नालंदा के हिलसा में रेलवे प्रशासन की मनमानी और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का एक मामला सामने आया है। दरअसल, रेलवे प्रशासन की ओर से फाटक संख्या 18/C को लंबे समय से बंद किया गया है। मामले की जानकारी के बाद नालंदा के जिलाधिकारी की ओर से एक साल पहले ही इस फाटक को खोलने का निर्देश दिया गया था, लेकिन रेलवे प्रशासन की उदासीनता के कारण बनवारीपुर समेत दर्जनों गांवों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से फाटक को बंद किए जाने के बाद 10 से 12 गांव के करीब 50 हजार की आबादी को कामता हाल्ट के पास घूम कर हिलसा बाजार जाने में 6 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। 19 अप्रैल 2025 को रेलवे प्रशासन ने बंद किया था फाटक 19 अप्रैल 2025 को रेलवे ने अचानक इस फाटक को बंद कर दिया था। उस समय ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सहायक मंडल इंजीनियर के पत्रांक में फाटक संख्या 17/C और 19/C को बंद करने का निर्देश था, परंतु किसी रसूखदार व्यक्ति के स्वार्थ और दबाव में आकर नियमों को ताक पर रखते हुए जबरन 18/C पर ताला जड़ दिया गया। इस कार्रवाई में पुलिस बल का भी दुरुपयोग किया गया, जिसे ग्रामीणों ने पूरी तरह से नियम विरुद्ध और दमनकारी बताया है। आपातकालीन के साथ-साथ रोजाना की आपूर्ति भी प्रभावित मामला तब और गंभीर हो गया जब हिलसा अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से की गई स्थल जांच रिपोर्ट में रेलवे के दावों की पोल खुल गई। प्रशासनिक जांच में यह साफ हुआ कि इस फाटक के बंद होने से नगरनौसा प्रखंड तक पहुंचने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया है, जिससे न केवल आम जनजीवन बल्कि आपातकालीन सेवाएं और दैनिक आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हो रही हैं। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर जिलाधिकारी ने पूर्व मध्य रेलवे दानापुर के वरीय परियोजना अभियंता को पत्र लिखकर विधि-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी और जनहित में फाटक खोलने का निर्देश दिया था, लेकिन रेलवे विभाग ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। भाजपा नगर महामंत्री उदित नारायण, अमरजीत कुमार, रेखा देवी और मनोरमा देवी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने हस्ताक्षरित आवेदन के माध्यम से प्रशासन को याद दिलाया है कि उन्हें महज 2-3 दिनों में फाटक खोलने का भरोसा दिया गया था, जो एक साल बाद भी पूरा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के आदेश का पालन न होना सीधे तौर पर लोकतंत्र में जनता की समस्याओं का उपहास उड़ाना है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ग्रामीणों की उग्र आंदोलन की रणनीति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि रेलवे प्रशासन ने जल्द ही अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो यह विवाद आने वाले दिनों में एक बड़ी कानून-व्यवस्था की समस्या का रूप ले लेगा। वहीं इस पूरे प्रकरण पर एसडीओ हिलसा अमित कुमार पटेल ने बताया कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। नालंदा के हिलसा में रेलवे प्रशासन की मनमानी और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का एक मामला सामने आया है। दरअसल, रेलवे प्रशासन की ओर से फाटक संख्या 18/C को लंबे समय से बंद किया गया है। मामले की जानकारी के बाद नालंदा के जिलाधिकारी की ओर से एक साल पहले ही इस फाटक को खोलने का निर्देश दिया गया था, लेकिन रेलवे प्रशासन की उदासीनता के कारण बनवारीपुर समेत दर्जनों गांवों के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से फाटक को बंद किए जाने के बाद 10 से 12 गांव के करीब 50 हजार की आबादी को कामता हाल्ट के पास घूम कर हिलसा बाजार जाने में 6 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। 19 अप्रैल 2025 को रेलवे प्रशासन ने बंद किया था फाटक 19 अप्रैल 2025 को रेलवे ने अचानक इस फाटक को बंद कर दिया था। उस समय ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा था कि सहायक मंडल इंजीनियर के पत्रांक में फाटक संख्या 17/C और 19/C को बंद करने का निर्देश था, परंतु किसी रसूखदार व्यक्ति के स्वार्थ और दबाव में आकर नियमों को ताक पर रखते हुए जबरन 18/C पर ताला जड़ दिया गया। इस कार्रवाई में पुलिस बल का भी दुरुपयोग किया गया, जिसे ग्रामीणों ने पूरी तरह से नियम विरुद्ध और दमनकारी बताया है। आपातकालीन के साथ-साथ रोजाना की आपूर्ति भी प्रभावित मामला तब और गंभीर हो गया जब हिलसा अनुमंडल पदाधिकारी की ओर से की गई स्थल जांच रिपोर्ट में रेलवे के दावों की पोल खुल गई। प्रशासनिक जांच में यह साफ हुआ कि इस फाटक के बंद होने से नगरनौसा प्रखंड तक पहुंचने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया है, जिससे न केवल आम जनजीवन बल्कि आपातकालीन सेवाएं और दैनिक आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हो रही हैं। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर जिलाधिकारी ने पूर्व मध्य रेलवे दानापुर के वरीय परियोजना अभियंता को पत्र लिखकर विधि-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई थी और जनहित में फाटक खोलने का निर्देश दिया था, लेकिन रेलवे विभाग ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। भाजपा नगर महामंत्री उदित नारायण, अमरजीत कुमार, रेखा देवी और मनोरमा देवी समेत दर्जनों ग्रामीणों ने हस्ताक्षरित आवेदन के माध्यम से प्रशासन को याद दिलाया है कि उन्हें महज 2-3 दिनों में फाटक खोलने का भरोसा दिया गया था, जो एक साल बाद भी पूरा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के आदेश का पालन न होना सीधे तौर पर लोकतंत्र में जनता की समस्याओं का उपहास उड़ाना है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ग्रामीणों की उग्र आंदोलन की रणनीति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यदि रेलवे प्रशासन ने जल्द ही अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो यह विवाद आने वाले दिनों में एक बड़ी कानून-व्यवस्था की समस्या का रूप ले लेगा। वहीं इस पूरे प्रकरण पर एसडीओ हिलसा अमित कुमार पटेल ने बताया कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।


