भागलपुर क्षेत्र में उत्तर और दक्षिण बिहार तीन महीने के लिए सड़क संपर्क से कट गया है। वजह गंगा नदी पर बने विक्रमशिला गंगा सेतु का टूट जाना। इसे ठीक करने में तीन महीने लगेंगे। 2017 के बाद से पुल की मरम्मत नहीं की गई थी। डीएम, मुख्य सचिव और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने चार बार पिलर में आई दरार को लेकर चेताया। दिल्ली और पटना आईआईटी के एक्सपर्ट्स ने पुल की जांच की रिपोर्ट दिया। बताया कि पुल धंस सकता है। इसके बाद भी भारी वाहन गुजरते रहे। 9 साल में पूरी मरम्मत नहीं हुई। पुल क्यों गिरा? इस दिशा में हमने पड़ताल की तो पता चला कि इसके पीछे बड़ी वजह सरकारी मशीनरी के काम करने का तरीका है। पुल के मेंटिनेंस की फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर घूमती रही। मंजूरी का इंतजार करती रही। इस लापरवाही का नतीजा सामने है। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, विक्रमशिला गंगा सेतु क्यों टूटा? बिहार में पुल इतनी जल्द क्यों गिर रहे हैं? इससे पहले बड़े पुल गिरने की कितनी घटनाएं हुईं? सबसे पहले जानिए विक्रमशिला पुल क्यों गिरा? पुल निर्माण निगम के मुताबिक, पुल का एक हिस्सा ध्वस्त होने के पीछे अफसरों की लापरवाही और मरम्मत नहीं होना है। विभाग ने पहली नजर में पाया कि पुल की निगरानी नहीं की गई। समय-समय पर इसकी मरम्मत नहीं हुई। निगरानी का जिम्मा पथ निर्माण विभाग के एनएच डिवीजन के पास था। विभाग ने एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया है। पुल यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन ने बनाया था। मुख्य सचिव से एक्जीक्यूटिव इंजीनियर तक, 4 बार किया अलर्ट अलर्ट 1- 2025 में पुल के स्पैन में दरार आई थी। मार्च में तब के मुख्य सचिव भागलपुर आए थे। डीएम नवल किशोर चौधरी ने उनके सामने पुल में दरार की बात रखी थी। बताया था कि रख-रखाव सही से नहीं होने के चलते पिलर की दीवार पर 4 जगह दरार आई है। बाढ़ के कारण मिट्टी कटने से पिलर एक तरफ झुक गया है। पुल के दरार मापने के लिए पिलर पर कांच लगाए गए थे जो टूट गए हैं। अलर्ट 2- फरवरी 2025 में नेशनल हाईवे के पूर्व ईई मनोरंजन कुमार पांडेय ने बताया था कि पिलर प्रोटेक्शन पर दरार पानी के तेज दबाव आई है। मेंटिनेंस कराना चाहिए था। पुल के कार्बन प्लेट और एक्सपेंशन ज्वाइंट की दरारों से खतरा बढ़ता है। इससे हादसा हो सकता है। अलर्ट 3- 11 अप्रैल 2026 को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने सेतु का सघन निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पुल के कई पिलरों की बेयरिंग खराब हो चुकी है। अलर्ट 4- 30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। उस वक्त इंजीनियर्स ने कहा था, गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस स्थिति में प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुई है। इसका असर पिलर्स पर पड़ेगा। बाढ़ के समय यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ सकती है। मंजूरी का इंतजार करती रह गई मरम्मत वाली फाइल विक्रमशिला पुल में प्रॉब्लम थी। इसकी जानकारी पिछले महीने दी गई थी। एक्सपर्ट की टीम ने जांच कर रिपोर्ट दी थी। इसके आधार पर DPR (Detailed Project Report) बनाई गई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। पुल के मेंटिनेंस संंबंधी फाइल सरकारी दफ्तर में घूमती रही। सूत्रों के अनुसार करीब 25 दिन से यह फाइल पथ निर्माण विभाग में है। मंजूरी का इंतजार था। इसी दौरान पुल का एक हिस्सा गिर गया। पुल निर्माण निगम के एमडी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कहा, ‘बीच में एक बार सूचना आई थी। एक महीना पहले बताया गया था कि पुल में कुछ प्रॉब्लम है। इसके बाद पटना आईआईटी और पथ निर्माण विभाग की टीम जांच करने गई थी।’ 