सुवेंदु सरकार में मंत्री बनेंगे आरा के अर्जुन सिंह!:5वीं बार विधायक, एक बार सांसद रहे; ग्रामीण बोले- मंत्री बने तो हमारा भी विकास होगा

सुवेंदु सरकार में मंत्री बनेंगे आरा के अर्जुन सिंह!:5वीं बार विधायक, एक बार सांसद रहे; ग्रामीण बोले- मंत्री बने तो हमारा भी विकास होगा

भाजपा के सुवेंदु अधिकारी आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। सुवेंदु अधिकारी बंगाल में पहली भाजपा सरकार के पहले मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, सुवेंदु के साथ उनके मंत्रिमंडल में कौन-कौन से विधायक शामिल किए जाएंगे, ये जानकारी फिलहाल नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों की मानें तो मूल रूप से बिहार के आरा के रहने वाले अर्जुन सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। भोजपुर जिले के बड़हरा के केवटिया गांव के रहने वाले 62 साल के अर्जुन सिंह ने पश्चिम बंगाल के बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नोआपाड़ा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी त्रिनंकुर भट्टाचार्जी को 17,656 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह इलाका लंबे समय से वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में रहा है। पहले अर्जुन सिंह की तीन तस्वीरें देखिए अब जानिए अर्जुन सिंह कौन हैं? अर्जुन सिंह का जन्म 2 अप्रैल 1962 को केवटिया गांव में हुआ था। उनके पिता सत्यनारायण सिंह कांग्रेस के सीनियर नेता थे और भाटपाड़ा विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके थे। बचपन के बाद ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल चले गए और वहीं उनकी राजनीतिक जमीन तैयार हुई। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की, लेकिन अपने पिता से मिली राजनीतिक समझ और सामाजिक कार्यों के अनुभव के दम पर उन्होंने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। 1995 में कांग्रेस के काउंसलर के रूप में की राजनीतिक करियर की शुरुआत अर्जुन सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1995 में कांग्रेस के काउंसलर के रूप में की। इसके बाद 1998 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने गए। क्षेत्र में सक्रियता और मजबूत जनसंपर्क के बल पर उन्हें 2001 में भाटपारा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। 2001 के बाद अर्जुन सिंह लगातार 2016 तक भाटपाड़ा से विधायक रहे और इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाए रखी। 2019 में अर्जुन सिंह ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए भाजपा का दामन थाम लिया।
साल 2019 में ही हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अर्जुन सिंह को बैरकपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता दिनेश त्रिवेदी को 14,857 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस जीत के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो गए। साल 2024 में हुए लोकसभा सीट से एक बार भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गए। दो साल बाद 2026 में एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और नोआपाड़ा से विधानसभा की टिकट दिया, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। अर्जुन सिंह के खिलाफ 93 आपराधिक मामले और 236 आईपीसी के आरोप दर्ज हैं। TMC छोड़ने के बाद अक्टूबर 2024 में उनके घर पर देसी बम से हमला किया गया था। बराबर टीएमसी के नेताओं से झड़प की खबरें आती रही है। अब अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह के बारे में जानिए, जो तीसरी बार विधायक बने हैं साल 2019 में अर्जुन सिंह सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके बेटे पवन कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और अपने राजनीतिक करियर की सफल शुरुआत की। पवन कुमार सिंह ने भाटपाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमित गुप्ता को 22,807 वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक पकड़ का लोहा मनवाया है। यह सीट उनके परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती रही है, जहां से उनके दादा और पिता का मजबूत जनाधार रहा है। यही नहीं बैरकपुर लोकसभा के सातों विधानसभा सीटों पर अर्जुन सिंह के मेहनत और प्रभाव के कारण भाजपा ने क्लीन स्वीप किया। अब जानिए, अर्जुन सिंह, पवन सिंह के गांव के लोगों का क्या कहना है? 