतरिक मामला हैं और इन पर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, ‘हम मैदान छोड़ कर नहीं भागेंगे। हम इस जमीन को इजरायल के लिए नरक बना देंगे।’ कासिम का यह बयान उस समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराने की कोशिशों में जुटा हुआ है। हिजबुल्लाह का यह अड़ियल रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और उग्र हो सकता है।

कागजों पर सिमटा युद्धविराम

हकीकत यह है कि मई 2026 के मध्य तक आते-आते, 17 अप्रेल को अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ युद्धविराम अब केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के बफर जोन में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और वर्तमान में लेबनान के लगभग 6% हिस्से पर उसका नियंत्रण है।

दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई गहरी

दैनिक आधार पर होने वाली यह गोलीबारी और रॉकेट हमले बताते हैं कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वाशिंगटन की सुविधा से 14 और 15 मई को इजरायल और लेबनान के बीच एक और दौर की गहन वार्ता होने वाली है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक व्यापक सुरक्षा समझौते पर पहुंचना और हिजबुल्लाह के मुद्दे का समाधान निकालना है।

नईम कासिम की धमकियां और इजरायल की सैन्य कार्रवाई-शांति का रास्ता कांटों भरा

बहरहाल,मध्य पूर्व के इस संघर्ष में अब सबकी नजरें आगामी शांति वार्ता पर टिकी हुई हैं। क्या कूटनीति उन रॉकेटों की गूंज को शांत कर पाएगी जो रोजाना दक्षिणी लेबनान की पहाड़ियों में सुनाई देते हैं? फिलहाल, नईम कासिम की धमकियां और इजरायल की सैन्य कार्रवाई यह दर्शाती हैं कि शांति का रास्ता अभी भी कांटों भरा है। जब तक दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटते, तब तक युद्धविराम की बातें केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता बन कर रह जाएंगी। ( इनपुट: ANI)

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