नीट का पेपर लीक होने की आशंका; SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझनूं से 13 संदिग्ध पकड़े

नीट का पेपर लीक होने की आशंका; SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझनूं से 13 संदिग्ध पकड़े

भास्कर एक्सप्लेनर पेपर लीक हुआ या नहीं? एक्सपर्ट्स व एनटीए से सलाह लेने के बाद एसओजी लेगी अंतिम फैसला श्रीमती रामदेई के पुत्र अवधेश आकोदिया की रिपोर्ट बड़ा सवाल– इंतजाम कड़े थे, सेंध कैसे लगी? 1. पेपर्स को सुरक्षित लाने-ले जाने के लिए क्या इंतजाम किए थे?प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ जीपीएस लगे वाहनों का उपयोग किया गया ​था, ताकि उनकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा सके।2. केंद्रों पर हाई-टेक निगरानी के लिए क्या तकनीक अपनाई गई?केंद्रों पर एआई कैमरे लगाए थे, जिनकी सेंट्रल कंट्रोल रूम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की गई ताकि संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ा जा सके।3. डिजिटल चोरी और संचार को रोकने के लिए क्या कदम उठाए?परीक्षा हॉल में मोबाइल सिग्नल और ब्लूटूथ के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने के लिए शक्तिशाली 5G जैमर लगाए। 4. पेपर लीक की स्थिति में ‘सोर्स’ का पता कैसे लगाया जा सकता है?हर प्रश्नपत्र पर एक यूनिक वॉटरमार्क आईडी लगाई गई थी। यदि पेपर की फोटो लीक होती है, तो इस आईडी से यह तुरंत पता चल जाएगा कि वह किस केंद्र से और किस समय लीक हुआ।5. सॉल्वर गैंग व फर्जी परीक्षार्थियों को रोकने के लिए क्या किया था?पहचान सुनिश्चित करने के लिए हर छात्र का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया। साथ ही, एनएमसी ने 2-3 मई को रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दीं ताकि वे सॉल्वर के रूप में परीक्षा में शामिल न हो सकें।6. सोशल मीडिया पर सक्रिय ठगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?परीक्षा से पहले फर्जी पेपर बेचने या लीक का दावा करने वाले 65 टेलीग्राम चैनलों को चिन्हित कर ब्लॉक किया।7. आखिर फिर चूक कहां हुई?जब बायोमेट्रिक, जैमर और एआई कैमरे जैसे तकनीकी इंतजाम मौजूद हों, तब पेपर लीक अक्सर ‘सिस्टम की मानवीय खामी’ की ओर इशारा करता है। आशंका है कि प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन या बैंक कस्टडी के स्तर पर मिलीभगत से पेपर लीक हुआ होगा, जिसे ये तकनीकी पाबंदियां नहीं रोक पाईं। 8. पहले क्या गड़बड़ियां आ चुकीं? 2024 में बिहार-गुजरात में पेपर लीक। एकसाथ 67 छात्रों ने टॉप किया। ग्रेस मार्क्स में विवाद। सॉल्वर गैंग द्वारा डमी कैंडिडेट बैठाना, ओएमआर शीट में हेरफेर और केंद्रों पर गलत भाषा के पेपर बांटने जैसी तकनीकी चूक प्रमुख रहीं। क्या ये नीट भी क्लीन नहीं? आईबी के इनपुट के बाद एक्शन में जांच एजेंसियां शुरुआत में सभी संदिग्धों को सीकर के उद्योग नगर थाने में डिटेन किया गया था। एसओजी की जयपुर से गई टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। इस दौरान बिल्डिंग के गेट पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया। थाने में तैनात स्टाफ को भी इसकी भनक नहीं है कि संदिग्ध कौन हैं और इनसे किस मामले में पूछताछ चल रही है। एसओजी शनिवार को राकेश मंडावरिया को जयपुर ले गई। देहरादून से पकड़े गए 4 संदिग्धों को भी रविवार को पूछताछ के लिए जयपुर में ही रोका जाएगा। सीकर के उद्योग नगर थाने में चल रही पूछताछ देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक नीट पर एक बार फिर लीक के बादल मंडरा रहे