3 मई को अर्जुन और पवन सिंह की जीत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव केवटिया पहुंची, पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया। गांव के काली मंदिर में महंत द्वारा शंखनाद कर इस जीत को देवी का आशीर्वाद बताया गया। मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटी रही और पूरे इलाके में उत्साह का माहौल देखने को मिला। गांव के लोग बताते हैं कि भले ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन वे जब भी गांव आते हैं, गांव के लिए कुछ न कुछ करते हैं। उन्होंने अपने बाढ़ प्रभावित केवटिया गांव में बांध का निर्माण कराया गया, जिससे गांव को काफी राहत मिली। गंगा कटाव में समा चुके प्राचीन काली मंदिर का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयासों से संभव हो सका। इस मंदिर में उन्होंने अपने परिवार के साथ रहकर तीन दिनों तक पूजा-अर्चना की थी, जिसे ग्रामीण उनकी सफलता का एक प्रमुख कारण मानते हैं। भतीजे जितेंद्र सिंह ने कहा- ये पूरा गांव और बिहार की जीत अर्जुन सिंह के भतीजे जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह जीत केवल दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरे गांव और बिहार की जीत है। उन्होंने कहा कि आज दोनों की ऐतिहासिक जीत के बाद हमारे गांव समेत पूरे बिहार का नाम रौशन हुआ है। अर्जुन सिंह हमारे गांव के कुलभूषण हैं। उनके पिता भी विधायक रहे हैं और हमारे गांव का नाम पहले से ही राजनीति में रहा है। हमारा गांव छोटा जरूर है, लेकिन यहां के लोग हर क्षेत्र में अव्वल हैं। जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि अर्जुन सिंह का अपने गांव से गहरा जुड़ाव है। अर्जुन अंकल हमेशा गांव आते रहते हैं और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कई गरीब बेटियों की शादी करवाई है और धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सनातन धर्म के प्रति उनकी आस्था गहरी है और वे नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। फरवरी में काली मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी वे शामिल होने गांव आए थे। ‘पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ राजनीति करना आसान नहीं’ जितेंद्र सिंह ने बंगाल की राजनीति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ जाकर राजनीति करना आसान नहीं है, लेकिन अर्जुन सिंह ने अपने दम पर ये जीत हासिल की है। उनके नामांकन के दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सांसद मनोज तिवारी पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद किसी बड़े चेहरे की जरूरत नहीं पड़ी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि मैं खुद चुनाव प्रचार के समय वहां मौजूद था। उस समय टीएमसी के कार्यकर्ता आम लोगों को वोट नहीं देने देते थे। जो लोग वोट डालने जाते, उनके साथ मारपीट की जाती थी। अगर किसी को पता चल जाता कि वह बीजेपी को वोट देने जा रहा है, तो उसे घर से उठाकर पीटा जाता था। इस कारण कई लोग डर के कारण मतदान करने नहीं जाते थे। इस बार केंद्रीय बलों की तैनाती से निष्पक्ष मतदान संभव हो सका। ‘टीएमसी के गुंड़ों से पीड़ितों का अर्जुन सिंह अपने पैसे से इलाज कराते थे’ केवटिया गांव के ही रहने वाले और भाटपाड़ा में काम करने वाले संजीव कुमार पंडित ने बताया कि मैं अर्जुन सिंह के विधानसभा क्षेत्र का वोटर भी हूं। उन्होंने कहा कि पहले टीएमसी के लोग दूसरे दलों के समर्थकों के साथ मारपीट करते थे। राह चलते लोगों को उठा लेना और कपड़े उतारकर पिटाई करना आम बात थी। अर्जुन सिंह ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम किया। वे घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज भी करवाते थे। संजीव पंडित ने कहा कि इस बार के चुनाव में हालात काफी बदले हुए थे। मैंने इस बार वोट डाला और यह संभव हुआ केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाटपारा के कांकीनाड़ा स्थित जलेबी मैदान में सभा कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संदेश दिया और विकास के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। गांव के ही एक अन्य निवासी बबलू सिंह ने बताया कि अर्जुन सिंह और पवन कुमार सिंह गांव में नया घर भी बनवा रहे हैं, ताकि यहां आकर लोगों के बीच रह सकें और उनकी मदद कर सकें। वे अपनी मिट्टी से जुड़े रहना चाहते हैं, यही वजह है कि वे लगातार गांव आते रहते हैं। उनकी इस जीत में गांव के लोगों का भी योगदान रहा है, क्योंकि यहां के करीब 50 प्रतिशत लोग उसी क्षेत्र में रहते हैं। