Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। दरअसल, अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को समर्थन देने के कांग्रेस के फैसले के बाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) में भारी नाराजगी है। दोनों दलों के बीच मतभेद इतने बढ़ गए हैं कि अब DMK ने अपने लंबे समय के सहयोगी रहे कांग्रेस से दूरी बनाने का फैसला कर लिया है।
कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
इसी कड़ी में DMK संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था की आधिकारिक मांग की है। इसके लिए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक अनुरोध पत्र भेजा है। पत्र में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद बदले राजनीतिक हालात का हवाला दिया गया है। पत्र में कनिमोझी ने तर्क दिया कि DMK सांसदों का कांग्रेस प्रतिनिधियों के साथ बैठना अब उचित नहीं है।
कनिमोझी ने लिखा, ‘मैं लोकसभा में DMK सांसदों की बैठने की व्यवस्था में उचित बदलाव का विनम्र अनुरोध करती हूं। बदले हुए राजनीतिक हालात और कांग्रेस के साथ हमारे गठबंधन के समाप्त हो जाने के कारण, हमारे सांसदों का सदन में उनके साथ वर्तमान बैठने की व्यवस्था में बने रहना उचित नहीं होगा। अतः मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि DMK संसदीय दल के माननीय सदस्यों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सदन में अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।’
कांग्रेस के कदम को बताया ‘विश्वासघात’
इससे पहले गुरुवार को DMK विधायक दल ने अपनी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में कांग्रेस के फैसले की कड़ी निंदा की गई और बिना किसी लाग-लपेट के इसे अचानक आया राजनीतिक बदलाव और ‘विश्वासघात’ करार दिया गया। DMK नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस को पिछले कार्यकाल और व्यवस्था में DMK के ‘धैर्य और उदारता’ की वजह से ही राज्यसभा की एक सीट और विधानसभा की 28 सीटें मिली थीं।
क्या है पूरा मामला?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सभी को चौंकाते हुए थलापति विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी। 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 108 सीटें हासिल कीं, लेकिन वह बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रह गई।
ऐसे में कांग्रेस के पांच विधायकों ने TVK को समर्थन देने का फैसला किया, जिसे DMK ने ‘विश्वासघात’ करार दिया। हालांकि TVK अभी भी बहुमत से दूर है और अन्य छोटे दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश में लगी हुई है।


