भोजशाला केस में जैन पक्ष की एंट्री:अंबिका मंदिर होने की दलील, ASI रिपोर्ट के चिह्नों को बताया जैन परंपरा से जुड़ा

भोजशाला केस में जैन पक्ष की एंट्री:अंबिका मंदिर होने की दलील, ASI रिपोर्ट के चिह्नों को बताया जैन परंपरा से जुड़ा

भोजशाला मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका के साथ जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई के दौरान जैन पक्ष ने अपने दावे हाईकोर्ट के समक्ष विस्तार से प्रस्तुत किए। सलेकचंद जैन की ओर से एडवोकेट दिनेश राजभर ने दलील देते हुए भोजशाला को प्राचीन जैन गुरुकुल और देवी अंबिका का मंदिर बताया। जैन पक्ष की ओर से कहा गया कि वर्तमान भोजशाला परिसर प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और देवी अंबिका का मंदिर था, जिसे बाद में मुस्लिम शासकों द्वारा नष्ट कर दिया गया। एडवोकेट ने यह भी कहा कि जिस मूर्ति को हिंदू समाज वागदेवी के रूप में मानता है, वह वास्तव में जैन देवी अंबिका की प्रतिमा है। एडवोकेट राजभर ने तर्क दिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट में जिन चिह्नों और प्रतीकों का उल्लेख है, वे जैन तीर्थंकरों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थंकरों की पूजा होती है और प्रत्येक के साथ विशिष्ट प्रतीक जुड़े होते हैं। 2003 के आदेश को दी चुनौती जैन पक्ष ने ASI के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें हिंदुओं को मंगलवार और मुस्लिमों को शुक्रवार को पूजा/नमाज की अनुमति दी गई थी। इसे संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत जैन समुदाय के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया। मामले की अगली सुनवाई 7 मई को होगी। ब्रिटिश म्यूजियम में रखी प्रतिमा का किया उल्लेख सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि वर्ष 1034 में राजा भोज द्वारा स्थापित जैन देवी अंबिका की प्रतिमा 1875 में ब्रिटिश शासन के दौरान प्राप्त हुई थी, जो वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित है। याचिकाकर्ता ने उस प्रतिमा को भारत लाकर भोजशाला में स्थापित करने की मांग की। ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध का हवाला जैन पक्ष ने 1881-82 की सरकारी रिपोर्ट सहित विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों और विद्वानों के शोध का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्तमान संरचना में जैन वास्तुकला, स्तंभ और क्षेत्रपाल (भैरव) की आकृतियां मौजूद हैं। महाधिवक्ता ने याचिका को बताया ग्राह्य मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि “राइट टू वर्शिप” (पूजा का अधिकार) के आधार पर यह याचिका सुनवाई योग्य (मेंटेनेबल) है। ASI रिपोर्ट का भी दिया गया हवाला महाधिवक्ता ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि खुदाई में मिले शिलालेख और अन्य साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि यहां पहले मंदिर था, जिसे बाद में परिवर्तित किया गया।
ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई धार के भोजशाला विवाद मामले में 6 अप्रैल से रोज सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच सोमवार दोपहर ढाई बजे से सभी याचिकाओं को एक साथ सुनेगी। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं के तर्क सुने जाएंगे, फिर आपत्ति लगाने वालों को दलील रखने का अवसर दिया जाएगा।पूरी खबर पढ़ें

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