9 साल पहले हुआ था विक्रमशिला पुल का मेंटिनेंस 2016 अक्टूबर-नवंबर में मुंबई की रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट्स ने बरारी की ओर स्पेन में कार्बन प्लेट चिपकाया था। एजेंसी के इंजीनियर ने इसकी समय-समय पर जांच कराने की बात कही थी। बताया था कि इससे पुल को नुकसान नहीं होगा। पहले पुल के रख-रखाव की जिम्मेदारी पुल निर्माण निगम के खगड़िया डिवीजन के पास थी। कार्बन प्लेट चिपकाने के बाद डिवीजन स्तर से इसकी जांच नहीं की गई। पुल जब ट्रांसफर होकर पुल निर्माण निगम के भागलपुर डिवीजन के पास आया तो भी कार्बन प्लेट की स्थिति की जांच नहीं हुई। मुंबई की एजेंसी से पुल की मरम्मत कराने में 14 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। एजेंसी ने पुल के स्पेन को जैक लगाकर उठाया था और मरम्मत की थी। एक्सपेंशन ज्वाइंट का भी रिपेयर किया गया था। आईआईटी दिल्ली की एक टीम ने भी पुल की जांच की थी। उसने भी पुल की मजबूती पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद रिपेयर का काम शुरू हुआ था। पिछले 10 साल में पुल की तीन बार मरम्मत की गई। मार्च 2026 में भी इसका रिपेयर वर्क हुआ, लेकिन पुल की हालत पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई थी। भारी गाड़ी गुजरने पर आती थी धड़ाम-धड़ाम की आवाज पुल के पिलर को गंगा नदी की तेज धारा से बचाने के लिए बनाए गए प्रोटेक्शन वॉल में दरार आई है। मिट्टी कटने से पिलर एक तरफ झुक गया है। पुल के जॉइंट में दरार बढ़ गई है। 2016-17 में पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट और बियरिंग बदले गए थे। 5-6 साल बाद ही एक्सपेंशन ज्वाइंट खराब होने लगे थे। इसका गैप बढ़ गया था, जिससे बियरिंग पर लोड बढ़ गया था। एक्सपेंशन ज्वाइंट खराब होने से पुल से भारी वाहन के गुजरने पर धड़ाम-धड़ाम की आवाज आती थी। बिहार में 4 साल में गिरे 20 पुल विक्रमशिला पुल गिरने की घटना अकेली नहीं है। बिहार में पुल गिरने की घटनाएं कुछ ज्यादा ही होती हैं। 4 साल में 20 से अधिक पुल गिरे हैं। ग्राफिक-1
भागलपुर के सुल्तानगंज में बन रहा पुल 3 बार गिरा भागलपुर जिले में 1710 करोड़ रुपए की लागत से सुल्तानगंज-अगवानी पुल बन रहा है। गंगा नदी पर बन रहा चार लेन का यह पुल तीन बार ध्वस्त हो चुका है। पहला हादसाः 30 अप्रैल 2022 को तेज आंधी और बारिश के कारण पिलर नंबर 4, 5 और 6 को जोड़ने वाला सुपर स्ट्रक्चर का लगभग 100 फीट हिस्सा गिर गया था। दूसरा हादसाः 4 जून 2023 को पिलर नंबर 10, 11, 12 और 13 के बीच का सुपर स्ट्रक्चर और सब स्ट्रक्चर (लगभग 200 मीटर) ढह गया। तीसरा हादसाः 17 अगस्त 2024 को पिलर नंबर 9 और 10 के बीच का सुपर स्ट्रक्चर गंगा नदी में समा गया था। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के मुताबिक यह पुराना क्षतिग्रस्त हिस्सा था, जिसे हटाया जा रहा था, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण यह गिर गया। बिहार में बन रहे पुल जल्द क्यों गिर रहे? जल संसाधन विभाग ने बिहार में गिरे पुलों की जांच की तो काफी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार पुल गिरने के पीछे असल वजह इसके निर्माण में भारी गड़बड़ी रही है। भ्रष्टाचार का अहम रोल है। कमीशन खोरी की वजह से पुल का निर्माण तय मापदंड पर नहीं हुआ। गुणवत्ता खराब रही। पुल गिरने की घटनाएं बढ़ी तो नीतीश सरकार ने किया था 15 इंजीनियरों को निलंबित पुल गिरने की घटनाएं बढ़ने के बाद जुलाई 2024 में तब की नीतीश सरकार ने 15 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था। इनमें कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता शामिल थे। जल संसाधन विभाग ने 11 और ग्रामीण कार्य विभाग ने 4 अभियंताओं पर कार्रवाई की थी। जांच में पाया गया कि अभियंताओं ने नदी की गाद सफाई (उड़ाही) के दौरान पुलों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम नहीं उठाए। सरकार ने इन दौरान नदी की उड़ाही करने वाले वाले एजेंसी पर कार्रवाई की थी। जल संसाधन विभाग के ने लापरवाही के आरोप में निर्माण एजेंसी ‘मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन’ को ब्लैकलिस्ट किया था। भागलपुर क्षेत्र में उत्तर और दक्षिण बिहार तीन महीने के लिए सड़क संपर्क से कट गया है। वजह गंगा नदी पर बने विक्रमशिला गंगा सेतु का टूट जाना। इसे ठीक करने में तीन महीने लगेंगे। 