नेशनल लोक अदालत: 31 खंडपीठों में हुआ विवादों का सुखद अंत; 686 लंबित और 1215 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण, करीब 6.25 करोड़ रुपए के अवार्ड हुए पारित

नेशनल लोक अदालत: 31 खंडपीठों में हुआ विवादों का सुखद अंत; 686 लंबित और 1215 प्रीलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण, करीब 6.25 करोड़ रुपए के अवार्ड हुए पारित

जिले में न्याय का बड़ा अभियान चलाया गया। जिला न्यायालय छतरपुर सहित जिले की समस्त तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन हुआ, जिसमें वर्षों से लंबित विवादों को न केवल सुलझाया गया, बल्कि करोड़ों रुपए की वसूली और राहत के अवार्ड भी पारित किए गए।

मां सरस्वती के पूजन से हुआ शुभारंभ

लोक अदालत का औपचारिक शुभारंभ जिला न्यायालय परिसर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रविन्द्र सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर इस विधिक सेवा यज्ञ की शुरुआत की। इस अवसर पर जिले के समस्त न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायालयीन कर्मचारी और बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे।

31 खंडपीठों ने किया मामलों का निपटारा

लोक अदालत के सफल और त्वरित संचालन के लिए जिले भर में कुल 31 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों ने आपसी सुलह और समझौते के आधार पर लंबित और प्रीलिटिगेशन, दोनों प्रकार के मामलों की सुनवाई की।

लंबित प्रकरण: न्यायालयों में चल रहे 686 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें चेक बाउंस, आपराधिक मामले, मोटर दुर्घटना दावा , बिजली विवाद और वैवाहिक विवाद शामिल थे। इन प्रकरणों में कुल 4,93,80,134 रुपए के अवार्ड पारित किए गए।

प्रीलिटिगेशन प्रकरण: न्यायालय पहुंचने से पहले के 1215 प्रकरणों (जैसे बैंक रिकवरी, जल कर और बिजली बिल) का भी मौके पर निराकरण हुआ, जिनमें 1,31,20,648 रुपए की राहत प्रदान की गई।

लोक अदालत ने जोड़े टूटते रिश्ते: फिर महकी गृहस्थी

लोक अदालत केवल रुपयों के लेन-देन का माध्यम नहीं बनी, बल्कि इसने टूटते हुए परिवारों को भी नई उम्मीद दी। समझाइश और काउंसलिंग के जरिए कई दंपति फिर से साथ रहने को राजी हुए:

नारायणपुरा का मामला: ग्राम नारायणपुरा निवासी भैयालाल अनुरागी और रामरति अनुरागी के बीच पिछले दो वर्षों से वैवाहिक विवाद चल रहा था। लोक अदालत की खंडपीठ में दी गई समझाइश रंग लाई और दोनों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर साथ रहने का निर्णय लिया।

महाराजपुर का मामला: इसी तरह महाराजपुर निवासी कमलेस और रामबाई के बीच लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद समाप्त हुआ।

सुखद विदाई: इन मामलों में राजीनामा होने के बाद पति-पत्नी ने एक-दूसरे को फूलमाला पहनाई। न्याय के प्रतीक स्वरूप उन्हें पौधा भेंट किया गया और सुखद वैवाहिक जीवन की शुभकामनाओं के साथ विदा किया गया।अधिकारियों का संदेश

प्रधान जिला न्यायाधीश ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य ‘सबका साथ, सबका न्याय’ है। इसमें किसी की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष जीतकर जाते हैं। इस आयोजन ने न केवल न्यायालयों का बोझ कम किया है, बल्कि समाज में सद्भाव का संदेश भी दिया है।

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