हाथरस में चकबंदी से जुड़ी समस्या का समाधान न होने पर एक किसान ने कलेक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह का प्रयास किया। सासनी क्षेत्र के नगला गढू निवासी किसान देवेंद्र सिंह ने चकबंदी अधिकारी पर रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। मौके पर मौजूद स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए किसान को बचा लिया। देवेंद्र सिंह का आरोप है कि चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार ने अनुपालन आदेश कराने के नाम पर रिश्वत मांगी थी। किसान के मुताबिक, अधिकारी ने 20 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन पैसे की व्यवस्था न होने पर उन्होंने 40 हजार रुपये में अपनी भैंस बेचकर रकम दी। इसके बावजूद उनका काम नहीं हुआ और बाद में उनका प्रार्थना पत्र भी खारिज कर दिया गया। पीड़ित किसान ने बताया कि नगला गढू की जमीन को लेकर उनके परिवार का मुकदमा 2012 से चल रहा है। उनके पिता राजवीर शर्मा ने वर्ष 1994 में जमीन का बैनामा कराया था। मामला वर्ष 2019 में एटा बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के पास पहुंचा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 6 अगस्त 2025 को फैसला उनके पक्ष में आया था। एसओसी कोर्ट से निर्णय मिलने के बाद फाइल चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार के पास पहुंची थी। घटना के बाद चकबंदी विभाग में हड़कंप मच गया। वहीं चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि मामला अभी विचाराधीन है, इसलिए प्रार्थना पत्र खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि डीडीसी कोर्ट में मुकदमा लंबित है और अंतिम आदेश अभी नहीं हुआ है, जबकि किसान एटा एसओसी के आदेश का तत्काल अनुपालन कराने की मांग कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रकाश चंद ने जांच का आश्वासन दिया है। एडीएम ने कहा कि पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि किसान का काम अब तक क्यों लंबित है। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।