2017 के बाद से पुल की मरम्मत नहीं की गई थी। डीएम, मुख्य सचिव और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने चार बार पिलर में आई दरार को लेकर चेताया। दिल्ली और पटना आईआईटी के एक्सपर्ट्स ने पुल की जांच की रिपोर्ट दिया। बताया कि पुल धंस सकता है। इसके बाद भी भारी वाहन गुजरते रहे। 9 साल में पूरी मरम्मत नहीं हुई। पुल क्यों गिरा? इस दिशा में हमने पड़ताल की तो पता चला कि इसके पीछे बड़ी वजह सरकारी मशीनरी के काम करने का तरीका है। पुल के मेंटिनेंस की फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर घूमती रही। मंजूरी का इंतजार करती रही। इस लापरवाही का नतीजा सामने है। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, विक्रमशिला गंगा सेतु क्यों टूटा? बिहार में पुल इतनी जल्द क्यों गिर रहे हैं? इससे पहले बड़े पुल गिरने की कितनी घटनाएं हुईं? सबसे पहले जानिए विक्रमशिला पुल क्यों गिरा? पुल निर्माण निगम के मुताबिक, पुल का एक हिस्सा ध्वस्त होने के पीछे अफसरों की लापरवाही और मरम्मत नहीं होना है। विभाग ने पहली नजर में पाया कि पुल की निगरानी नहीं की गई। समय-समय पर इसकी मरम्मत नहीं हुई। निगरानी का जिम्मा पथ निर्माण विभाग के एनएच डिवीजन के पास था। विभाग ने एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता को सस्पेंड कर दिया है। पुल यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन ने बनाया था। मुख्य सचिव से एक्जीक्यूटिव इंजीनियर तक, 4 बार किया अलर्ट अलर्ट 1- 2025 में पुल के स्पैन में दरार आई थी। मार्च में तब के मुख्य सचिव भागलपुर आए थे। डीएम नवल किशोर चौधरी ने उनके सामने पुल में दरार की बात रखी थी। बताया था कि रख-रखाव सही से नहीं होने के चलते पिलर की दीवार पर 4 जगह दरार आई है। बाढ़ के कारण मिट्टी कटने से पिलर एक तरफ झुक गया है। पुल के दरार मापने के लिए पिलर पर कांच लगाए गए थे जो टूट गए हैं। अलर्ट 2- फरवरी 2025 में नेशनल हाईवे के पूर्व ईई मनोरंजन कुमार पांडेय ने बताया था कि पिलर प्रोटेक्शन पर दरार पानी के तेज दबाव आई है। मेंटिनेंस कराना चाहिए था। पुल के कार्बन प्लेट और एक्सपेंशन ज्वाइंट की दरारों से खतरा बढ़ता है। इससे हादसा हो सकता है। अलर्ट 3- 11 अप्रैल 2026 को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने सेतु का सघन निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पुल के कई पिलरों की बेयरिंग खराब हो चुकी है। अलर्ट 4- 30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी। उस वक्त इंजीनियर्स ने कहा था, गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस स्थिति में प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुई है। इसका असर पिलर्स पर पड़ेगा। बाढ़ के समय यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ सकती है। मंजूरी का इंतजार करती रह गई मरम्मत वाली फाइल विक्रमशिला पुल में प्रॉब्लम थी। इसकी जानकारी पिछले महीने दी गई थी। एक्सपर्ट की टीम ने जांच कर रिपोर्ट दी थी। इसके आधार पर DPR (Detailed Project Report) बनाई गई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। पुल के मेंटिनेंस संंबंधी फाइल सरकारी दफ्तर में घूमती रही। सूत्रों के अनुसार करीब 25 दिन से यह फाइल पथ निर्माण विभाग में है। मंजूरी का इंतजार था। इसी दौरान पुल का एक हिस्सा गिर गया। पुल निर्माण निगम के एमडी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कहा, ‘बीच में एक बार सूचना आई थी। एक महीना पहले बताया गया था कि पुल में कुछ प्रॉब्लम है। इसके बाद पटना आईआईटी और पथ निर्माण विभाग की टीम जांच करने गई थी।’ 