Sports Ministry के दखल के बाद जागा AICF, Grandmaster Abhijeet Gupta को मिलेगा Prize Money

Sports Ministry के दखल के बाद जागा AICF, Grandmaster Abhijeet Gupta को मिलेगा Prize Money

 भारतीय ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता ने इस साल की शुरुआत में ओडिशा ओपन शतरंज टूर्नामेंट की खिताबी पुरस्कार राशि नहीं मिलने पर निराशा व्यक्त की और खेल मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने के बाद उन्हें अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) से आश्वासन मिला है कि इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।
एआईसीएफ ने कहा कि उनकी पुरस्कार राशि का भुगतान करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
शतरंज ओलंपियाड के पदक विजेता और पांच बार के राष्ट्रमंडल चैंपियन गुप्ता ने बार-बार एआईसीएफ को इस संबंध में पत्र लिखा लेकिन इसके बावजूद खिताब जीतने के चार महीने बाद भी उन्हें पुरस्कार राशि नहीं मिली।
लेकिन एआईसीएफ की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण उन्होंने खेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की गुहार की। सूत्रों के अनुसार ओडिशा शतरंज संघ में आंतरिक कलह चल रही है और उसका बैंक खाता फ्रीज हो गया है, जिससे आयोजक बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
गुप्ता ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैं खेल मंत्रालय से विनम्र अनुरोध करता हूं कि वह इस मामले पर गौर करे और यह सुनिश्चित करने में मदद करे कि खिलाड़ियों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ उनकी उचित पुरस्कार राशि मिले।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल एक पुरस्कार राशि का मामला नहीं है। यह भारत के प्रत्येक शतरंज खिलाड़ी की गरिमा और विश्वास से जुड़ा मामला भी है।’’
अभिजीत ने जनवरी में यह प्रतियोगिता जीती थी और उनका दावा है कि आयोजकों पर उनका 5.5 लाख रुपये का बकाया है।
हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि एआईसीएफ के अध्यक्ष नितिन नारंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले का निपटारा किया जाएगा।
गुप्ता ने लिखा, ‘‘एआईसीएफ के अध्यक्ष नितिन नारंग ने मुझे फोन करके आश्वासन दिया कि जरूरी कदम उठा दिए गए हैं। ’’
उन्होंने इससे पहले कहा था, ‘‘मैंने इस साल जनवरी में ओडिशा ओपन का खिताब जीता था। आयोजकों ने मुझे आश्वासन दिया था कि पुरस्कार राशि एक महीने के अंदर भुगतान कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद जब मैंने उनसे इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने जवाब देना बंद कर दिया।’’
गुप्ता ने कहा, ‘‘जीत और हार एक खिलाड़ी के सफर का हिस्सा हैं लेकिन दुख तब होता है जब आप जीत जाते हैं और फिर भी आपको वह नहीं मिलता जिसके आप हकदार हैं।’’
एआईसीएफ के एक सूत्र ने बताया कि ओडिशा ओपन के आयोजक गुप्ता को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि राज्य संघ के भीतर चल रहे आंतरिक कलह के कारण उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था।
सूत्र ने बताया, ‘‘राज्य संघ के भीतर आपसी कलह चल रही है, प्रतिद्वंद्वी गुट आपस में विवाद में उलझे हुए हैं, जिसके कारण खाता फ्रीज कर दिया गया है और खिलाड़ियों को उनका बकाया नहीं मिल रहा है। 

 भारतीय ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता ने इस साल की शुरुआत में ओडिशा ओपन शतरंज टूर्नामेंट की खिताबी पुरस्कार राशि नहीं मिलने पर निराशा व्यक्त की और खेल मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने के बाद उन्हें अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) से आश्वासन मिला है कि इस मुद्दे का समाधान किया जाएगा।
एआईसीएफ ने कहा कि उनकी पुरस्कार राशि का भुगतान करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

शतरंज ओलंपियाड के पदक विजेता और पांच बार के राष्ट्रमंडल चैंपियन गुप्ता ने बार-बार एआईसीएफ को इस संबंध में पत्र लिखा लेकिन इसके बावजूद खिताब जीतने के चार महीने बाद भी उन्हें पुरस्कार राशि नहीं मिली।
लेकिन एआईसीएफ की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस कारण उन्होंने खेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की गुहार की।

सूत्रों के अनुसार ओडिशा शतरंज संघ में आंतरिक कलह चल रही है और उसका बैंक खाता फ्रीज हो गया है, जिससे आयोजक बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
गुप्ता ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैं खेल मंत्रालय से विनम्र अनुरोध करता हूं कि वह इस मामले पर गौर करे और यह सुनिश्चित करने में मदद करे कि खिलाड़ियों को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ उनकी उचित पुरस्कार राशि मिले।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल एक पुरस्कार राशि का मामला नहीं है। यह भारत के प्रत्येक शतरंज खिलाड़ी की गरिमा और विश्वास से जुड़ा मामला भी है।’’

अभिजीत ने जनवरी में यह प्रतियोगिता जीती थी और उनका दावा है कि आयोजकों पर उनका 5.5 लाख रुपये का बकाया है।
हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि एआईसीएफ के अध्यक्ष नितिन नारंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले का निपटारा किया जाएगा।
गुप्ता ने लिखा, ‘‘एआईसीएफ के अध्यक्ष नितिन नारंग ने मुझे फोन करके आश्वासन दिया कि जरूरी कदम उठा दिए गए हैं। ’’
उन्होंने इससे पहले कहा था, ‘‘मैंने इस साल जनवरी में ओडिशा ओपन का खिताब जीता था।

आयोजकों ने मुझे आश्वासन दिया था कि पुरस्कार राशि एक महीने के अंदर भुगतान कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद जब मैंने उनसे इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने जवाब देना बंद कर दिया।’’
गुप्ता ने कहा, ‘‘जीत और हार एक खिलाड़ी के सफर का हिस्सा हैं लेकिन दुख तब होता है जब आप जीत जाते हैं और फिर भी आपको वह नहीं मिलता जिसके आप हकदार हैं।’’

एआईसीएफ के एक सूत्र ने बताया कि ओडिशा ओपन के आयोजक गुप्ता को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि राज्य संघ के भीतर चल रहे आंतरिक कलह के कारण उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था।
सूत्र ने बताया, ‘‘राज्य संघ के भीतर आपसी कलह चल रही है, प्रतिद्वंद्वी गुट आपस में विवाद में उलझे हुए हैं, जिसके कारण खाता फ्रीज कर दिया गया है और खिलाड़ियों को उनका बकाया नहीं मिल रहा है।

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