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अर्जुन सिंह और पवन कुमार सिंह आने वाले समय में और बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा है कि वे बंगाल सरकार में मंत्री बनें और विकास के लिए काम करें। भाजपा के सुवेंदु अधिकारी आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। सुवेंदु अधिकारी बंगाल में पहली भाजपा सरकार के पहले मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, सुवेंदु के साथ उनके मंत्रिमंडल में कौन-कौन से विधायक शामिल किए जाएंगे, ये जानकारी फिलहाल नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों की मानें तो मूल रूप से बिहार के आरा के रहने वाले अर्जुन सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। भोजपुर जिले के बड़हरा के केवटिया गांव के रहने वाले 62 साल के अर्जुन सिंह ने पश्चिम बंगाल के बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत नोआपाड़ा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी त्रिनंकुर भट्टाचार्जी को 17,656 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह इलाका लंबे समय से वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में रहा है। पहले अर्जुन सिंह की तीन तस्वीरें देखिए अब जानिए अर्जुन सिंह कौन हैं? अर्जुन सिंह का जन्म 2 अप्रैल 1962 को केवटिया गांव में हुआ था। उनके पिता सत्यनारायण सिंह कांग्रेस के सीनियर नेता थे और भाटपाड़ा विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके थे। बचपन के बाद ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल चले गए और वहीं उनकी राजनीतिक जमीन तैयार हुई। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की, लेकिन अपने पिता से मिली राजनीतिक समझ और सामाजिक कार्यों के अनुभव के दम पर उन्होंने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। 1995 में कांग्रेस के काउंसलर के रूप में की राजनीतिक करियर की शुरुआत अर्जुन सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1995 में कांग्रेस के काउंसलर के रूप में की। इसके बाद 1998 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने गए। क्षेत्र में सक्रियता और मजबूत जनसंपर्क के बल पर उन्हें 2001 में भाटपारा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। 2001 के बाद अर्जुन सिंह लगातार 2016 तक भाटपाड़ा से विधायक रहे और इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाए रखी। 2019 में अर्जुन सिंह ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए भाजपा का दामन थाम लिया।
साल 2019 में ही हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अर्जुन सिंह को बैरकपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता दिनेश त्रिवेदी को 14,857 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस जीत के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो गए। साल 2024 में हुए लोकसभा सीट से एक बार भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गए। दो साल बाद 2026 में एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और नोआपाड़ा से विधानसभा की टिकट दिया, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। अर्जुन सिंह के खिलाफ 93 आपराधिक मामले और 236 आईपीसी के आरोप दर्ज हैं। TMC छोड़ने के बाद अक्टूबर 2024 में उनके घर पर देसी बम से हमला किया गया था। बराबर टीएमसी के नेताओं से झड़प की खबरें आती रही है। अब अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह के बारे में जानिए, जो तीसरी बार विधायक बने हैं साल 2019 में अर्जुन सिंह सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके बेटे पवन कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और अपने राजनीतिक करियर की सफल शुरुआत की। पवन कुमार सिंह ने भाटपाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमित गुप्ता को 22,807 वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक पकड़ का लोहा मनवाया है। यह सीट उनके परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती रही है, जहां से उनके दादा और पिता का मजबूत जनाधार रहा है। यही नहीं बैरकपुर लोकसभा के सातों विधानसभा सीटों पर अर्जुन सिंह के मेहनत और प्रभाव के कारण भाजपा ने क्लीन स्वीप किया। अब जानिए, अर्जुन सिंह, पवन सिंह के गांव के लोगों का क्या कहना है? 