सुलतानगंज के चेयरमैन गुड्डू की मौत, रामधनी राजनीति में लाया:कहता था- हम दोनों यहां राज करेंगे, 2020 विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी दोस्ती

सुलतानगंज के चेयरमैन गुड्डू की मौत, रामधनी राजनीति में लाया:कहता था- हम दोनों यहां राज करेंगे, 2020 विधानसभा चुनाव के बाद हुई थी दोस्ती

सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू की 12 दिनों तक चले इलाज के बाद पटना के मेदांता अस्पताल में शनिवार को मौत हो गई। 28 अप्रैल को अपराधी रामधनी यादव ने राजकुमार गुड्डू और परिषद के एग्जिक्यूटिव अफसर कृष्ण भूषण कुमार को उनके केबिन में गोली मारी थी। कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि राजकुमार गुड्डू को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। घटना के अगले दिन यानी 29 अप्रैल को भागलपुर पुलिस ने आरोपी रामधनी यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था, जबकि वारदात में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मेदांता अस्पताल में एडमिट राजकुमार गुड्डू के सीने और सिर में गोली लगी थी। दोनों गोलियां उनके शरीर में ही फंसी थी। राजकुमार गुड्डू की मौत के बाद उनके शव को पटना पुलिस भागलपुर के बॉर्डर तक ले गई। फिर शव को भागलपुर पुलिस के हवाले किया गया। आज यानी रविवार को राजकुमार गुड्डू का अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजकुमार गुड्डू की राजनीति में एंट्री की कहानी क्या है? रामधनी यादव और राजकुमार गुड्डू के बीच आखिर कब से विवाद था? 12 दिनों तक राजकुमार गुड्डू की हालत कैसी रही? पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। राजकुमार गुड्डू की कहानी जानने के लिए आपको 8 साल पीछे जाना होगा… साल: 2018
जगह: सुल्तानगंज प्रॉपर्टी डिलिंग और पिता के मिठाई की दुकान में एक्टिव राजकुमार गुड्डू का इलाके के लोगों में अच्छी पकड़ बन गई। आसपास के गांव के लोग भी राजकुमार गुड्डू को उनके मिलनसार स्वभाव के कारण जानने लगे थे। यह वही समय था, जब राजकुमार गुड्डू को उनके साथियों ने राजनीति में हाथ आजमाने की सलाह दी थी। इसके बाद राजकुमार गुड्डू का स्थानीय नेताओं से मिलना-जुलना शुरू हो गया। राजकुमार गुड्डू ने सामाजिक कार्यों में भी अपनी भागीदारी दिखाई और विधायक बनने की चाह में 2 साल बाद यानी 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोंक दिया। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो राजकुमार गुड्डू को मात्र 1514 वोट मिले। इसी चुनाव में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से एलजेपी की उम्मीदवार नीलम देवी भी मैदान में थीं, जो रामधनी यादव की पत्नी थी। नीलम को 10222 वोट मिले थे। चुनावी नतीजों के बाद रामधनी और राजकुमार गुड्डू एक हुए सुल्तानगंज के स्थानीय लोगों के मुताबिक, चुनावी नतीजों ने राजकुमार गुड्डू को हैरान परेशान नहीं किया। राजकुमार गुड्डू की राजनीतिक महत्वकांक्षा और बढ़ गई। सुल्तानगंज में उस वक्त प्रॉपर्टी और अवैध धंधों में रामधनी यादव का एकतरफा राज था। राजनीतिक महत्वकांक्षा को लेकर राजकुमार गुड्डू ने एक दिन रामधनी यादव से मुलाकात की। इसकी वजह थी कि राजकुमार गुड्डू के पास अच्छी प्रॉपर्टी थी, लिहाजा रामधनी यादव ने उन्हें अपने साथ मिला लिया और दोनों ने मिलकर प्लान बनाया कि अब हम दोनों मिलकर सुल्तानगंज पर राज करेंगे। ये वो समय था, जब रामधनी यादव ने एक्टिव तौर पर राजकुमार गुड्डू की राजनीति में एंट्री कराई और दो साल बाद यानी दिसंबर 2022 में उन्हें नगर परिषद का चुनाव लड़वा दिया। नतीजों के बाद राजकुमार गुड्डू ने 13 जनवरी 2023 को सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन, जबकि रामधनी की पत्नी नीलम देवी ने डिप्टी चेयरमैन पद पर काबिज हुई। चेयरमैन बनने के 2 महीने बाद ही डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के पति रामधनी यादव पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें राजकुमार गुड्डू का नाम सामने आया था। मर्डर की कोशिश में नाम आने पर पुलिस राजकुमार गुड्डू को थाने ले गई थी और पूछताछ की थी। हालांकि, बाद में इन्हें छोड़ दिया गया था। इस घटना से पहले भी दोनों में ठेका-टेंडर को लेकर