मदर्स डे पर जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने साझा किए संवेदनाओं और परिवार के सहयोग के अनुभव

जैसलमेर कलक्टर अनुपमा जोरवाल कामकाजी महिलाओं के लिए एक आदर्श उदाहरण हैं। उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसी महत्वपूर्ण सेवा में रहते हुए मां के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया। उनकी दो बेटियां हैं- अनुश्री और आत्रेयी। वैसे दो बेटियों अनुश्री और आत्रेया के पालन-पोषण में अनुपमा की माता संतोष मीना ने सबसे अहम भूमिका निभाई। आज भी अनुपमा जब जैसलमेर जैसे सीमांत क्षेत्र में सेवारत हैं, तब उनकी दोनों बेटियां जयपुर में अपनी नानी के पास रहती हैं। अनुपमा ने भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के अधिकारी पति अखिल कुमार की भी प्रशंसा की। जिन्होंने उनका जीवन के हर मोड़ पर सहयोग किया। मदर्स डे के अवसर पर अनुपमा जोरवाल ने अपने जीवन के उन भावनात्मक पहलुओं को साझा किया, जिनकी बदौलत वे प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और संतुलन के साथ निभा पा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक महिला के जीवन में परिवार का सहयोग केवल भावनात्मक सहारा नहीं होता, बल्कि वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनता है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी है। उन्होंने जैसलमेर के अमरसागर गांव की कमला को भी याद किया, जिन्होंने जैसलमेर के अलावा प्रतापगढ़, सिरोही और जयपुर तक में उनके साथ रह कर बेटियों की देखभाल में अहम सहयोग दिया।

मां हमेशा रही महत्वपूर्ण

कलक्टर जोरवाल ने बताया कि उनकी मां ने उनकी दोनों बेटियों के पालन-पोषण में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों के बीच यदि वे अपने दायित्वों का सुगमतापूर्वक निर्वहन कर सकीं, तो उसके पीछे उनकी मां का त्याग, समर्पण और सतत सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक कार्यों में लंबे समय तक व्यस्त रहना पड़ता है, ऐसे में बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने में उनकी मां ने कभी कमी महसूस नहीं होने दी।

उन्होंने कहा कि मां केवल जन्म देने वाली नहीं होती, बल्कि जीवन के हर कठिन मोड़ पर संबल बनकर साथ खड़ी रहती है।

परिवार का साथ जरूरी

अनुपमा जोरवाल ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं, लेकिन इसके पीछे परिवार का सहयोग बहुत मायने रखता है। उन्होंने कहा कि यदि घर का वातावरण सहयोगी हो, तो महिलाएं अपने पेशेवर जीवन में कहीं अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं। उन्होंने यह भी माना कि बच्चों के बेहतर पालन-पोषण के लिए परिवार के सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी आवश्यक है। उन्होंने अपने पति अखिलेश कुमार जो उत्तर प्रदेश काडर के आइपीएस हैं, का भी विशेष रूप से आभार जताया। जोरवाल ने बताया कि उन्होंने शादी व पहली बेटी के जन्म के बाद आइएएस का एग्जाम क्लियर किया। इस सारे समय में उनके पति ने उनका हर तरह से साथ निभाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत दंपती के लिए समय प्रबंधन और पारिवारिक संतुलन चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन आपसी समझ और सहयोग से हर जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभाई जा सकती है। उन्होंने युवतियों और कामकाजी महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि यदि परिवार का विश्वास और सहयोग साथ हो, तो महिलाएं घर और करियर दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्ट संतुलन स्थापित कर सकती हैं।

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