9 साल पहले हुआ था विक्रमशिला पुल का मेंटिनेंस 2016 अक्टूबर-नवंबर में मुंबई की रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट्स ने बरारी की ओर स्पेन में कार्बन प्लेट चिपकाया था। एजेंसी के इंजीनियर ने इसकी समय-समय पर जांच कराने की बात कही थी। बताया था कि इससे पुल को नुकसान नहीं होगा। पहले पुल के रख-रखाव की जिम्मेदारी पुल निर्माण निगम के खगड़िया डिवीजन के पास थी। कार्बन प्लेट चिपकाने के बाद डिवीजन स्तर से इसकी जांच नहीं की गई। पुल जब ट्रांसफर होकर पुल निर्माण निगम के भागलपुर डिवीजन के पास आया तो भी कार्बन प्लेट की स्थिति की जांच नहीं हुई। मुंबई की एजेंसी से पुल की मरम्मत कराने में 14 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। एजेंसी ने पुल के स्पेन को जैक लगाकर उठाया था और मरम्मत की थी। एक्सपेंशन ज्वाइंट का भी रिपेयर किया गया था। आईआईटी दिल्ली की एक टीम ने भी पुल की जांच की थी। उसने भी पुल की मजबूती पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद रिपेयर का काम शुरू हुआ था। पिछले 10 साल में पुल की तीन बार मरम्मत की गई। मार्च 2026 में भी इसका रिपेयर वर्क हुआ, लेकिन पुल की हालत पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई थी। भारी गाड़ी गुजरने पर आती थी धड़ाम-धड़ाम की आवाज पुल के पिलर को गंगा नदी की तेज धारा से बचाने के लिए बनाए गए प्रोटेक्शन वॉल में दरार आई है। मिट्टी कटने से पिलर एक तरफ झुक गया है। पुल के जॉइंट में दरार बढ़ गई है। 2016-17 में पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट और बियरिंग बदले गए थे। 5-6 साल बाद ही एक्सपेंशन ज्वाइंट खराब होने लगे थे। इसका गैप बढ़ गया था, जिससे बियरिंग पर लोड बढ़ गया था। एक्सपेंशन ज्वाइंट खराब होने से पुल से भारी वाहन के गुजरने पर धड़ाम-धड़ाम की आवाज आती थी। बिहार में 4 साल में गिरे 20 पुल विक्रमशिला पुल गिरने की घटना अकेली नहीं है। बिहार में पुल गिरने की घटनाएं कुछ ज्यादा ही होती हैं। 4 साल में 20 से अधिक पुल गिरे हैं। ग्राफिक-1
भागलपुर के सुल्तानगंज में बन रहा पुल 3 बार गिरा भागलपुर जिले में 1710 करोड़ रुपए की लागत से सुल्तानगंज-अगवानी पुल बन रहा है। गंगा नदी पर बन रहा चार लेन का यह पुल तीन बार ध्वस्त हो चुका है। पहला हादसाः 30 अप्रैल 2022 को तेज आंधी और बारिश के कारण पिलर नंबर 4, 5 और 6 को जोड़ने वाला सुपर स्ट्रक्चर का लगभग 100 फीट हिस्सा गिर गया था। दूसरा हादसाः 4 जून 2023 को पिलर नंबर 10, 11, 12 और 13 के बीच का सुपर स्ट्रक्चर और सब स्ट्रक्चर (लगभग 200 मीटर) ढह गया। तीसरा हादसाः 17 अगस्त 2024 को पिलर नंबर 9 और 10 के बीच का सुपर स्ट्रक्चर गंगा नदी में समा गया था। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के मुताबिक यह पुराना क्षतिग्रस्त हिस्सा था, जिसे हटाया जा रहा था, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण यह गिर गया। बिहार में बन रहे पुल जल्द क्यों गिर रहे? जल संसाधन विभाग ने बिहार में गिरे पुलों की जांच की तो काफी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विभाग की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार पुल गिरने के पीछे असल वजह इसके निर्माण में भारी गड़बड़ी रही है। भ्रष्टाचार का अहम रोल है। कमीशन खोरी की वजह से पुल का निर्माण तय मापदंड पर नहीं हुआ। गुणवत्ता खराब रही। पुल गिरने की घटनाएं बढ़ी तो नीतीश सरकार ने किया था 15 इंजीनियरों को निलंबित पुल गिरने की घटनाएं बढ़ने के बाद जुलाई 2024 में तब की नीतीश सरकार ने 15 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया था। इनमें कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता शामिल थे। जल संसाधन विभाग ने 11 और ग्रामीण कार्य विभाग ने 4 अभियंताओं पर कार्रवाई की थी। जांच में पाया गया कि अभियंताओं ने नदी की गाद सफाई (उड़ाही) के दौरान पुलों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम नहीं उठाए। सरकार ने इन दौरान नदी की उड़ाही करने वाले वाले एजेंसी पर कार्रवाई की थी। जल संसाधन विभाग के ने लापरवाही के आरोप में निर्माण एजेंसी ‘मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन’ को ब्लैकलिस्ट किया था।