विवाद होने लगा था। गोलीबारी की घटना के बाद दोनों की राहें अलग हो गई थी। रामधनी से टकराव के बाद नगर अध्यक्ष के संपर्क में आए राजकुमार गुड्डू रामधनी से टकराव और फिर अलगाव के बाद साल 2023 में तत्कालीन सुल्तानगंज के नगर अध्यक्ष नवीन और मंत्री रहे संजय चौधरी ने राजकुमार गुड्डू को भाजपा में शामिल कराया। पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते संजय चौधरी और नवीन ने उनकी मुलाकात बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं से कराई। राजकुमार गुड्डू चाहते थे कि साल 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से टिकट मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साल 2023 में रामधनी पर जानलेवा हमले के बाद उसके और राजकुमार गुड्डू के बीच दुश्मनी काफी बढ़ गई थी। इसी कड़ी में 28 अप्रैल को रामधनी ने अपने ड्राइवर दीपक और बहनोई पिंकू के साथ मिलकर ताबड़तोड़ गोली मारकर राजकुमार गुड्डू को गंभीर रूप से घायल कर दिया। राजकुमार गुड्डू के सिर और सीने में दो गोली अटकी हुई थी। राजकुमार को पटना के मेदांता हॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा था। स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। शुक्रवार को उनकी सेहत में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन शनिवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। राजकुमार गुड्डू के पिता मिठाई के बड़े कारोबारी थे राजकुमार गुड्डू का घर मूल रूप से मुंगेर में है। वे बचपन से ही सुल्तानगंज स्थित मुख्य बाजार में घर बनाकर रह रहे थे। उनके पिता बच्चू शाह मिठाई के बड़े कारोबारी थे। पिता के चर्चित कारोबार में राजकुमार गुड्डू ने काफी दिनों तक उनका हाथ बंटाया। इसके बाद उन्होंने इलाके के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर जमीन खरीदने-बेचने का काम शुरू किया। इस कारोबार से उन्होंने करीब 50 करोड़ की संपत्ति अर्जित की थी। राजकुमार गुड्डू दो भाई थे। एक भाई की 15 साल पहले नदी में डूबने से मौत हो गई थी। राजकुमार गुड्डू की पत्नी हाउस वाइफ हैं। दोनों के दो बच्चे हैं। जानकारी के मुताबिक, पिता की मौत के बाद राजकुमार गुड्डू ने अपनी मिठाई की दुकान दूर के किसी रिश्तेदार के हवाले कर दिया था। सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार गुड्डू की 12 दिनों तक चले इलाज के बाद पटना के मेदांता अस्पताल में शनिवार को मौत हो गई। 28 अप्रैल को अपराधी रामधनी यादव ने राजकुमार गुड्डू और परिषद के एग्जिक्यूटिव अफसर कृष्ण भूषण कुमार को उनके केबिन में गोली मारी थी। कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि राजकुमार गुड्डू को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया था। घटना के अगले दिन यानी 29 अप्रैल को भागलपुर पुलिस ने आरोपी रामधनी यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था, जबकि वारदात में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मेदांता अस्पताल में एडमिट राजकुमार गुड्डू के सीने और सिर में गोली लगी थी। दोनों गोलियां उनके शरीर में ही फंसी थी। राजकुमार गुड्डू की मौत के बाद उनके शव को पटना पुलिस भागलपुर के बॉर्डर तक ले गई। फिर शव को भागलपुर पुलिस के हवाले किया गया। आज यानी रविवार को राजकुमार गुड्डू का अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजकुमार गुड्डू की राजनीति में एंट्री की कहानी क्या है? रामधनी यादव और राजकुमार गुड्डू के बीच आखिर कब से विवाद था? 12 दिनों तक राजकुमार गुड्डू की हालत कैसी रही? पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। राजकुमार गुड्डू की कहानी जानने के लिए आपको 8 साल पीछे जाना होगा… साल: 2018
