50 लाख बजट और कमा लिए 2000 करोड़, फिल्म में काम करने वाले रातोंरात हुए ‘गायब’, हॉरर मूवी ने की पैसों की बारिश

50 लाख बजट और कमा लिए 2000 करोड़, फिल्म में काम करने वाले रातोंरात हुए ‘गायब’, हॉरर मूवी ने की पैसों की बारिश

The Blair Witch Project Horror Film: फिल्मों की दुनिया में अक्सर बड़े बजट, नामी सितारे और भव्य सेट सफलता की गारंटी माने जाते हैं। लेकिन इतिहास में एक ऐसी फिल्म भी दर्ज है जिसने इन तमाम धारणाओं को तोड़ते हुए ये साबित कर दिया कि असली ताकत कहानी और उसे दिखाने की क्षमता में होती है। साल 1999 में आई ‘द ब्लेयर विच प्रोजेक्ट’ ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया, जिसे आज भी सिनेमा की दुनिया में एक मिसाल के तौर पर याद किया जाता है।

ये फिल्म सिर्फ एक हॉरर कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा प्रयोग था जिसने दर्शकों के दिमाग के साथ खेलते हुए डर को हकीकत में बदल दिया। बेहद सीमित संसाधनों में तैयार इस फिल्म का बजट करीब 50 लाख रुपये के आसपास बताया जाता है, लेकिन इसकी कमाई ने दुनिया भर में नए रिकॉर्ड कायम कर दिए। कहा जाता है कि इसने हजारों करोड़ का कारोबार कर फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया था। इस फिल्म ने दुनिया भर में 2000 करोड़ का कलेक्शन किया था।

जब ‘फिल्म’ बन गई हकीकत (The Blair Witch Project Horror Film)

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी से ज्यादा उसकी मार्केटिंग थी। उस समय इंटरनेट अपने शुरुआती दौर में था और मेकर्स ने इसका इस्तेमाल कुछ इस अंदाज में किया कि लोग फिल्म और हकीकत के बीच फर्क ही भूल गए। एक वेबसाइट के जरिए यह दावा किया गया कि फिल्म में दिखाए गए तीन छात्र वास्तव में लापता हो चुके हैं और जो फुटेज दिखाई जा रही है, वह असली है।

इतना ही नहीं, फिल्म में काम करने वाले कलाकारों को भी ‘गायब’ घोषित कर दिया गया। इस रणनीति ने दर्शकों के मन में एक अजीब सा डर पैदा कर दिया। लोग सिनेमा हॉल में फिल्म देखने नहीं, बल्कि उस ‘सच’ को जानने पहुंच रहे थे, जिसे वो वास्तविक घटना मान बैठे थे।

कहानी जिसने रातों की नींद उड़ाई

फिल्म की कहानी तीन युवा फिल्म स्टूडेंट्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक रहस्यमयी चुड़ैल की कहानी पर डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए जंगल में जाते हैं। वहां पहुंचने के बाद उनके साथ जो अजीब घटनाएं होती हैं, वो धीरे-धीरे डर को चरम पर पहुंचा देती हैं।

जंगल में गूंजती आवाजें, अजीब निशान और अचानक गायब होते साथी- इन सबने दर्शकों को सीट से उठने नहीं दिया। खास बात यह थी कि पूरी फिल्म कैमरे की रिकॉर्डिंग के रूप में दिखाई गई, जिससे यह और भी ज्यादा वास्तविक लगने लगी। यही स्टाइल बाद में ‘फाउंड फुटेज’ जॉनर की पहचान बन गया।

डर का नया फॉर्मूला

इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि हॉरर सिर्फ बड़े स्पेशल इफेक्ट्स से नहीं, बल्कि दिमागी खेल से भी पैदा किया जा सकता है। बिना किसी बड़े स्टार के, बिना भारी बजट के और बिना पारंपरिक फिल्मी तामझाम के, इस फिल्म ने दर्शकों के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी।

सिनेमा इतिहास में यह फिल्म इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि इसने मार्केटिंग और कहानी कहने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। आज के दौर में ‘वायरल मार्केटिंग’ जिस तरह से काम करती है, उसकी नींव कहीं न कहीं इसी फिल्म ने रखी थी।

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