पटना में TRE-4 शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज का विरोध मुजफ्फरपुर में हुआ है।आज छात्र संगठनों और वामपंथी दलों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। AIDSO के नेतृत्व में एलएस कॉलेज परिसर से जुलूस निकाला गया और कॉलेज गेट पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया। वहीं SUIC ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार पर छात्रों के दमन का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान छात्र-युवाओं ने “TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी करो”, “TRE-1, 2 और 3 के पैटर्न पर परीक्षा लो”, “छात्रों पर पुलिसिया दमन बंद करो” और “लाठीचार्ज क्यों, बिहार सरकार जवाब दो” जैसे नारे लगाए। लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला हुआ AIDSO जिला अध्यक्ष ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को अपराधियों की तरह पीटा गया और महिला अभ्यर्थियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों का व्यवहार बेहद शर्मनाक रहा। उन्होंने बिहार सरकार से TRE-4 की अधिसूचना अविलंब जारी करने, अभ्यर्थियों से वार्ता करने और लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। इधर, SUCI(C) के राज्य सचिव ने भी बयान जारी कर पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा की अधिसूचना जारी करने और पूर्व की तरह एकल परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण रवैया दर्शाती है। लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अरुण कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य सरकार रोजगार के सवाल पर युवाओं की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब एक लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, लेकिन बहाली प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही। उन्होंने घायल अभ्यर्थियों के मुफ्त इलाज, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। दोनों संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पटना में TRE-4 शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज का विरोध मुजफ्फरपुर में हुआ है।आज छात्र संगठनों और वामपंथी दलों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। AIDSO के नेतृत्व में एलएस कॉलेज परिसर से जुलूस निकाला गया और कॉलेज गेट पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया। वहीं SUIC ने भी घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार पर छात्रों के दमन का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान छात्र-युवाओं ने “TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी करो”, “TRE-1, 2 और 3 के पैटर्न पर परीक्षा लो”, “छात्रों पर पुलिसिया दमन बंद करो” और “लाठीचार्ज क्यों, बिहार सरकार जवाब दो” जैसे नारे लगाए। लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला हुआ AIDSO जिला अध्यक्ष ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को अपराधियों की तरह पीटा गया और महिला अभ्यर्थियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों का व्यवहार बेहद शर्मनाक रहा। उन्होंने बिहार सरकार से TRE-4 की अधिसूचना अविलंब जारी करने, अभ्यर्थियों से वार्ता करने और लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। इधर, SUCI(C) के राज्य सचिव ने भी बयान जारी कर पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा की अधिसूचना जारी करने और पूर्व की तरह एकल परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण रवैया दर्शाती है। लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अरुण कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य सरकार रोजगार के सवाल पर युवाओं की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब एक लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, लेकिन बहाली प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही। उन्होंने घायल अभ्यर्थियों के मुफ्त इलाज, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और लाठीचार्ज के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। दोनों संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