जगह: सुल्तानगंज प्रॉपर्टी डिलिंग और पिता के मिठाई की दुकान में एक्टिव राजकुमार गुड्डू का इलाके के लोगों में अच्छी पकड़ बन गई। आसपास के गांव के लोग भी राजकुमार गुड्डू को उनके मिलनसार स्वभाव के कारण जानने लगे थे। यह वही समय था, जब राजकुमार गुड्डू को उनके साथियों ने राजनीति में हाथ आजमाने की सलाह दी थी। इसके बाद राजकुमार गुड्डू का स्थानीय नेताओं से मिलना-जुलना शुरू हो गया। राजकुमार गुड्डू ने सामाजिक कार्यों में भी अपनी भागीदारी दिखाई और विधायक बनने की चाह में 2 साल बाद यानी 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोंक दिया। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो राजकुमार गुड्डू को मात्र 1514 वोट मिले। इसी चुनाव में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से एलजेपी की उम्मीदवार नीलम देवी भी मैदान में थीं, जो रामधनी यादव की पत्नी थी। नीलम को 10222 वोट मिले थे। चुनावी नतीजों के बाद रामधनी और राजकुमार गुड्डू एक हुए सुल्तानगंज के स्थानीय लोगों के मुताबिक, चुनावी नतीजों ने राजकुमार गुड्डू को हैरान परेशान नहीं किया। राजकुमार गुड्डू की राजनीतिक महत्वकांक्षा और बढ़ गई। सुल्तानगंज में उस वक्त प्रॉपर्टी और अवैध धंधों में रामधनी यादव का एकतरफा राज था। राजनीतिक महत्वकांक्षा को लेकर राजकुमार गुड्डू ने एक दिन रामधनी यादव से मुलाकात की। इसकी वजह थी कि राजकुमार गुड्डू के पास अच्छी प्रॉपर्टी थी, लिहाजा रामधनी यादव ने उन्हें अपने साथ मिला लिया और दोनों ने मिलकर प्लान बनाया कि अब हम दोनों मिलकर सुल्तानगंज पर राज करेंगे। ये वो समय था, जब रामधनी यादव ने एक्टिव तौर पर राजकुमार गुड्डू की राजनीति में एंट्री कराई और दो साल बाद यानी दिसंबर 2022 में उन्हें नगर परिषद का चुनाव लड़वा दिया। नतीजों के बाद राजकुमार गुड्डू ने 13 जनवरी 2023 को सुल्तानगंज नगर परिषद के चेयरमैन, जबकि रामधनी की पत्नी नीलम देवी ने डिप्टी चेयरमैन पद पर काबिज हुई। चेयरमैन बनने के 2 महीने बाद ही डिप्टी चेयरमैन नीलम देवी के पति रामधनी यादव पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें राजकुमार गुड्डू का नाम सामने आया था। मर्डर की कोशिश में नाम आने पर पुलिस राजकुमार गुड्डू को थाने ले गई थी और पूछताछ की थी। हालांकि, बाद में इन्हें छोड़ दिया गया था। इस घटना से पहले भी दोनों में ठेका-टेंडर को लेकर विवाद होने लगा था। गोलीबारी की घटना के बाद दोनों की राहें अलग हो गई थी। रामधनी से टकराव के बाद नगर अध्यक्ष के संपर्क में आए राजकुमार गुड्डू रामधनी से टकराव और फिर अलगाव के बाद साल 2023 में तत्कालीन सुल्तानगंज के नगर अध्यक्ष नवीन और मंत्री रहे संजय चौधरी ने राजकुमार गुड्डू को भाजपा में शामिल कराया। पार्टी कार्यकर्ता होने के नाते संजय चौधरी और नवीन ने उनकी मुलाकात बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं से कराई। राजकुमार गुड्डू चाहते थे कि साल 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सुल्तानगंज विधानसभा सीट से टिकट मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साल 2023 में रामधनी पर जानलेवा हमले के बाद उसके और राजकुमार गुड्डू के बीच दुश्मनी काफी बढ़ गई थी। इसी कड़ी में 28 अप्रैल को रामधनी ने अपने ड्राइवर दीपक और बहनोई पिंकू के साथ मिलकर ताबड़तोड़ गोली मारकर राजकुमार गुड्डू को गंभीर रूप से घायल कर दिया। राजकुमार गुड्डू के सिर और सीने में दो गोली अटकी हुई थी। राजकुमार को पटना के मेदांता हॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहां उसका इलाज चल रहा था। स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। शुक्रवार को उनकी सेहत में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन शनिवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। राजकुमार गुड्डू के पिता मिठाई के बड़े कारोबारी थे राजकुमार गुड्डू का घर मूल रूप से मुंगेर में है। वे बचपन से ही सुल्तानगंज स्थित मुख्य बाजार में घर बनाकर रह रहे थे। उनके पिता बच्चू शाह मिठाई के बड़े कारोबारी थे। पिता के चर्चित कारोबार में राजकुमार गुड्डू ने काफी दिनों तक उनका हाथ बंटाया। इसके बाद उन्होंने इलाके के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर जमीन खरीदने-बेचने का काम शुरू किया। इस कारोबार से उन्होंने करीब 50 करोड़ की संपत्ति अर्जित की थी। राजकुमार गुड्डू दो भाई थे। एक भाई की 15 साल पहले नदी में डूबने से मौत हो गई थी। राजकुमार गुड्डू की पत्नी हाउस वाइफ हैं। दोनों के दो बच्चे हैं। जानकारी के मुताबिक, पिता की मौत के बाद राजकुमार गुड्डू ने अपनी मिठाई की दुकान दूर के किसी रिश्तेदार के हवाले कर दिया था।  

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