राज्यपाल थावरचंद गहलोत Thawar Chand Gehlot ने कहा कि भारत सनातन धर्म की पवित्र परंपराओं में गहराई से रचा-बसा देश है। संस्कृति, मूल्य, परंपराएं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिली आध्यात्मिक ज्ञान की विरासत समाज की प्रगति और कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
धर्म मार्ग दिखाता है
वे सनातन प्रतिष्ठान की ओर से गुरुवार को आयोजित महात्मा गांधी राष्ट्रीय सद्भावना पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि धर्म, अध्यात्म और सनातन भारतीय दर्शन के तीन मूल स्तंभ हैं। इनका समन्वय व्यक्ति को संतुलित, जागरूक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। धर्म मार्ग दिखाता है, अध्यात्म उस मार्ग पर चलने का अनुभव कराता है और सनातन उस यात्रा को शाश्वत मूल्य प्रदान करता है।
विश्वभर में सद्भाव और अध्यात्म का संदेश
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा सर्व धर्म समभाव, वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया: जैसे आदर्शों से प्रेरित रही है। संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक नेताओं ने भारतीय संस्कृति को नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देने के साथ विश्वभर में सद्भाव और अध्यात्म का संदेश पहुंचाया। भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का संदेश देते हुए जियो और जीने दो का सिद्धांत दिया। वहीं गौतम बुद्ध ने मध्यम मार्ग, अष्टांगिक मार्ग और चार आर्य सत्यों के माध्यम से मानवता को मुक्ति का मार्ग दिखाया।
पहले से अधिक प्रासंगिक
आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब महान नेताओं के विचार और शिक्षाएं पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। समाज में सकारात्मकता, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश फैलाना हम सबकी जिम्मेदारी है।इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य प्रताम सिम्हा, पूर्व मंत्री प्रमोद माधवराज, सनातन प्रतिष्ठान के अध्यक्ष किशोर अल्वा, डॉ. बी.आर. आंबेडकर विकास निगम के अध्यक्ष आर. संपत राज सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


