घोर नक्सल प्रभावित इस गांव में जली विकास की पहली लौ, दशकों बाद 106 घरों में लौटी रोशनी, चेहरे पर दिखी खुशी

घोर नक्सल प्रभावित इस गांव में जली विकास की पहली लौ, दशकों बाद 106 घरों में लौटी रोशनी, चेहरे पर दिखी खुशी

CG News: सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत घने जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम रास्तों के बीच बसे पुसगुड़ा गांव में आखिरकार वर्षों बाद बिजली पहुंच गई है। यह वही घोर नक्सल प्रभावित गांव है, जो अब तक नक्शे पर तो मौजूद था, लेकिन विकास की रोशनी से कोसों दूर रहा। पहली बार जब गांव के घरों में बल्ब जले तो यह सिर्फ बिजली कनेक्शन नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन में बदलाव की नई शुरुआत बन गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर खुशी और उम्मीद साफ झलक रही है।

जिला मुख्यालय से लगभग 108 किलोमीटर दूर स्थित पुसगुड़ा तक पहुंचना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। कच्चे रास्ते, पहाड़ी चढ़ाई, घने जंगल और बरसात में दलदल बन जाने वाली पगडंडियां इस गांव को वर्षों तक मुख्यधारा से अलग रखे हुए थीं। ऐसे दुर्गम क्षेत्र में बिजली पहुंचाना तकनीकी कार्य से कहीं ज्यादा साहस, धैर्य और संकल्प की मांग करता था। प्रशासन ने इस चुनौती को प्राथमिकता में लेते हुए मिशन मोड में कार्य कर इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।

बदलाव की नई रोशनी

पुसगुड़ा में बिजली पहुंचना सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि उस परिवर्तन का संकेत है जहां अब सुकमा के सबसे दूरस्थ और कठिन क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा से जुडऩे लगे हैं। यह पहल न केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में आत्मविश्वास और नई उम्मीद जगाने वाला कदम भी है।

ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ी

पुसगुड़ा निवासी सुन्नम लक्ष्मी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘हमारे गांव में बिजली का आना किसी चमत्कार से कम नहीं है।’’ अब गांव में टीवी, पंखा, मोबाइल चार्जिंग और रात में पढ़ाई जैसी सुविधाएं संभव हो सकेंगी। वर्षों से लालटेन और सीमित संसाधनों पर निर्भर जीवन अब आधुनिक सुविधाओं की ओर बढ़ेगा।

कठिन हालात में पूरा हुआ कार्य

कार्यपालन अभियंता हिलोन ध्रुव के अनुसार, कई स्थानों पर मशीनें नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में खंभे, तार और अन्य सामग्री मानव श्रम व स्थानीय सहयोग से जंगलों और पहाडिय़ों के बीच पहुंचाई गई। विभागीय टीम ने विषम परिस्थितियों में लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। इस परियोजना के तहत गांव के 106 ग्रामीणों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया।

संकल्प व प्रतिबद्धता का परिणाम

कलेक्टर अमित कुमार ने बताया कि पुसगुड़ा तक बिजली पहुंचाना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रशासन की प्रतिबद्धता की परीक्षा थी। घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीम ने लगातार प्रयास कर यह सुनिश्चित किया कि गांव के अंतिम घर तक बिजली पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुसगुड़ा में जला हर बल्ब बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, परिवारों की सुविधा और गांव के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है।

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