मध्य प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री उमा भारती आज यानी की 03 मई को अपना 65वां जन्मदिन मना रही हैं। वह मध्यप्रदेश की राजनीति का ऐसा चेहरा और नाम हैं, जिसने 10 साल तक सत्ता पर काबिज रहीं कांग्रेस को हटाया और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जड़े जमाईं। उन्होंनें राज्य में ऐसी जड़े जमाई कि आज भी राज्य में भाजपा ही सत्ता पर काबिज है। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पूर्व सीएम उमा भारती के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में 03 मई 1959 को उमा भारती का जन्म हुआ था। उमा भारती ने बचपन से ही हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन शुरूकर दिया था। जिसका प्रभाव आज भी उमा भारती के बयानों और विचारों में नजर आता है। उमा भारती अविवाहित हैं और उन्होंने अपना जीवन धर्म के प्रचार-प्रसार में लगाने का संकल्प लिया। वह अब तक तीन किताबें लिख चुकी हैं।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका
उमा भारती के सियासी सफर की शुरूआत ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सानिध्य में शुरू हुई थी। उमा भारती ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी। राम जन्मभूमि को बचाने के लिए उमा ने पार्टी से निलंबन के बाद भोपाल से लेकर अयोध्या तक की कठिन पद यात्रा की। साध्वी ऋतंभरा के साथ मिलकर एक आंदोलन शुरू किया। जुलाई 2007 में उमा भारती ने रामसेतु को बचाने के लिए सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट के विरोध में 5 दिन तक भूख हड़ताल भी की थी।
राजनीतिक सफर
उमा भारती ने पहला लोकसभा चुनाव साल 1984 में लड़ा था, लेकिन इस दौरान वह हार गई थीं। साल 1989 में खुजराहो से उमा भारती ने दोबारा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी। फिर साल 1991, 1996, 1998 में इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा। साल 1999 में उमा भारती भोपाल सीट से सांसद निर्वाचित हुईं। वहीं वाजपेयी सरकार में उन्होंने मानव संसाधन विकास, युवा मामले एवं खेल, पर्यटन, कोयला और खदान जैसे कई राज्य स्तरीय और कैबिनेट स्तर के पदों का कार्यभार संभाला था।
MP की पहली महिला मुख्यमंत्री
साल 2003 के विधानसभा चुनाव में उमा भारती ने 10 साल से राज्य की सत्ता पर राज कर रहे दिग्विजय सिंह की सत्ता को हटाने में अहम भूमिका रही। राज्य से कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने के लिए भाजपा ने तत्कालीन कोयला मंत्री उमा भारती को एमपी बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया। उमा ने फौरन केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। फिर राज्य में आकर उन्होंने भाजपा की ऐसी जड़ें जमाईं कि दिग्विजय सिंह को सत्ता का पत्ता एकदम साफ हो गया। इसके बाद भाजपा की सरकार बनते ही उमा भारती को एमपी का सीएम बनाया गया। उमा भारती एमपी की पहली सीएम बनीं।
8 महीने बाद दिया इस्तीफा
उमा भारती को मुख्यमंत्री पद पर 8 महीने ही हुए थे, इसी बाच साल 1994 में उनके खिलाफ एक वारंट जारी हुआ। यह वारंट हुबली कोर्ट की तरफ से जारी किया गया था। ऐसे में उमा भारती को सीएम की कुर्सी पर बैठने के महज 8 महीने बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।