3 मई को अर्जुन और पवन सिंह की जीत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव केवटिया पहुंची, पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया। गांव के काली मंदिर में महंत द्वारा शंखनाद कर इस जीत को देवी का आशीर्वाद बताया गया। मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटी रही और पूरे इलाके में उत्साह का माहौल देखने को मिला। गांव के लोग बताते हैं कि भले ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन वे जब भी गांव आते हैं, गांव के लिए कुछ न कुछ करते हैं। उन्होंने अपने बाढ़ प्रभावित केवटिया गांव में बांध का निर्माण कराया गया, जिससे गांव को काफी राहत मिली। गंगा कटाव में समा चुके प्राचीन काली मंदिर का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयासों से संभव हो सका। इस मंदिर में उन्होंने अपने परिवार के साथ रहकर तीन दिनों तक पूजा-अर्चना की थी, जिसे ग्रामीण उनकी सफलता का एक प्रमुख कारण मानते हैं। भतीजे जितेंद्र सिंह ने कहा- ये पूरा गांव और बिहार की जीत अर्जुन सिंह के भतीजे जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह जीत केवल दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि पूरे गांव और बिहार की जीत है। उन्होंने कहा कि आज दोनों की ऐतिहासिक जीत के बाद हमारे गांव समेत पूरे बिहार का नाम रौशन हुआ है। अर्जुन सिंह हमारे गांव के कुलभूषण हैं। उनके पिता भी विधायक रहे हैं और हमारे गांव का नाम पहले से ही राजनीति में रहा है। हमारा गांव छोटा जरूर है, लेकिन यहां के लोग हर क्षेत्र में अव्वल हैं। जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि अर्जुन सिंह का अपने गांव से गहरा जुड़ाव है। अर्जुन अंकल हमेशा गांव आते रहते हैं और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कई गरीब बेटियों की शादी करवाई है और धार्मिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। सनातन धर्म के प्रति उनकी आस्था गहरी है और वे नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। फरवरी में काली मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी वे शामिल होने गांव आए थे। ‘पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ राजनीति करना आसान नहीं’ जितेंद्र सिंह ने बंगाल की राजनीति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ जाकर राजनीति करना आसान नहीं है, लेकिन अर्जुन सिंह ने अपने दम पर ये जीत हासिल की है। उनके नामांकन के दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सांसद मनोज तिवारी पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद किसी बड़े चेहरे की जरूरत नहीं पड़ी। जितेंद्र सिंह ने कहा कि मैं खुद चुनाव प्रचार के समय वहां मौजूद था। उस समय टीएमसी के कार्यकर्ता आम लोगों को वोट नहीं देने देते थे। जो लोग वोट डालने जाते, उनके साथ मारपीट की जाती थी। अगर किसी को पता चल जाता कि वह बीजेपी को वोट देने जा रहा है, तो उसे घर से उठाकर पीटा जाता था। इस कारण कई लोग डर के कारण मतदान करने नहीं जाते थे। इस बार केंद्रीय बलों की तैनाती से निष्पक्ष मतदान संभव हो सका। ‘टीएमसी के गुंड़ों से पीड़ितों का अर्जुन सिंह अपने पैसे से इलाज कराते थे’ केवटिया गांव के ही रहने वाले और भाटपाड़ा में काम करने वाले संजीव कुमार पंडित ने बताया कि मैं अर्जुन सिंह के विधानसभा क्षेत्र का वोटर भी हूं। उन्होंने कहा कि पहले टीएमसी के लोग दूसरे दलों के समर्थकों के साथ मारपीट करते थे। राह चलते लोगों को उठा लेना और कपड़े उतारकर पिटाई करना आम बात थी। अर्जुन सिंह ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम किया। वे घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाकर उनका इलाज भी करवाते थे। संजीव पंडित ने कहा कि इस बार के चुनाव में हालात काफी बदले हुए थे। मैंने इस बार वोट डाला और यह संभव हुआ केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाटपारा के कांकीनाड़ा स्थित जलेबी मैदान में सभा कर ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संदेश दिया और विकास के लिए काम करने का भरोसा दिलाया। गांव के ही एक अन्य निवासी बबलू सिंह ने बताया कि अर्जुन सिंह और पवन कुमार सिंह गांव में नया घर भी बनवा रहे हैं, ताकि यहां आकर लोगों के बीच रह सकें और उनकी मदद कर सकें। वे अपनी मिट्टी से जुड़े रहना चाहते हैं, यही वजह है कि वे लगातार गांव आते रहते हैं। उनकी इस जीत में गांव के लोगों का भी योगदान रहा है, क्योंकि यहां के करीब 50 प्रतिशत लोग उसी क्षेत्र में रहते हैं। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अर्जुन सिंह और पवन कुमार सिंह आने वाले समय में और बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा है कि वे बंगाल सरकार में मंत्री बनें और विकास के लिए काम करें।  

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