हैं। परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक की आशंका के चलते राजस्थान एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने पिछले चार दिन में देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को पकड़ा है। एजेंसी से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। सूत्रों के अनुसार, एसओजी दो स्तर पर जांच कर रही है। पहला, सीकर के करियर काउंसलर के पास परीक्षा के ज्यादातर सवाल आ गए थे, जो उसने कुछ अभ्यर्थियों को दिए थे। दूसरा, जांच एजेंसी को 300 से अधिक सवालों का एक गेस पेपर मिला है, जिसके 140 प्रश्न हू-ब-हू परीक्षा में आए। हालांकि, पेपर लीक माना जाए या नहीं इसका फैसला एक्सपर्ट्स और एनटीए से सलाह लेने के बाद एसओजी करेगी। दरअसल, आईबी को यह इनपुट मिला था कि करियर काउंसलर्स के जरिए पेपर के कई प्रश्न परीक्षा से पहले ही सीकर और झुंझुनूं के छात्रों को मिल गए थे। जानकारी पुख्ता होने के बाद इसकी सूचना एसओजी को दी। देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में एक सीकर का राकेश मंडावरिया है। उसका पीपराली रोड पर एक नामी कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस है। राकेश की निशानदेही पर शनिवार देर शाम देहरादून से 4 और लोग पकड़े गए। पूछताछ पूरी होने के बाद ही साफ होगा, क्या वाकई पेपर लीक हुआ था। यदि लीक हुआ तो क्या पैटर्न 2024 जैसा है या उससे अलग। 2024 में बिहार और झारखंड में परीक्षा से पहले छात्रों को मिल गया था। केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने व्यवस्था दी कि पेपर लीक हजारीबाग और पटना जैसे कुछ स्थानों तक सीमित था। बड़े पैमाने पर या व्यवस्थागत धांधली के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसलिए 24 लाख छात्रों की परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती, इससे शैक्षणिक सत्र प्रभावित होगा। इस बार की परीक्षा 3 मई को हुई थी। इसमें 22 लाख+ छात्र थे। भास्कर एक्सप्लेनर पेपर लीक हुआ या नहीं? एक्सपर्ट्स व एनटीए से सलाह लेने के बाद एसओजी लेगी अंतिम फैसला श्रीमती रामदेई के पुत्र अवधेश आकोदिया की रिपोर्ट बड़ा सवाल– इंतजाम कड़े थे, सेंध कैसे लगी? 1. पेपर्स को सुरक्षित लाने-ले जाने के लिए क्या इंतजाम किए थे?प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ जीपीएस लगे वाहनों का उपयोग किया गया ​था, ताकि उनकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा सके।2. केंद्रों पर हाई-टेक निगरानी के लिए क्या तकनीक अपनाई गई?केंद्रों पर एआई कैमरे लगाए थे, जिनकी सेंट्रल कंट्रोल रूम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की गई ताकि संदिग्ध गतिविधियों को तुरंत पकड़ा जा सके।3. डिजिटल चोरी और संचार को रोकने के लिए क्या कदम उठाए?परीक्षा हॉल में मोबाइल सिग्नल और ब्लूटूथ के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने के लिए शक्तिशाली 5G जैमर लगाए। 4. पेपर लीक की स्थिति में ‘सोर्स’ का पता कैसे लगाया जा सकता है?हर प्रश्नपत्र पर एक यूनिक वॉटरमार्क आईडी लगाई गई थी। यदि पेपर की फोटो लीक होती है, तो इस आईडी से यह तुरंत पता चल जाएगा कि वह किस केंद्र से और किस समय लीक हुआ।5. सॉल्वर गैंग व फर्जी परीक्षार्थियों को रोकने के लिए क्या किया था?पहचान सुनिश्चित करने के लिए हर छात्र का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया। साथ ही, एनएमसी ने 2-3 मई को रेजिडेंट डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द कर दीं ताकि वे सॉल्वर के रूप में परीक्षा में शामिल न हो सकें।