अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का आयोजन:भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग तेज, हर गांव तक पहुंचेगा आंदोलन

अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का आयोजन:भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग तेज, हर गांव तक पहुंचेगा आंदोलन

मगही भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में अरवल मोड़ पर एक मगही चौपाल का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता गौतम परासर ने की। यह चौपाल मगही आंदोलन से जुड़े लोगों के सहयोग से आयोजित की गई थी। इस अवसर पर वक्ताओं ने घोषणा की कि मगही चौपाल का आयोजन अब हर गांव में किया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना है। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वजीत अलबेला द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। सन्नी कश्यप ने मगध क्षेत्र और मगही भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। समाजवादी नेता संजय कुमार ने भी मगही भाषा के लिए चल रहे आंदोलन पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मगही भाषा की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने लोगों से जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में मगही दर्ज कराने की अपील की। साथ ही, युवा पीढ़ी को मगही भाषा के अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक गौतम परासर ने बताया कि यह अभियान मगही भाषी क्षेत्रों के हर गांव तक पहुंचाया जाएगा और लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस अवसर पर प्रोफेसर दिलीप कुमार, विनय कुमार विद्यार्थी, अशोक कुमार, अजय कुमार, कमलेश शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मगही भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में अरवल मोड़ पर एक मगही चौपाल का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता गौतम परासर ने की। यह चौपाल मगही आंदोलन से जुड़े लोगों के सहयोग से आयोजित की गई थी। इस अवसर पर वक्ताओं ने घोषणा की कि मगही चौपाल का आयोजन अब हर गांव में किया जाएगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना है। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वजीत अलबेला द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। सन्नी कश्यप ने मगध क्षेत्र और मगही भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। समाजवादी नेता संजय कुमार ने भी मगही भाषा के लिए चल रहे आंदोलन पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मगही भाषा की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने लोगों से जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में मगही दर्ज कराने की अपील की। साथ ही, युवा पीढ़ी को मगही भाषा के अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक गौतम परासर ने बताया कि यह अभियान मगही भाषी क्षेत्रों के हर गांव तक पहुंचाया जाएगा और लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस अवसर पर प्रोफेसर दिलीप कुमार, विनय कुमार विद्यार्थी, अशोक कुमार, अजय कुमार, कमलेश शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *