NEET-UG 2026 Paper Leak: पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा रद्द कर दी है। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। इस मामले में लगातार चौकाने वाले खुलासे हो रहे है। राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस की जांच में सामने आया है कि नासिक का एक थर्ड ईयर बीएएमएस (BAMS) छात्र कथित तौर पर 10 लाख रुपये में असली प्रश्नपत्र खरीदकर उसे गुरुग्राम के एक व्यक्ति को 15 लाख रुपये में बेचने में शामिल था। यही से देश के कम से कम छह राज्यों में नीट यूजी पेपर लीक हुआ।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार छात्र की पहचान शुभम खैरनार (Shubham Khairnar) के तौर पर हुई है। वह मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला है और भोपाल में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहा है। नासिक पुलिस ने उसे मंगलवार दोपहर हिरासत में लिया और सीबीआई को सौंप दिया। अब सीबीआई उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि उसे प्रश्नपत्र किसने उपलब्ध कराया और उसने आगे किन लोगों तक इसे पहुंचाया।
कूरियर के जरिए पहुंचा पेपर, फिर तैयार हुई ‘गेस पेपर’ की चेन
जांच एजेंसियों के अनुसार, असली नीट प्रश्नपत्र को कूरियर के जरिए गुरुग्राम पहुंचाया गया। वहां इसका इस्तेमाल करके 410 सवालों वाला एक हाथ से लिखा हुआ ‘गेस पेपर’ तैयार किया गया। अधिकारियों का दावा है कि इसमें असली नीट पेपर के करीब 120 सवाल छिपाकर शामिल किए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, इस गेस पेपर में बायोलॉजी और केमिस्ट्री से जुड़े सवाल सबसे ज्यादा थे। नीट परीक्षा में इन दोनों विषयों से कुल 150 सवाल पूछे जाते हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस गेस पेपर में बड़ी ही चतुराई से असली नीट पेपर के 120 सवालों को मिला दिया गया था ताकि किसी को शक न हो।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें पेपर सॉल्वर, बिचौलिए और फर्जी उम्मीदवार तक शामिल थे।
कोचिंग सेंटर और PG हॉस्टल तक पहुंचा लीक पेपर
जांच में सामने आया है कि यह गेस पेपर बाद में नीट छात्रों के लिए चलने वाले पीजी हॉस्टलों और कोचिंग सेंटरों तक पहुंचाया गया। अधिकांश छात्रों को यह पेपर 2 मई की रात यानी परीक्षा से ठीक एक दिन पहले मिला था।
राजस्थान पुलिस ने अब तक 24 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें गुरुग्राम का वह शख्स भी शामिल है, जिसे शुभम खैरनार ने कथित तौर पर पेपर सबसे पहले बेचा था।
‘प्राइवेट माफिया’ व्हाट्सएप ग्रुप से फैला पेपर
जांच के दौरान एक पेड व्हाट्सएप ग्रुप का भी पता चला है, जिसका नाम प्राइवेट माफिया (Private Mafia) बताया जा रहा है। इसी ग्रुप के जरिए गेस पेपर को 5 हजार रुपये से 30 हजार रुपये तक की रकम लेकर बेचा गया।
पुलिस के मुताबिक, कई छात्रों ने फिर यह पेपर अपने परिचितों और अन्य कोचिंग सेंटरों को भी दिए। जिससे यह वायरल हो गया। अब तक महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, केरल और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में फैले कम से कम 24 लोगों के नेटवर्क की पहचान की जा चुकी है।
सीकर बना जांच का केंद्र
राजस्थान का सीकर शहर इस पूरे मामले की जांच का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां करीब 30,000 छात्रों ने 102 परीक्षा केंद्रों पर नीट-यूजी 2026 परीक्षा दी थी। सीकर लंबे समय से कोटा के बाद राजस्थान का बड़ा कोचिंग हब माना जाता है।
जांच में सामने आया कि सीकर के एक कोचिंग सेंटर के काउंसलर राकेश कुमार मंडावरिया ने कथित तौर पर 5 लाख देकर यह गेस पेपर खरीदा था। बाद में इसे केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रही चूरू की एक छात्रा तक पहुंचाया गया। छात्रा ने यह पेपर अपने पिता को दिया, जो सीकर में हॉस्टल चलाते हैं। इसके बाद पेपर हॉस्टल और कोचिंग सेंटरों में फैल गया।
परीक्षा के 4 दिन बाद शुरू हुई जांच
यह मामला नीट यूजी परीक्षा के चार दिन बाद सामने आया, जब छात्रों और कोचिंग स्टाफ ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से शिकायत की। इसके बाद एनटीए ने 7 मई को राजस्थान के डीजीपी राजीव शर्मा को पत्र लिखकर 410 सवालों वाले गेस पेपर की जानकारी दी। फिर राजस्थान पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।