6. सोशल मीडिया पर सक्रिय ठगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?परीक्षा से पहले फर्जी पेपर बेचने या लीक का दावा करने वाले 65 टेलीग्राम चैनलों को चिन्हित कर ब्लॉक किया।7. आखिर फिर चूक कहां हुई?जब बायोमेट्रिक, जैमर और एआई कैमरे जैसे तकनीकी इंतजाम मौजूद हों, तब पेपर लीक अक्सर ‘सिस्टम की मानवीय खामी’ की ओर इशारा करता है। आशंका है कि प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन या बैंक कस्टडी के स्तर पर मिलीभगत से पेपर लीक हुआ होगा, जिसे ये तकनीकी पाबंदियां नहीं रोक पाईं। 8. पहले क्या गड़बड़ियां आ चुकीं? 2024 में बिहार-गुजरात में पेपर लीक। एकसाथ 67 छात्रों ने टॉप किया। ग्रेस मार्क्स में विवाद। सॉल्वर गैंग द्वारा डमी कैंडिडेट बैठाना, ओएमआर शीट में हेरफेर और केंद्रों पर गलत भाषा के पेपर बांटने जैसी तकनीकी चूक प्रमुख रहीं। क्या ये नीट भी क्लीन नहीं? आईबी के इनपुट के बाद एक्शन में जांच एजेंसियां शुरुआत में सभी संदिग्धों को सीकर के उद्योग नगर थाने में डिटेन किया गया था। एसओजी की जयपुर से गई टीम उनसे पूछताछ कर रही थी। इस दौरान बिल्डिंग के गेट पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया। थाने में तैनात स्टाफ को भी इसकी भनक नहीं है कि संदिग्ध कौन हैं और इनसे किस मामले में पूछताछ चल रही है। एसओजी शनिवार को राकेश मंडावरिया को जयपुर ले गई। देहरादून से पकड़े गए 4 संदिग्धों को भी रविवार को पूछताछ के लिए जयपुर में ही रोका जाएगा। सीकर के उद्योग नगर थाने में चल रही पूछताछ देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक नीट पर एक बार फिर लीक के बादल मंडरा रहे हैं। परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक की आशंका के चलते राजस्थान एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने पिछले चार दिन में देहरादून, सीकर व झुंझुनूं से 13 संदिग्धों को पकड़ा है। एजेंसी से जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। सूत्रों के अनुसार, एसओजी दो स्तर पर जांच कर रही है। पहला, सीकर के करियर काउंसलर के पास परीक्षा के ज्यादातर सवाल आ गए थे, जो उसने कुछ अभ्यर्थियों को दिए थे। दूसरा, जांच एजेंसी को 300 से अधिक सवालों का एक गेस पेपर मिला है, जिसके 140 प्रश्न हू-ब-हू परीक्षा में आए। हालांकि, पेपर लीक माना जाए या नहीं इसका फैसला एक्सपर्ट्स और एनटीए से सलाह लेने के बाद एसओजी करेगी। दरअसल, आईबी को यह इनपुट मिला था कि करियर काउंसलर्स के जरिए पेपर के कई प्रश्न परीक्षा से पहले ही सीकर और झुंझुनूं के छात्रों को मिल गए थे। जानकारी पुख्ता होने के बाद इसकी सूचना एसओजी को दी। देहरादून से पकड़े गए संदिग्धों में एक सीकर का राकेश मंडावरिया है। उसका पीपराली रोड पर एक नामी कोचिंग संस्थान के सामने कंसल्टेंसी ऑफिस है। राकेश की निशानदेही पर शनिवार देर शाम देहरादून से 4 और लोग पकड़े गए। पूछताछ पूरी होने के बाद ही साफ होगा, क्या वाकई पेपर लीक हुआ था। यदि लीक हुआ तो क्या पैटर्न 2024 जैसा है या उससे अलग। 2024 में बिहार और झारखंड में परीक्षा से पहले छात्रों को मिल गया था। केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने व्यवस्था दी कि पेपर लीक हजारीबाग और पटना जैसे कुछ स्थानों तक सीमित था। बड़े पैमाने पर या व्यवस्थागत धांधली के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसलिए 24 लाख छात्रों की परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती, इससे शैक्षणिक सत्र प्रभावित होगा। इस बार की परीक्षा 3 मई को हुई थी। इसमें 22 लाख+ छात्र थे।  

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