राजेश विश्वकर्मा
MP News: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में अपराध की नर्सरी को खत्म करने के दौरान नए मामले उजागर हो रहे हैं। जिसमें नाबालिगों को चोरी के धंधे में डालने और उनसे कमीशन बेस पर काम करवाने में उनके माता-पिता ही हिस्सेदारी लेते हैं। स्कूल में पढ़ाई के समय में उनसे ये काम कराए जाते हैं। ताजा मामले में खरगोन में हुई एक चोरी में ट्रेस हुए 12 साल के बच्चे के माध्यम से पुलिस अपराधियों तक पहुंची है। जिनमें बच्चे के माता-पिता और एक अन्य चोरी में शामिल रहने वाला आरोपी शामिल है। पुलिस ने सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोपी माता-पिता और एक अन्य पर एफआइआर
पुलिस ने 12 साल के नाबालिग को ट्रेस करने के बाद उसकी रिपोर्ट पर उसी के माता-पिता निवासी कड़िया सांसी और एक अन्य आरोपी कालू सिसोदिया निवासी गुलखेड़ी के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। ये लोग बच्चे के माध्यम से पहले वारदातें करवाते थे, फिर चोरी की सामग्री को आपस में बांट लिया करते थे। जहां चोरी का मौका मिल जाता था वहां पर ये वारदातें करते थे।
जिसका बच्चा चोरी करता उसे मिलता था 40 प्रतिशत हिस्सा
जो भी चोरी बच्चे करते थे, उसमें आरोपी माता-पिता की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रहती है। साथ ही जिस अन्य बालिग आरोपी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया जाता था, उसका हिस्सा अलग होता था। कई बार जब बच्चे चोरी करते थे तो पूरी राशि ले जाकर उन्हें देते थे, फिर वह उसमें से भी कुछ छिपा लेते थे। ऐसे में पुलिस के सामने जब फरियादी चोरी गई राशि बताते तो पता चलता है कि कितनी राशि चोरी हुई थी। यानी यदि कहीं से पांच लाख चुराए तो उसमें से चार ही बताते थे, बाकि का एक उक्त आरोपी रख लेता था। यह सब खुलासे अब पुलिस जांच में सामने आ रहे हैं।
बाहर से किराए पर बच्चे लाने का भी ट्रेंड
पुलिस जांच में सामने आया है कि यहां बाहर से बच्चे लाकर चोरियां करवाने का भी ट्रेंड है। खास तौर पर अशोकनगर जिले के मुंगावली और झालावाड़ के छबड़ा से बच्चे लाए जाते थे। दो से तीन लाख रुपए में सालभर के लिए बच्चों को किराए पर लिया जाता था। फिर उन्हें चोरियों के लिए ट्रेंड कर देशभर में भेजा जाता था। हालांकि वर्तमान में यह बंद हुआ है लेकिन अब जब विस्तृत जांच हुई तो पता चला कि यहीं के लोग अपने बच्चों को इसमें धकेलते हैं। फिर उन्हें ट्रेंड करते हैं। पुलिस ने जब अपराध की नर्सरी बंद करने की शुरुआत की तो ये सब परतें खुलने लगीं।
यूं पहुंचा चोरी तक नाबालिग
पुलिस को नाबालिग ने बताया कि मैं चौथी क्लास तक पढ़ा हूं। इसके बाद माता-पिता ने कहा कि गांव के अन्य लड़के चोरियां करने जाते हैं, तुम भी जाया करो। करीब छह माह पहले वह अपनी मां के साथ तीन से चार बार भोपाल गया। बैंक में जाकर उसकी मां ध्यान रखती थी, वह कहती थी कि बैंक में जब कोई उपभोक्ता रुपए लेकर कहीं रखेगा तो मैं बता दूंगी, तुम तत्काल उठा लेना। तीन-चार बार के प्रयास में कुछ नहीं मिल पाया तो मैं अपनी मां और गुलखेड़ी के कालू सांसी के साथ खरगोन गया। वहां एक बैंक से व्यक्ति रुपए निकालकर लाया और कार में रख दिए। इसका हमने पूरा ध्यान रखा। फिर मौका पाकर मैं गया और बैग निकल लिया था। चुराई हुई राशि कालू को दे दी, कालू ने वह राशि मेरी मां को दी, फिर मेरे पापा के पास भी हिस्सा पहुंचा। बता दें कि उक्त मामले में खरगोन पुलिस 20 दिन पहले ही एफआइआर कर चुकी है, उन्हीं की तफ्तीश में सामने आए बच्चे के बाद यहां तक पुलिस पहुंची।


